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कश्‍मीर: आर्मी की सबसे महत्‍वपूर्ण छावनी में जमीन की बंदरबाट, दो पूर्व अधिकारियों पर केस दर्ज

बादामी बाग छावनी कश्मीर घाटी में सबसे महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों में से एक है। यहां भारतीय सेना के 15 कॉर्प्स का मुख्यालय भी है। यह मुख्यालय चिनार कॉर्प्स के रूप में भी खासा मशहूर है।

Author Published on: March 17, 2019 1:09 PM
प्रतीकात्मक फोटो (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

सीबीआई ने श्रीनगर स्थित बादामी बाग छावनी के दो पूर्व सीईओ और कुछ निजी व्यक्तियों के खिलाफ रक्षा रक्षा जमीन हथियाने का केस दर्ज किया है। पूर्व अधिकारियों पर जिस जमीन को हथियाने का आरोप लगा है उसकी कीमत करोड़ों रुपए बताई गई है। बता दें कि बादामी बाग छावनी कश्मीर घाटी में सबसे महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों में से एक है। यहां भारतीय सेना के 15 कॉर्प्स का मुख्यालय भी है। यह मुख्यालय चिनार कॉर्प्स के रूप में भी खासा मशहूर है। जांच एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से जानकारी मिलने के बाद पिछले साल बादामी बाग छावनी के जूनियर इंजीनियर तारिक अहमद खांडे के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की थी। इसके अलावा रक्षा संपदा ऑफिस के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ भी निजी व्यक्तियों को रक्षा भूमि पर लाइसेंस/निर्माण की अनुमति जारी करने के आरोप के चलते जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि छावनी बोर्ड क्षेत्र में होटल सोलेमन, सरकारी छावनी जीपी पंत चिल्ड्रन हॉस्पिटल के पास तारिक अहमद वाणी से संबंधित एक अनाम होटल, सोनावर में ट्रेंबो जॉइनरी मिल्स सालों से चल रहे थे।

जानकारी सामने आई है कि होटल सोलोमन डिफेंस अथॉरिटी द्वारा इंदराज शर्मा नाम के शख्स को बीस साल के लिए 1954 से 1774 के बीच लीज पर दिया गया था। शर्मा ने साल 1960 में इसे पट्टे पर एक शख्स अब्दुल मजीद बख्सी को दिया। बताया जाता है कि 11 कनाल क्षेत्र में सभी सुविधाओं सुसज्जित इस होटल की कीमत करोड़ो रुपए है। वर्तमान में इस होटल का संचालन मुनीर अहमद बख्सी द्वारा किया जा रहा है जबकि इसकी लीज की सीमा पहले ही समाप्त हो चुकी है। डिफेंस अथॉरिटी द्वारा भी होटल को चलाने की अनुमति नहीं दी गई है मगर होटल नियमित तौर पर मेहमानों को ले रहा है जबकि रक्षा अधिकारियों को इसका कुछ भी भुगतान नहीं किया जा रहा।

ऐसे ही तारिक अहमद वाणी का होटल है जो रक्षा जमीन की बी-3 पर स्थित है। मगर यह होटल भी गैरकानूनी तरीके से चलाया जा रहा है। जानकारी सामने आई कि होटल मूल रूप से दुर्गानंद ट्रस्ट को इसके अध्यक्ष पीएन टाकू के जरिए दिया गया। मगर इस होटल की लीज सालों पर पहले खत्म हो चुकी है। जूनियर इंजीनियर तारिक अहमद ने होटल के संचालन के लिए वाणी को अनुमति दी। इसी तरह राष्ट्रीय राजमार्ग के पास 11 मारला रक्षा भूमि पर स्थित ट्रेंबो जॉइनरी मिल्स के बारे में, सीबीआई का कहना है कि यह भी दुर्गानंद ट्रस्ट को भी दिया गया था, जिसकी लीज पहले ही समाप्त हो चुकी है।

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