जम्मू-कश्मीर का यह गांव अभी ‘डिजिटल इंडिया’ से दूर, पहाड़ी पर बैठ ऑनलाइन क्लास लेते हैं बच्चे

मंजूर अहमद चक बताते हैं कि यहाँ अभी तक एक लैंडलाइन भी नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा पाने के लिए मेरा संघर्ष अब हमारे बच्चों का संघर्ष है।

digital india
पहाड़ी पर बैठ ऑनलाइन क्लास करते बच्चे। एक्सप्रेस

नवीद इक़बाल

जहां एक तरफ़ पूरी दुनिया इंटरनेट के जरिये एक दूसरे से जुड़ी हुई है, और वही दूसरी तरफ ऐसे भी जगह है जहाँ अभी तक लोग इंटरनेट क्रांति से महरूम हैं। जम्मू कश्मीर के एक शिक्षक मंजूर अहमद चक अपनी ड्यूटी करने के लिए अपने गांव से 3 किमी पैदल जाते है । जहाँ एक पहाड़ी पर चढ़ने के बाद उनके स्मार्टफोन में नेटवर्क की कनेक्टिविटी हो पाती है। वो वहाँ जाकर अपने जम्मू-कश्मीर के शिक्षा विभाग के लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल पर रोज की पढाई की योजना अपलोड कर पाते हैं ।

मंजूर अहमद चक के साथ उनके इलाक़े के सरकारी स्कूलों के छात्र भी बैठते हैं । वह बच्चे अपने माता-पिता के फोन पर अपने क्लासवर्क को डाउनलोड करने के लिए इंतज़ार करते हैं। लेकिन नेटवर्क कभी भी ऑनलाइन कक्षाओं के लिए ठीक नहीं रहता है। लेकिन बच्चे थोड़ी बहुत नेटवर्क कनेक्टिविटी के जरिए ही पढ़ने की कोशिश करते हैं ताकि वह उसको घर जाकर दोहरा सकें।

मंजूर अहमद चक बताते हैं कि हाई स्कूल के शिक्षक और छात्र बारामूला के लिम्बर के रहने वाले हैं। जिनका गाँव श्रीनगर से 90 किमी दूर झेलम के दूसरे छोर पर एक पहाड़ी के ऊपर है। जहाँ अभी भी सड़क का निर्माण का काम किया जा रहा है। वो बताते हैं कि यहाँ अभी तक एक लैंडलाइन भी नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा पाने के लिए मेरा संघर्ष अब हमारे बच्चों का संघर्ष है।

लगभग 650 घरों के एक गांव के बच्चों के लिए वह छोटा सी जगह ओएसिस है जहां वे अपनी पढाई करते हैं। पढाई के साथ साथ एकदूसरे से मेलजोल भी करते हैं ।यहां तक ​​​​कि अपनी ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए यही से लॉगिन करते हैं।
अपने बेटे को लेकर आए लिम्बर निवासी सज्जाद अहमद बताते हैं कि इस क्षेत्र में कुछ जंगली जानवर भी है। यहां पर कई बार भूरे भालू भी देखे गए हैं। हम अपने बच्चों को यहां अकेले नहीं भेज सकते हैं। उन्होंने बताया कि हम अपने उन्हें शाम 6 बजे के बात यहां नहीं आने देते हैं।

गाँव में 2011 की जनगणना करने वाली टीम का हिस्सा इस तरह अहमद बताते हैं कि गांव के अंदर लोग एक दूसरे से संपर्क करने के लिए अभी भी एक-दूसरे के घर ही जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 20 प्रतिशत आबादी अपने बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए हर साल अस्थायी रूप से पलायन करती है।

2007 से पढ़ा रहे मंजूर अहमद चक का कहना है कि कोरोनावायरस के कारण स्कूल बंद है। जिसकी वजह से छात्र अक्सर नोट्स लेने के लिए मेरे घर पर आ जाते हैं। आगे वह कहते हैं कि यहाँ प्राइमरी स्कूलों के अलावा केवल एक सेकेंडरी स्कूल और तीन मिडिल स्कूल है। सभी छात्रों को 10वीं की पढ़ाई को पूरा करने के बाद उन्हें कॉलेज की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों की ओर जाना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि बारामूला के लिए एक तरफ का किराया खाने के साथ 70 रुपये है। कॉलेज आने के लिए रोज का खर्चा लगभग ढाई सौ रुपये है। उन्होंने कहा कि यहां रहने वाले ज्यादातर परिवारों की आय बहुत कम है। जो लोग बाहर जाने की हिम्मत करते हैं उनके लिए भी तमाम प्रकार की समस्याएं होती है।

हरियाणा के कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बी.टेक कर रहे 20 वर्षीय छात्र आकिब हफीज का कहना है कि जब वह पहली बार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय गए थे तो उन्हें अपने सहपाठियों से बात करने में बहुत मुश्किल हो रही थी। उन्होंने कहा कि भाषा के अलावा भी कई ऐसे मुद्दे हैं जो परेशानी खड़ी करते हैं।

हाल में ही 12वीं की परीक्षा पास करने वाले 18 वर्षीय रौफ अहमद कहते हैं कि उन्हें एक क्लास के लेक्चर को डाउनलोड करने में 4 दिन लगते हैं। आईएएस अधिकारी बनने की इच्छा रखने वाली 14 साल की अरवीन कहती है कि उन्होंने अपने सपनों पर पर्दा डालना सीख लिया है। क्योंकि हमें कि हम बाहरी दुनिया से कंपटीशन नहीं कर सकते है।

बेशक केवल कनेक्टिविटी छात्रों के लिए एक मुद्दा नहीं है। उनके साथ कहीं और भी समस्याएं हैं । कई निवासी बताते हैं कि उन्हें अभी तक कोरोना टीकाकरण प्रमाण पत्र तक नहीं मिले हैं। स्थानीय निवासी मोहम्मद हमीद खान कहते हैं कि गाँव में कई लोगों को और विशेषकर बुजुर्गों को टीका लगाया गया है। लेकिन इंटरनेट तक पहुंच ना होने के कारण अभी तक किसी को कोई भी टीकाकरण कराने का प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया है।

एक सिविल कांट्रेक्टर तसलीम आरिफ ने बताया कि इलाके में एटीएम नहीं जिसके कारण उन्हें हफ्ते में एक दिन एटीएम जाने के लिए अलग से निकालना पड़ता है। रिकॉर्ड के अनुसार जम्मू-कश्मीर के लिम्बर में 150 से अधिक गांवों में से एक है। इसमें अभी तक प्रभावी रूप से मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचा है। संपर्क करने पर जब बारामूला के उपायुक्त भूपिंदर कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि कहा कि लिम्बर का यह मुद्दा मेरे जानकारी में नहीं था। मामला संज्ञान में आने के बाद मैं इसकी जांच करूंगा।

पढें राज्य समाचार (Rajya News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट