बीजेपी नेता की याचिका पर हाई कोर्ट का फैसला, जम्‍मू-कश्‍मीर में दो झंडे के इस्‍तेमाल पर लगाई रोक - Jansatta
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बीजेपी नेता की याचिका पर हाई कोर्ट का फैसला, जम्‍मू-कश्‍मीर में दो झंडे के इस्‍तेमाल पर लगाई रोक

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव फारूख खान ने सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देते हुए जस्‍ट‍िस ताशी रबस्तान और जस्‍ट‍िस बंसी लाल भट की बेंच के सामने याचिका दायर की थी।

जम्मू कश्‍मीर हाईकोर्ट ने राज्‍य में सरकारी भवनों और संविधानिक पदों पर बैठे लोगों के वाहनों पर अलग झंडा लहराने के बारे में दिए गए आदेश पर 01 जनवरी 2016 को रोक दी। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव फारुख खान ने सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देते हुए जस्‍ट‍िस ताशी रबस्तान और जस्‍ट‍िस बंसी लाल भट्ट की बेंच के सामने याचिका दायर की थी। जस्‍टि‍स हसनैन मसूदी की सिंगल बेंच ने सरकार के उस परिपत्र को सही ठहराया था, जिसमें सभी संवैधानिक अधिकारियों को अपने सरकारी भवनों एवं वाहनों पर राज्य का झंडा लगाने को कहा गया था। आगे पढ़ें, स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया का यह अहम फैसला, जो नए साल के पहले दिन से लागू हो गया

जम्मू कश्‍मीर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सरकारी भवनों और संविधानिक पदों पर बैठे लोगों के वाहनों पर राज्य का झंडा लहराने के बारे में दिये गये आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव फारूख खान ने सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देते हुए जस्‍ट‍िस ताशी रबस्तान और जस्‍ट‍िस बंसी लाल भट की बेंच के सामने याचिका दायर की थी। जस्‍टि‍स हसनैन मसूदी की सिंगल बेंच ने सरकार के उस परिपत्र को सही ठहराया था, जिसमें सभी संवैधानिक अधिकारियों को अपने सरकारी भवनों एवं वाहनों पर राज्य का झंडा लगाने को कहा गया था। बता दें कि राज्य में मुफ्ती की पार्टी पीडीपी की सहयोगी भाजपा का रुख ‘एक विधान, एक निशान, एक प्रधान’ का रहा है। भाजपा दो झंडे का विरोध करती रही है। वहीं, राज्‍य के संविधान के मुताबिक, दोनों झंडों का इस्‍तेमाल अनिवार्य तौर पर किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता के वकील सुनील सेठी ने कहा, ‘‘काफी देर तक दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने आखिरकार सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी।’’ बता दें कि झंडा घटनाक्रम से राज्य में एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यह कहते हुए मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद पर निशाना साधा था कि यदि वह अपनी सहयोगी भाजपा की ‘कुटिल’ साजिश से राज्य की मर्यादा और झंडे को बचा नहीं सकते तो उन्हें अपने पद से हट जाना चाहिए तथा कोई ऐसा ढूंढना चाहिए जो इसका बचाव कर सके।

 

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