जम्मू-कश्मीर मेडिकल इंटर्न्स की रातभर चलने वाले धरने में बुधवार को राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी शामिल हुईं। घाटी में डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। कश्मीर के अलग-अलग अस्पतालों में काम कर रहे मेडिकल इंटर्न्स अपने मासिक वजीफे (स्टाइपेंड) में बढ़ोतरी की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं।
मेडिकल इंटर्न्स अपने-अपने अस्पतालों में रातभर जागकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। महबूबा मुफ्ती ने कहा, “यह देखकर बहुत दुख हुआ कि जो युवा डॉक्टर लगातार 36 घंटे तक (जिसमें रात की ड्यूटी भी शामिल है) मेहनत करते हैं, मरीजों की देखभाल करते हैं और उनकी जान बचाते हैं, उन्हें अपने एक बुनियादी अधिकार के लिए प्रदर्शन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। ये युवा डॉक्टर हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनकी मेहनत और समर्पण की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। जो सरकार उनसे त्याग और समर्पण के साथ सेवा की उम्मीद करती है, उसे उनकी गरिमा का भी सम्मान करना चाहिए।”
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से की अपील – छात्रों से करें मुलाकात
उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भी अपील की कि वे छात्रों से मुलाकात करें और उनकी समस्याओं का समाधान करें। मेडिकल इंटर्न्स अपने मासिक वजीफे में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। फिलहाल उन्हें हर महीने 12,000 रुपये से थोड़ा अधिक मिलते हैं, जिसे बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग की जा रही है। पिछले सात वर्षों से उनके वजीफे में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि 12,000 रुपये का वजीफा भी केवल “न्यूनतम जरूरत” भर है और इससे अस्पताल आने-जाने का खर्च तक पूरा नहीं होता।
विरोध प्रदर्शन 31 अगस्त को शुरू हुआ था। इसमें बड़ी संख्या में इंटर्न्स एक साथ हड़ताल में कूद पड़े। नेशनल कॉन्फ्रेंस की सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने भी जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री से डॉक्टरों की मांगों पर ध्यान देने की अपील की है।
जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हामिद कर्रा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को लिखे पत्र में मेडिकल इंटर्न्स के वजीफे में बढ़ोतरी की मांग की। उन्होंने कहा कि इंटर्न्स को लंबे समय तक और बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। कर्रा ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में मेडिकल इंटर्न्स को दिया जाने वाला वजीफा देश के कई अन्य हिस्सों की तुलना में “काफी कम” है।
सोमवार को सरकारी मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर में प्रदर्शन कर रहे मेडिकल इंटर्न्स ने बताया था कि उन्हें फिलहाल 12,000 रुपये से कुछ अधिक वजीफा मिलता है, जबकि देश के दूसरे हिस्सों में यह राशि 30,000 रुपये से भी अधिक है। कश्मीर के मेडिकल इंटर्न्स की मांग है कि उनके वजीफे में भी इसी तरह बढ़ोतरी की जाए।
जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू ने प्रदर्शन के पहले दिन कहा था कि सरकार ने इस मामले को अपने स्तर पर उठाया है और इस पर प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले का सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा और फिलहाल जम्मू-कश्मीर सरकार का वित्त विभाग इस मामले की समीक्षा कर रहा है।
उन्होंने यह भी माना कि डॉक्टरों के वजीफे में बढ़ोतरी की जरूरत है और जम्मू-कश्मीर सरकार बढ़ती महंगाई और खर्चों से अच्छी तरह वाकिफ है। हालांकि, उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को हड़ताल पर जाने की जरूरत नहीं थी, क्योंकि इससे मरीजों के इलाज पर असर पड़ता है।
हड़ताल कर रहे डॉक्टरों ने जम्मू-कश्मीर सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि वे पिछले एक साल से यही बात सुनते आ रहे हैं। डॉक्टरों ने साफ कहा है कि जब तक उनके वजीफे में बढ़ोतरी नहीं की जाती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।
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कश्मीर में मेडिकल इंटर्न्स द्वारा अपने मासिक वजीफे में वृद्धि की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया है। सोमवार को अपने विरोध प्रदर्शन के दौरान, श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज के मेडिकल इंटर्न ने कहा कि उनका मौजूदा स्टाइपेंड मात्र 12,000 रुपये से थोड़ा अधिक है जबकि देश के अन्य हिस्सों में यह 30,000 रुपये से अधिक है। इस बीच जम्मू और कश्मीर सरकार में गठबंधन सहयोगी कांग्रेस ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के समक्ष यह मुद्दा उठाया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
