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इतिहासकार इरफान हबीब ने देश के इतिहास को बदलने की कोशिश पर सवाल उठाया

इतिहासकार इरफान हबीब ने आज कहा कि इतिहास तथ्यों के घटनाक्रम पर निर्भर करता है और तथ्यों को सृजित करने की कोई भी कोशिश कपोल कल्पना ही मानी जाएगी।

इतिहासकार इरफान हबीब

इतिहासकार इरफान हबीब ने आज कहा कि इतिहास तथ्यों के घटनाक्रम पर निर्भर करता है और तथ्यों को सृजित करने की कोई भी कोशिश कपोल कल्पना ही मानी जाएगी।
मार्क्सवादी इतिहास लेखन दृष्टि का पालन करने वाले हबीब ने कहा कि प्रख्यात इतिहासकार ताराचंद और ईश्वरी प्रसाद का इतिहास तथाकथित कम्युनिस्ट इतिहासकारों द्वारा लिखे गये इतिहास से भिन्न नहीं है। उनका इशारा इन आरोपों की ओर था कि भारत का इतिहास वामपंथी और कम्युनिस्ट दृष्टिकोण से लिखा गया है। हबीब ने यहां भारतीय इतिहास कांग्रेस के मौके पर कहा, ‘‘ज्ञान का विस्तार हुआ है लेकिन आकलन वही है।

उन्हें हमारे साथ ऐसी बात करने से पहले भारत का इतिहास जान लेना चाहिए, हम ताराचंद और ईश्वरी प्रसाद से कहां भिन्न हैं। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं उनसे कहना चाहता हूं कि आप ताराचंद और ईश्वरी प्रसाद द्वारा लिखित इतिहास को पढ़ें तथा उसकी तुलना हमारे द्वारा लिखे गये इतिहास से करें। कहां अंतर है?  आप इतिहास नहीं बदल सकते क्योंकि इतिहास तथ्यों के घटनाक्रम पर निर्भर करता है। यदि आप तथ्यों को सृजित करेंगे तो वह इतिहास नहीं है, वह कपोल कल्पना है।

हबीब की टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जब विपक्षी दल भाजप एवं आरएसएस पर अपने हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भारत के इतिहास का पुनर्लेखन करने और उसे ‘तोड़-मरोड़कर’ पेश करने का आरोप लगा रहे हैं। संघपरिवार और हिंदुत्व संगठनों के एक वर्ग ने आरोप लगाया है कि वाम और उदारवादी इतिहासकार भारत में इतिहास का विकृत स्वरुप पढ़ा रहे हैं क्योंकि इन इतिहासकारों ने देश की आजादी के बाद से ही बौद्धिक जगत पर कब्जा कर लिया।

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