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आर्मी स्कूल के शिक्षकों की बगावत: आतंकी सब्जार भट को शहीद बताने वाले टीचर के समर्थन में दिया सामूहिक इस्तीफा

शरीफाबाद के आर्मी गुडविल स्कूल की प्रिंसिपल शाहिदा खान ने मुदस्सर अब्दुल्ला नामक एक अध्यापक के निष्कासन की पुष्टि की।

इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

कश्मीर में सेना द्वारा चलाए जा रहे एक स्कूल में स्थानीय शिक्षक को निकाले जाने के विरोध में अब अन्य शिक्षक भी आ गए हैं। इन शिक्षकों ने प्रशासन के इस फैसले के विरोध में अपना इस्तीफा सौंप दिया है। दरअसल बीते दिनों सेना द्वारा मारे गए हिजबुल कमांडर आंतकी सब्जार भट को एक शिक्षक ने शहीद बता दिया था जिसके बाद प्रशासन उन्हें निकाल दिया। शरीफाबाद के आर्मी गुडविल स्कूल की प्रिंसिपल शाहिदा खान ने मुदस्सर अब्दुल्ला नामक एक अध्यापक के निष्कासन की पुष्टि की। हालांकि एक अध्यापक ने मामले में जानकारी देते हुए कहा कि अभी औपचारिक रूप से निष्कासन का आदेश जारी नहीं किया गया है। लेकिन सेना के एक कमांडिंग ऑफिसर ने उन्हें स्कूल छोड़ने के लिए कहा। दूसरी तरफ मुदस्सर अब्दुल्ला बीते सोमवार से स्कूल में नहीं आ रहे हैं।

स्कूल की प्रिंसिपल शाहिदा खान ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि स्कूल के ज्यादातर शिक्षकों (करीब 30) ने अपने इस्तीफे दिए हैं। लेकिन सभी शिक्षकों के इस्तीफों को अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है। हालांकि मैंने सभी शिक्षकों से समस्या के समाधान के लिए प्रबंधन से मिलने के लिए कहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या सभी शिक्षकों ने विरोध में एकजुटता दिखाते हुए अपने पत्रों को सौंप दिया था, इस पर शाहिदा खान ने कहा कि ऐसा ही कुछ है, लेकिन विस्तार से मामले में बताने से उन्होंने इंकार कर दिया।

दूसरी तरफ एक अन्य टीचर ने मामले में ज्यादा जानकारी देते हुए बताया कि हाल में कक्षा 9 के छात्रों ने स्कूल नोटिस बोर्ड पर ‘आजादी’ लिखा था। इसपर आर्मी अधिकारी ने स्कूल शिक्षकों से पूछा की इस तरह की घटनाएं क्यों हो रही हैं। इस दौरान शिक्षक अब्दुल्ला ने कहा कि सब्जार भट के मारे जाने के बाद चीजें अस्थिर हो गई हैं। जिसकी वजह से छात्र स्कूल नोटिस बोर्ड पर ये सब लिख रहे हैं। इस दौरान आर्मी ऑफिसर ने मुदस्सर अब्दुल्ला से पूछा कि उन्होंने आंतकी को शहीद के रूप में कैसे संबोधित किया। टीचर ने आगे कहा कि सच तो ये हैं कि हम कश्मीरी मारे गए आंतकियों को शहीद के रूप में देखते हैं। यही हमारे बोलने का तरीका बन गया है। इसके लिए हमने संबंधित अधिकारियों को भी समझाया लेकिन उन्होंने इसपर अपना भारी विरोध दर्ज कराया।

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