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दमन और सम्मान के बीच झूल रहा हूं: शत्रुघ्न

जयपुर साहित्य उत्सव के आखिरी दिन सोमवार को भाजपा सांसद और सिने अभिनेता शत्रुघन सिन्हा छाए रहे। उत्सव के अंतिम दिन तीस से ज्यादा विषयों पर हुए सत्रों में लोगों की खूब भागीदारी रही

भाजपा सांसद शत्रुघ्‍न सिन्‍हा। (Photo-PTI/File)

जयपुर साहित्य उत्सव के आखिरी दिन सोमवार को भाजपा सांसद और सिने अभिनेता शत्रुघन सिन्हा छाए रहे। उत्सव के अंतिम दिन तीस से ज्यादा विषयों पर हुए सत्रों में लोगों की खूब भागीदारी रही। सिन्हा का कहना है कि राजनीति में वे दमन और सम्मान के बीच झूल रहे हैं। उत्सव के खास सत्र खामोश-शॉटगन सिन्हा स्पीक्स में शत्रुघन सिन्हा ने अपने बेबाक विचार रख श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। इसमें उन्होंने साफ किया कि एक घड़ी ऐसी भी आई जब लगा कि उन्हें राजनीति छोड़ देनी चाहिए। इस तरह के निराशा के माहौल में वे अपने गुरु लालकृष्ण आडवाणी के पास गए। आडवाणी ने उन्हें 1932 में गांधीजी की कही बात का जिक्र किया और कहा कि किसी भी आंदोलन या अभियान को आगे ले जाने के लिए चार दौर से गुजरना पड़ता है। इनमें एक उपहास, दूसरा उपेक्षा, तीसरा तिरस्कार और चौथा दमन का होता है। दमन से आगे कोई निकल गया तो फिर उसके लिए सम्मान का दौर शुरू हो जाता है। इसी पर सिन्हा का कहना था कि वे दमन और सम्मान के दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने राजनीति में अच्छे लोगों के आने की वकालत करते हुए कहा कि ऐसा नहीं हुआ तो फिर राजनीति में गंदे लोगों के साथ घुट-घुट कर जीना पड़ेगा। इसलिए राजनीति को साफ रखने के लिए अच्छे लोगों को इसमें आना होगा।

सिन्हा ने सामाजिक जीवन में साफ-सुथरेपन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उनके बच्चे इसका पूरा ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में दुश्मनी स्थायी नहीं होती है। दुश्मनी इतनी भी नहीं करनी चाहिए कि जब दोस्त बन जाए तो शर्मिंदा नहीं होना पड़े। सिन्हा ने बताया कि राजनीति और फिल्मों में उनका कोई गॉडफादर नहीं है। राजनीति में ईमानदार नेता को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। स्वाभिमान और गौरव के साथ ही वे राजनीति में सक्रिय हैं। सिन्हा की बेबाकी से साहित्य उत्सव में शामिल होने वाले लोग उनकी तारीफ करते रहे।

उत्सव के एक अन्य सत्र ट्रायल बाय मीडिया विषय के सत्र में वक्ताओं ने मीडिया की विश्वसनीयता घटने पर चिंता जताई। इस सत्र में मीडिया में आ रहे बदलावों पर मंथन हुआ। इस पैनल चर्चा में आरूषी तलवार हत्याकांड पर पुस्तक लिखने वाले अविरुक सेन, न्यूज वेबसाई कैच डाट काम की संपादक शोमा चौधरी और पत्रकार मधु त्रेहन ने कई पहलुओं को उजागर किया। सेन का कहना था कि आरूषी हत्याकांड में लोगों ने वही सच मान लिया जो मीडिया ट्रायल में दिखाया जा रहा था। मीडिया चैनलों ने पूरी घटना का नाट्य रूपांतरण इस तरह कर दिया कि जैसे घटना वाले दिन उनका रिपोर्टर वहीं मौजूद हो। साहित्य उत्सव के आखिरी दिन भी भारी भीड़ रही। जयपुर साहित्य उत्सव की लोकप्रियता हर साल बढ़ती जा रही है। आयोजकों का दावा है कि इस बार पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा लोगों की भागीदारी रही।

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