दिल्ली के उत्तर-पश्चिम जिले की शालीमार बाग विधानसभा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का निर्वाचन क्षेत्र है। यहां घुसते ही पेड़ों और बिजली के खंभों पर मुख्यमंत्री के जन्मदिन, तीज और स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं वाले होर्डिंग और पोस्टर नजर आते हैं। ये पोस्टर विभिन्न नेताओं, नगर निगम पार्षदों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) की ओर से लगाए गए हैं।
पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में लंबे समय तक नगर निगम पार्षद और पूर्व छात्र नेता रहीं रेखा गुप्ता ने करीब 30 हजार वोटों के अंतर से शालीमार बाग सीट जीती थी। इसी चुनाव में बीजेपी ने दो दशक से अधिक समय बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी की थी।
बीजेपी के प्रमुख चुनावी वादों में से एक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने की योजना भी थी। दिल्ली लक्ष्मी योजना को इसी महीने रक्षाबंधन (28 अगस्त) के अवसर पर शुरू किए जाने की तैयारी है।
हालांकि अन्य राज्यों की ऐसी योजनाओं के मुकाबले दिल्ली लक्ष्मी योजना में पात्रता, अपात्रता और सहायता राशि के उपयोग को लेकर काफी विस्तृत नियम और शर्तें तय की गई हैं।
शालीमार बाग की इंदिरा कॉलोनी में करीब 400 झुग्गियां हैं। वहां इस योजना को लेकर महिलाओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। यहां पात्र महिलाओं में से अधिकांश आसपास के घरों में मेड के तौर पर काम करती हैं।
शर्तें और नियम समझने की कोशिश कर रहीं महिलाएं
दिल्ली लक्ष्मी योजना के अनुसार, परिवार की केवल सबसे बड़ी महिला सदस्य जिसकी सालाना इनकम 2.5 लाख रुपये से कम हो और जिसकी उम्र 21 से 60 वर्ष के बीच हो, वही इस मासिक आर्थिक सहायता के लिए पात्र होगी। हालांकि, इलाके की कई महिलाएं अभी भी योजना की शर्तों और नियमों को पूरी तरह समझने की कोशिश कर रही हैं।
60 वर्षीय गुरबरी साहू और उनकी 33 वर्षीय बहू निर्मला बताती हैं कि दोनों ने योजना के लिए आवेदन कर दिया है।
गुरबरी कहती हैं, ”किसी एक को तो मिल जाए… अगर सिर्फ एक ने आवेदन किया होता और उसका आवेदन खारिज हो जाता तो?” वह अपने घर के बाहर गली में बैठकर यह बात कहती हैं। गुरबरी और उनके मजदूर बेटे ने आवेदन जमा कराने में पांच दिन लगाए। इस दौरान उन्हें पात्रता की शर्तें समझने में भी काफी परेशानी हुई। वह बताती हैं, ”हम साइबर कैफे गए। वहां आवेदकों की लंबी लाइन लगी थी। जब हमारी बारी आई तो कहा गया कि वोटर आईडी और फिर विधायक (MLA) का पत्र लेकर आओ।”
करीब 15 हजार रुपये महीने कमाने वाली गुरबरी आगे कहती हैं, ”फिर लोगों से पूछताछ की तो मुख्यमंत्री कार्यालय (CM Office) के बारे में पता चला। वहां जाकर पत्र के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। दो दिन बाद मुख्यमंत्री की मुहर वाला पत्र मिला और तब जाकर आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो सकी।”
निर्मला कहती हैं, ”मैं अपने बच्चों के लिए कपड़े खरीदना चाहती हूं। वैसे तो हमारे लिए पैसे बचा पाना मुश्किल होता है।”
किन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ
हालांकि, इस योजना का लाभ उन महिलाओं को नहीं मिलेगा जो पहले से किसी अन्य सरकारी आर्थिक सहायता या पेंशन योजना का लाभ ले रही हैं। इसके अलावा आयकरदाता, जीएसटी रिटर्न भरने वाले, सरकारी कर्मचारी, तीन से ज्यादा बच्चों वाली महिलाएं, जिन परिवारों की सालाना बिजली खपत 2,400 यूनिट से ज्यादा है, जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है, जिनके पास चार पहिया वाहन है या जिन पर आपराधिक मामला दर्ज है, वे भी इस योजना के पात्र नहीं हैं।
32 वर्षीय अनिल कुमार गुप्ता कहते हैं, ”अगर पड़ोसी को पैसे मिलें और हमें ना मिलें तो थोड़ा बुरा तो लगेगा।” उनका परिवार इस योजना के लिए पात्र नहीं है क्योंकि उनके पास सामान ढोने के लिए दो छोटे पिकअप वाहन हैं। वह आगे कहते हैं, ”लेकिन मैं यह भी समझता हूं कि सरकार सबसे गरीब लोगों तक पैसे पहुंचाना चाहती है।”
‘लोगों को छांट-छांटकर बाहर किया जा रहा है’
वहीं उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रहने वाली 28 वर्षीय ज्योति इस योजना की आलोचना करती हैं। उनके पति के पास भी दो पिकअप वाहन हैं, इसलिए वह योजना के दायरे से बाहर हैं। ज्योति कहती हैं, ”वोट तो सबका चाहिए था लेकिन पैसे देने की बारी आई तो लोगों को छांट-छांटकर बाहर किया जा रहा है।”
वह आगे कहती हैं, ”मेरे पति की कमाई से घर चल जाता है। लेकिन अगर मुझे भी यह पैसा मिलता तो मेरे हाथ में कुछ पैसे होते जिन्हें मैं अपनी जरूरत के हिसाब से खर्च कर सकती थी।”
मीना देवी के तीन बेटे और दो बेटियां हैं और सभी छोटे-मोटे काम करते हैं। वह कहती हैं, ”जिनके ज्यादा बच्चे हैं, उन्हें ज्यादा पैसों की जरूरत होती है लेकिन उन्हीं लोगों को योजना से बाहर कर दिया गया है। आम आदमी पार्टी की सरकार में गरीबों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल जाता था। अब इतने दस्तावेज और इतने सवाल पूछे जाते हैं।”
हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय के एक सूत्र का कहना है, ”सरकार जब भी कोई योजना बनाती है तो उसका उद्देश्य समाज के सबसे गरीब वर्ग को अधिकतम लाभ पहुंचाना होता है।” आखिर में गुरबरी कहती हैं, ”हमारे लिए तो जो हमें पैसे दे दे, वही माई-बाप है। लेकिन सिर्फ इससे काम नहीं चलेगा, झुग्गी में और भी बहुत काम करने होंगे।”
लक्ष्मी योजना की ‘3 बच्चों वाली शर्त’ पर दिल्ली CM रेखा गुप्ता का जवाब
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को दिल्ली लक्ष्मी योजना के लाभार्थियों के लिए तीन बच्चों की सीमा का बचाव करते हुए कहा कि महिलाएं केवल बच्चे पैदा करने की मशीन नहीं हैं। साथ ही उन्होंने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पर अपने शासनकाल के दौरान महिलाओं की चिंताओं को दूर करने में कथित रूप से विफल रहने का आरोप लगाते हुए उन पर हमला किया।
मानसून सत्र के दूसरे दिन विधानसभा को संबोधित करते हुए सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, “अगर लोग अपना परिवार बढ़ाना चाहते हैं, तो वे रेखा गुप्ता या (आरएसएस प्रमुख) मोहन भगवत के कहने पर रुकने वाले नहीं हैं। परिवार अपनी परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार योजना बनाते हैं। लेकिन कोई भी महिला सिर्फ बच्चे पैदा करने की मशीन नहीं है। उसका स्वास्थ्य हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।”
