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कुलपति के दफ्तर की मरम्‍मत पर 1.5 करोड़ खर्च करेगी Jamia Millia यूनिवर्सिटी

पिछले कुलपति नजीब जंग के कार्यकाल (2009-13) के दौरान इस कार्यालय के साज-सज्जा पर 4.8 लाख खर्च किए गए थे। जंग अभी दिल्ली के उपराज्यपाल हैं। वर्ष 2004-2009 के दौरान जब मुशीरूल हसन कुलपति थे, जब इस कार्यालय पर 54.8 लाख खर्च किए गए थे।

Author नई दिल्‍ली | January 24, 2016 5:44 PM
केंद्रीय विश्वविद्यालय जामिया मिल्लिया इस्लामिया। (फाइल फोटो)

एनएएसी टीम के दौरे पर 26 लाख रुपए खर्च करने को लेकर हाल ही विवादों में घिरे जामिया मिलिया इस्लामिया ने कुलपति के कार्यालय की मरम्मत और साज-सज्जा के लिए 1.5 करोड़ रूपए अलॉट किए गए हैं। इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर यूजीसी के हस्तक्षेप की मांग की है।उधर, यूजीसी ने इतने अधिक खर्च पर विश्वविद्यालय से सफाई मांगी है।

सामाजिक कार्यकर्ता फिरोज बख्त अहमद के आरटीआई आवेदन पर विश्वविद्यालय के जवाब के अनुसार उसने कुलपति के कार्यालय की मरम्मत और साज सज्जा के लिए 1,54,27,403 रूपए निर्धारित किया है। पिछले कुलपति नजीब जंग के कार्यकाल (2009-13) के दौरान इस कार्यालय के साज-सज्जा पर 4.8 लाख खर्च किए गए थे। जंग अभी दिल्ली के उपराज्यपाल हैं। वर्ष 2004-2009 के दौरान जब मुशीरूल हसन कुलपति थे, जब इस कार्यालय पर 54.8 लाख खर्च किए गए थे।

अहमद और उनके वकील अतयाब सिद्दीकी ने यूजीसी से शिकायत की है, ‘‘यह गहरी जांच का विषय होना चाहिए कि उस भवन एवं उसके फर्नीचर में ऐसी क्या गड़बड़ी हो गयी कि हाल के वर्षो में उनकी इतनी खर्चीली साज सज्जा की गई और एक बार फिर इस कुलपति कार्यालय की साज सज्जा के लिए इतनी बड़ी रकम की जरूरत है जबकि विश्वविद्यालय में प्रयोगशालाओं और शौचालयों की उपेक्षा की जा रही है और उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।’’ विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि बड़े पैमाने पर साज सज्जा को ध्यान में रख कर यह रकम आवंटित की गयी है लेकिन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालय से सफाई मांगी तथा इस संबंध में उपयुक्त कदम उठाने की मांग की।

क्‍या है यूनिवर्सिटी की सफाई
जामिया के प्रवक्ता मुकेश रंजन ने कहा कि उचित प्रक्रिया के बाद यह रकम आवंटित की गई है। बड़े पैमाने पर साज सज्जा के लिए यह राशि जरूरी है और वैसे भी महंगाई बढ़ गई। न केवल कुलपति कार्यालय बल्कि अन्य ढांचों के भी काम होंगे। विश्वविद्यालय जवाबदेही को ध्यान में रखकर एक एक पैसा खर्च करता है। वहीं, शिकायतकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि बुनियाढी ढांचा विकास के नियोजन से संबंधित नियोजन बोर्ड की स्थापना के बाद से ही पिछले 25 साल में एक भी बैठक नहीं हुई है।

 

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