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बीजेपी की रैली में फहराया उल्टा तिरंगा, पुलिस ने दर्ज किया केस

पुलिस अधिकारी ने बताया कि विनोद निझावन नाम के एक स्थानीय निवासी ने आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री जसरोटिया और बीजेपी उम्मीदवार राहुल देव शर्मा की अगुवाई में गुरुवार (27 सितंबर) को हुई रैली में राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया गया।

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा। (तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है)

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता राजीव जसरोटिया की रैली में कथित तौर पर उल्टा तिरंगा फहराए जाने पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निरोधक कानून की धारा-दो के तहत शुक्रवार (28 सितंबर) को अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। अधिकारी ने बताया कि विनोद निझावन नाम के एक स्थानीय निवासी ने आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री जसरोटिया और बीजेपी उम्मीदवार राहुल देव शर्मा की अगुवाई में गुरुवार (27 सितंबर) को हुई रैली में राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया गया। शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए गुरुवार को वॉर्ड नंबर 19 से नामांकन दाखिल करने गए शर्मा के साथ कठुआ विधानसभा क्षेत्र से विधायक जसरोटिया भी थे और उन्होंने शिवनगर स्थित अपने आवास से एक जुलूस भी निकाला था। दूसरे चरण के शहरी स्थानीय निकाय चुनाव 10 अक्टूबर को होने हैं जिसमें 4130 सरपंचों, 29719 पंचों और 1145 वार्ड आयुक्तों को चुना जाना है।

पुलिस अधिकारी ने बताया की निझावन ने एक वीडियो क्लिप पेश की जिसमें बीजेपी विधायक के पीछे खड़े व्यक्ति ने दो किलोमीटर से ज्यादा लंबी दूरी तक निकाले गए जुलूस के दौरान उल्टा तिरंगा पकड़ रखा है। अपनी शिकायत में निझावन ने कहा कि यह कृत्य ‘गंभीर’ है और इससे देशभक्त नागरिकों की भावनाएं आहत हुई हैं। अधिकारी ने कहा कि इस मामले में आगे की जांच चल रही है।

बता दें कि 2005 और 2011 के बाद अब 2018 में जम्मू-कश्मीर में शहरी स्थानीय निकाय चुनाव हो रहे हैं। राज्य की दो बड़ी पार्टियों नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने चुनाव का बहिष्कार किया है। इन पार्टियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने अभी तक अनुच्छेद 35 ए पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी है। वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने चुनावों को ऐतिहासिक महत्व वाला बताया। गृहमंत्री कह चुके हैं, ”जम्मू कश्मीर में स्थानीय निकाय चुनाव से राज्य में लंबे समय से अपेक्षित जमीनी स्तर का लोकतंत्र फिर से स्थापित होगा।’’

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