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अटलजी : RSS से जुड़ने पर नाराज हो गए थे घरवाले, मंत्री बने तो दोबारा लगवाई नेहरूजी की तस्वीर

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का 94वां जन्मदिवस है। उनका जन्म 25 सितंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था। 16 अगस्त 2018 को वे हमें अलविदा कह गए थे, लेकिन उनकी यादें आज भी ताजा हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो)

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का 94वां जन्मदिवस है। उनका जन्म 25 सितंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था। 16 अगस्त 2018 को वे हमें अलविदा कह गए थे, लेकिन उनकी यादें आज भी ताजा हैं। बताया जाता है कि जब वे आएसएस में शामिल हुए तो उनके घरवाले नाराज हो गए थे। वहीं, जब वे पहली बार मंत्री बने तो खुद नेहरूजी की तस्वीर अपने कार्यालय में लगवाई थीं। अटलजी से जुड़ी कुछ ऐसी चंद बातें, जो उनका कद खुद-ब-खुद बढ़ा देती हैं।

चुनाव हारने के बाद फिल्म देखने गए थे अटलजी और अडवाणी : एक इंटरव्यू में आडवाणीजी ने बताया था कि पार्टी ने अपना पहला चुनाव 1984 में लड़ा था। हालांकि, महज दो सीटों पर ही जीत मिली थी। उन्होंने बताया कि जनसंघ के दिनों में हम उपचुनाव हार गए थे, जिससे मैं (आडवाणी) और अटलजी काफी दुखी थे। अचानक अटलजी बोले, ‘‘चलो कोई फिल्म देखने चलते हैं।’’ इसके बाद दोनों दिल्ली के इम्पीरियल सिनेमा गए। वहां हमने ‘फिर सुबह होगी’ फिल्म देखी।

RSS से जुड़ने पर नाराज थे घरवाले : जानकारी के मुताबिक, जब अटलजी ने आरएसएस में रुचि दिखानी शुरू की थी। उस वक्त उनके पिता सरकारी कॉलेज में पढ़ाते थे। उनके इस कदम से घरवाले नाराज हो गए थे। उन्हें डर था कि अगर अटलजी के आरएसएस से जुड़ने की बात किसी को पता चली तो उनके पिता की नौकरी चली जाएगी। ऐसे में उनकी बहन रोज सुबह उनके खाकी कपड़े छिपा देती थीं, जिससे वे बाहर न जा सकें।

नेहरू की तस्वीर फिर लगवाई : आपातकाल के बाद 1977 में मोरारजी देसाई की सरकार बनी तो उसमें अटलजी को विदेश मंत्री का पद मिला। बताया जाता है कि नए मंत्री को खुश करने के लिए अधिकारियों ने उनके कार्यालय से नेहरूजी की तस्वीर हटवा दी। अटलजी विदेश मंत्रालय पहुंचे तो उन्होंने देखा कि दफ्तर की दीवार पर हमेशा लगी रहने वाली नेहरूजी की तस्वीर गायब थी। ऐसे में अटलजी ने सचिव को बुलाया और तस्वीर जल्द से जल्द दोबारा लगाने का आदेश दिया।

 

तांगा पलटने से सड़क पर गिरे, फिर भी रहे शांत : यह बात 1970 के दौर की है। अटलजी यूपी के मिरहची कस्बे में गए थे। उस दौरान वे कस्बे में ही रहने वाले लाला रामभरोसे के साथ तांगे से मारहरा जा रहे थे। सड़क काफी ज्यादा खराब थी, जिससे तांगा असंतुलित होकर पलट गया। दोनों तांगे से सड़क पर गिर गए, लेकिन किसी तरह की नाराजगी नहीं जताई। यह बात खुद वाजपेयी जी ने तत्कालीन बीजेपी सांसद डॉ. महादीपक सिंह शाक्य को बताई थी।

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