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कोरोना फैलाने का कोई प्रमाण नहीं, फिर भी जम्मू-कश्मीर सरकार कटवाएगी 42000 रूसी पेड़, जानें- क्या है मामला?

Coronavirus in India: कश्मीर में 1.8 से 2 करोड़ के बीच रूसी चिनार के पेड़ हैं। इनमें 64,444 पेड़ों की पहचान परेशानी पैदा करने वाले पेड़ों के रूप में की गई है।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

Coronavirus in India: जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस के प्रसार के बीच प्रशासन ने एक अहम फैसले के तहत प्रदेश में 42,000 रूसी मादा चिनार के पेड़ कटवाने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि इन पेड़ों से खतरनाक संक्रमण फैल रहा है। ऐसे समय में जब केंद्र शासित प्रदेश में कोरोना वायरस का खतरा पैदा हो गया है तो रूसी मादा चिनार का संक्रमण कथित तौर पर लोगों को अधिक नुकसान पहुंचा सकता है।

सामाजिक वानिकी विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक कश्मीर में 1.8 से 2 करोड़ के बीच रूसी चिनार के पेड़ हैं। इनमें 64,444 पेड़ों की पहचान परेशानी पैदा करने वाले पेड़ों के रूप में की गई है। हालांकि इस प्रजाति के नर पेड़ संक्रमण पैदा नहीं करते।

दो अप्रैल, 2020 को एक सरकारी आदेश में कहा गया, ‘कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार के बीच 2 अप्रैल को डिविजन कमिश्वर कश्मीर और आईएएस पांडुरंग के पोले की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई है। इसमें फूलों के मौसम की शुरुआत से पहले इस खतरे से छुटकारा पाने के उपाय के तहत पराग के असर (संक्रमण) से छुटकारा पाने के लिए 42,000 पेड़ों को काटने की जरुरत है।

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हालांकि कोरोना वायरस के संदर्भ में इन पेड़ों को काटे जाने पर चिकित्सा विशेषज्ञों को चौंका दिया है कि क्योंकि दुनिया में कहीं भी इस बात का प्रमाण नहीं मिले हैं कि पराग (pollen) कोरोना को प्रसारित कर सकता है। ऐसे में प्रशासन का निर्देश इन पेड़ों पर निर्भर हजारों लोगों की आजीविका को खतरे में डालता है। इसके अलावा विशेषज्ञों ने भी चेतावनी दी है कि इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई घाटी में हर-भरे हिस्से को कम कर देगी। इसका प्रर्यावरण पर भी विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।

उल्लेखनीय है कि रूसी मादा चिनार प्रजातियों के पेड़ों में कपास जैसा पदार्थ होता है जिसे गलती से एलर्जेन (allergen) माना जाता है। इसके अलावा मादा पेड़ों की अनिवार्य कटाई या छंटाई के लिए केंद्र शासित सरकार के पिछले सप्ताह के आदेश ने किसानों और व्यापार से जुड़े लोगों को चिंतित कर दिया है। घाटी के विभिन्न क्षेत्रों में यह अभियान शुरू हो चुका है।

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