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जेल में गैंगस्टर के साथ छह ‘बाहरी मेहमान’ खा रहे थे खाना, ADGP के छापे के बाद जेलर गिरफ्तार

जेल में बंद जिस कैदी को पुलिस ने बाहरी लोगों के साथ डिनर करने दिया, उस पर गुजरात आतंकवाद और संगठित अपराध नियंत्रण कानून की धाराओं के तहत केस दर्ज है।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र राजकोट | December 17, 2020 10:33 AM
गुजरात के राजकोट स्थित गोंदल उप-जेल के जेलर पर दर्ज हुआ केस। (फोटो- संदेश)

गुजरात के राजकोट से एक जेलर के ही गिरफ्तार होने का मामला सामने आया है। दरअसल, यहां की गोंदल उप-जेल में पुलिस उपमहानिदेशक (पुलिस सुधार) के औचक निरीक्षण के दौरान एक गैंगस्टर को जेल के अंदर ही कुछ बाहरी साथियों के साथ खाते पकड़ा गया था। तब जेलर धीरुभाई परमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया था। हालांकि, अब उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया है।

बताया गया है कि जेल में बंद जिस कैदी को उन्होंने जेल में बाहरियों के साथ खाना खाने की इजाजत दी थी, उसका नाम निखिल डोंगा है। उस पर गुजरात आतंकवाद और संगठित अपराध नियंत्रण कानून की धाराओं के तहत केस दर्ज है। उसके साथ 11 अन्य लोगों को भी दिरफ्तार किया गया था। 1 अक्टूबर को जेल में ADGP के छापे के दौरान डोंगा के साथ बाहर से आए छह लोग डिनर पार्टी करते पकड़े गए।

अब विजिलेंस स्क्वाड की शिकायत के बाद गोंदल टाउन पुलिस ने 11 लोगों पर केस दर्ज किए हैं। गोंदल थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद जेलर परमार को राजपीपला ट्रांसफर कर दिया गया था, जबकि जेल गार्ड लाखा कोडियातर को सस्पेंड कर दिया गया था। जांच में कोडियातर को अपराध में शामिल पाया गया और उसे सस्पेंड कर दिया गया।

इस जांच में ही पुलिस ने मामले में परमार की मिलीभगत का भी पता लगाया। उस पर आईपीसी की धारा 466 (न्यायालय के अभिलेख की या लोक रजिस्टर आदि के साथ गड़बड़ी), धारा 477 (आपराधिक अतिचार के लिए दंड), धारा 218 (गलत रिकॉर्ड या अपराध की सजा से व्यक्ति को बचाने या संपत्ति को जब्त होने से बचाने का इरादा) और धारा 201 (अपराध से जुड़े सबूतों को मिटाने) के तहत मामला दर्ज किया गया। मामला दर्ज होने के कुछ ही समय बाद परमार गायब हो गया, जबकि 19 अन्य लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका था।

गोंदल थाने के इंस्पेक्टर संजयसिंह जडेजा ने बताया कि परमार इस मामले में अग्रिम जमानत की याचिका के साथ सेशंस कोर्ट बेंच के पास पहुंचा था। हालांकि, कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी। बाद में उसने गुजरात हाईकोर्ट में भी गिरफ्तारी से बचाने की गुहार लगाई, लेकिन हाईकोर्ट ने भी उसकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। इसके बाद आरोपी जेलर ने सरेंडर कर दिया और गिरफ्तारी दी।

एफआईआर के मुताबिक, पांच जेल गार्डों ने छह लोगों को जेल परिसर में घुसने की इजाजत दी और जेल के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम में ही खाना भी खाने दिया। विजिलेंस स्क्वाड ने जेल से दो फोन, एक पावर बैंक और एक इंटरनेट डॉन्गल भी बरामद किया।

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