जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पानी की समस्या को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने मंगलवार को उम्मीद जताई कि सिंधु जल संधि के सस्पेंड होने के बाद दो लंबे समय से रुके हुए वॉटर प्रोजेक्ट्स पर जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। ये दोनों प्रोजेक्ट्स जम्मू शहर को सप्लाई के लिए चिनाब नदी से पानी उठाना और कश्मीर में झेलम के पानी को रेगुलेट करने के लिए तुलबुल नेविगेशन बैराज बनाना है।
उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?
उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा को बताया कि सिंधु जल संधि की वजह से इन प्रोजेक्ट्स पर काम पहले शुरू नहीं हो सका था। उन्होंने कहा, “हमने ये प्रपोजल एशियन डेवलपमेंट बैंक को दिए थे, लेकिन उन्होंने उन्हें इजाजत नहीं दी और इंडस वॉटर ट्रीटी के तहत इन्हें रोक दिया गया।”
उमर अब्दुल्ला ने कहा, “अब जब सिंधु जल संधि को रोक दिया गया है, तो हम भारत सरकार के साथ दो चीज़ों पर काम कर रहे हैं। पहला सोपोर के पास झेलम के लिए तुलबुल नेविगेशन बैराज और दूसरा जम्मू शहर को सप्लाई के लिए अखनूर के पास चिनाब से पानी उठाना।” उन्होंने आगे कहा कि कोशिशें चल रही हैं और मुझे उम्मीद है कि इन दोनों प्रोजेक्ट्स पर काम जल्द ही शुरू हो जाएगा।
बीजेपी विधायक शाम लाल शर्मा ने सवाल पूछा कि जम्मू म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाकों में रहने वाले लोगों की पानी की सप्लाई की मांग को पूरा करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है? इसका सवाल का जवाब देते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, “हमें अगले 30-40 सालों तक जम्मू की पानी की सप्लाई की मांग को पूरा करने के बारे में सोचना होगा और पारंपरिक (मौजूदा) पानी की सप्लाई से हम इसे पूरा नहीं कर सकते।”
सिंधु जल संधि से क्या था नुकसान?
सिंधु जल संधि के कारण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से पाकिस्तान तक नदी का पानी बिना रुकावट के जाता था। पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इसे सस्पेंड कर दिया। उमर अब्दुल्ला ने लंबे समय से सिंधु जल संधि का विरोध करते हुए इसे सबसे गलत संधि बताया है। उन्होंने कहा है कि इसने जम्मू-कश्मीर के लोगों को नुकसान पहुंचाया है, क्योंकि इसने इलाके को नदी का पानी स्टोर करने से रोक दिया है और सिर्फ़ रन-ऑफ-द-रिवर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स की इजाजत दी है।
तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट का आइडिया 1980 के दशक की शुरुआत में आया था और इस पर काम 1984 में शुरू हुआ था। इस प्रोजेक्ट का मकसद सोपोर के पास वुलर झील के मुहाने पर ड्रॉप गेट लगाना था ताकि झेलम नदी में पानी का लेवल रेगुलेट हो सके, जिससे सर्दियों में नेविगेशन और ज़्यादा बिजली बन सके। हालांकि पाकिस्तान के एतराज के बाद 1987 में इस पर काम रोक दिया गया था।
चिनाब वॉटर सप्लाई स्कीम भी एक पुराना प्रोजेक्ट है जिसका मकसद जम्मू शहर के लोगों की पानी की सप्लाई की मांग को पूरा करना है। इस प्रोजेक्ट में अखनूर के पास चिनाब नदी से पानी उठाकर जम्मू शहर और उसके बाहरी इलाकों के लोगों को सप्लाई करने का प्लान था। अभी शहर के लोगों को तवी नदी से पानी उठाकर सप्लाई किया जाता है, जिसकी कैपेसिटी तेज़ी से बढ़ती आबादी की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कम पड़ रही है। पढ़ें कैसे ‘सिंधु नदी का पानी भारत की जरूरतों को पूरा करेगा
सिंधु जल संधि पर निलंबन के बाद मोदी सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम
