जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्कूलों के लाइब्रेरी में उपलब्ध किताब को लेकर बवाल मच गया है। किताब में आतंकवादियों और अलगाववादी नेताओं को महान हस्ती के तौर पर बताया गया। इस पर भाजपा ने सरकार को निशाने पर लिया है। भाजपा के नेता और विधानसभा प्रतिपक्ष नेता ने इसे गंभीर अपराध बताया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस किताब का नाम ग्रेट पर्सनेलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ जम्मू एंड कश्मीर है। किताब में आतंकवादी मकबूल भट्ट को ‘शहीद’ बताया और हाफिज सईद को भी महान हस्ती बताने का दावा किया गया। वहीं, अलगाववादी नेताओं सैयद अली शाह गिलानी, मसरत आलम, शब्बीर अहमद शाह और मौलवी फारूक को कश्मीर का ‘स्वतंत्रता सेनानी’ बताया गया है।
मामले में आठ अधिकारी सस्पेंड
मामले पर जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्शन लिया है और विवादित किताब के मामले में आठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। इससे पहले, स्कूल शिक्षा विभाग के कमिश्नर सेक्रेटरी ने न्यूज एजेंसी IANS को बताया था कि जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
नेता प्रतिपक्ष ने बताया गंभीर अपराध
इस पर विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) और भाजपा विधायक सुनील शर्मा ने कहा, “ये किताबें जम्मू-कश्मीर के कई स्कूलों की लाइब्रेरी में बांटी गई हैं। यह एक गंभीर अपराध है। एक ऐसी किताब जो 2008 के मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की तारीफ करती है; एक ऐसी किताब जो इस इलाके को ‘भारत के कब्जे वाला कश्मीर’ (Indian-occupied Kashmir) बताती है। ऐसी किताब आपत्तिजनक और विवादित है। इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।”
आगे उन्होंने कहा, इसके अलावा, चाहे लेखक हो, पब्लिशर हो, एक्सपर्ट कमेटी हो, और मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूँ यहाँ तक कि शिक्षा मंत्री को भी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। सरकार के मुखिया (मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला) का यह फर्ज है कि वे तुरंत शिक्षा मंत्री को पद से हटाएँ। इसमें कोई शक नहीं कि इसके पीछे एक खास एजेंडा है; यह एक बड़ी साजिश है। हमें कोई शक नहीं है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार इसमें ऊपर से नीचे तक शामिल है।”
कौन था मकबूल भट्ट?
किताब में मकबूल भट्ट पर एक पूरा चैप्टर है, जिसमें दावा किया गया है कि उन्होंने कश्मीर की आजादी के लिए बलिदान दिया। बता दें कि मकबूल भट्ट को एक सीआईडी इंस्पेक्टर और एक भारतीय राजनयिक की हत्या मामले में दोषी पाए जाने के बाद फरवरी 1984 में फांसी दे दी गई थी।
कैसे सामने आया मामला?
मामले सामने आने के बाद सरकार ने किताब के अपूर्वल, खरीद और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े सभी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। यह विवाद तब सामने आया जब जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम (जेकेपीएफ) ने आरोप लगाया कि समग्र शिक्षा योजना के तहत सरकारी स्कूलों के लाइब्रेरी में बांटी गई एक किताब में अलगाववादी नेताओं और आतंकवादियों को जम्मू-कश्मीर की महान हस्तियों और दिग्गजों के रूप में पेश किया गया।
स्कूल शिक्षा विभाग ने किताब ली वापस
स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त सचिव राम निवास शर्मा ने पुष्टि करते हुए कहा कि इस विवादित किताब को फौरन सभी सरकारी स्कूलों से वापस मंगा लिया गया है। उन्होंने कहा कि पुस्तक वापस कराई गईं है। इसके पब्लिकेशन, अप्रूबल, खरीद और डिस्ट्रीब्यूशन में शामिल अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त सचिव के अनुसार, ‘यह किताब जून 2026 में सरकारी स्कूलों में बांटी की गई थी, जबकि 3 जुलाई को वापस लेने का फैसला लिया गया।
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