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कश्‍मीर: 2009 के बाद सबसे खूनी साल रहा 2018, 590 आतंकी घटनाओं में 400 से ज्‍यादा मौतें

यह साल सुरक्षाबलों के लिए भी खास रहा, क्योंकि इस दौरान सुरक्षाबलों ने घाटी में कई टॉप आतंकी कमांडरों को ढेर किया और आतंकवाद पर कुछ हद तक लगाम कसी।

Jammu kashmirजम्मू कश्मीर में साल 2018, 2009 के बाद सबसे हिंसक रहा। (file pic)

जम्मू कश्मीर में पिछले कई सालों से हिंसा का दौर जारी है, लेकिन आंकड़ों की मानें तो साल 2009 के बाद साल 2018 घाटी में सबसे ज्यादा हिंसाग्रस्त साल रहा। इस दौरान कश्मीर में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जिनमें ढाई सौ से ज्यादा आतंकी शामिल हैं। सेना से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस साल कश्मीर घाटी में आतंकी और हिंसक वारदातों के दौरान कुल 444 लोग मारे गए, जिनमें सुरक्षाबलों के जवान, आतंकी और आम नागरिक शामिल हैं। इस साल कश्मीर में 590 आतंकी या उससे जुड़ी घटनाएं घटी, इन घटनाओं में 256 आतंकी अभी तक मार जा चुके हैं। ये आतंकी, घाटी में विभिन्न मुठभेड़ और लाइन ऑफ कंट्रोल पर घुसपैठ के दौरान मारे गए हैं।

इस साल आतंकी हमलों के दौरान सुरक्षाबलों के 87 जवान मारे गए हैं, जिनमें 45 पुलिसकर्मी हैं। इनके अलावा इस साल 101 आम नागरिक भी मारे गए हैं। आम नागरिकों की मौतें एनकाउंटर वाली जगह पर गोलीबारी में या फिर आतंकियों द्वारा अंजाम दी गईं। हालांकि यह साल सुरक्षाबलों के लिए भी खास रहा, क्योंकि इस दौरान सुरक्षाबलों ने घाटी में कई टॉप आतंकी कमांडरों को ढेर किया और आतंकवाद पर कुछ हद तक लगाम कसी। इस साल सुरक्षाबलों ने विभिन्न मुठभेड़ के दौरान लश्कर ए तैयबा के कमांडर नवीद जट, मेराजउद्दीन बंगारु, आजाद अहमद मलिक, हिज्बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर समीर टाइगर, सद्दाम पद्दार, मनान वानी और जैश ए मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर के भांजे उस्मान हैदर समेत कई टॉप आतंकियों को ढेर किया है।

सेना ने घाटी में आतंक पर लगाम कसने के लिए ऑपरेशन ऑल आउट की शुरुआत की थी। जिससे सेना को उल्लेखनीय सफलता भी मिल रही है। स्थिति ये है कि सेना ने एक समय कश्मीर में आतंक के पोस्टर ब्वॉय माने जाने वाले अधिकतर आतंकियों को ढेर कर दिया है। अब कश्मीर में स्थापित आतंकियों की बात करें तो हिज्बुल मुजाहिद्दीन का रियाज नाइकू, अलबदर का जीनत-उल-इस्लाम और अंसार गजवत उल हिंद का चीफ जाकिर मूसा ही सक्रिय हैं, जिन पर भी जल्द शिकंजा कसने की कोशिश की जा रही है। कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में इस साल कमी रही। एनआईए द्वारा आतंकी फंडिंग के खिलाफ की गई कार्रवाई का असर इस साल पत्थरबाजी की घटनाओं पर देखने को मिला औऱ इस मामले में राहत रही।

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