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‘एकल खिड़की केंद्र’ से किया इनकार

निर्भया कांड के चार साल बाद महिलाओं पर हो रहे अपराध के आंकड़े आज भी भयावह हैं। केंद्रीय महिला विकास मंत्री मेनका गांधी का मानना है कि बलात्कार वर्चस्व और शक्ति का मामला है।

Author नई दिल्ली | December 16, 2016 12:40 AM
केंद्रीय महिला विकास मंत्री मेनका गांधी का मानना है कि बलात्कार वर्चस्व और शक्ति का मामला है। यह कमजोर पर मजबूत की हिंसा है।

निर्भया कांड के चार साल बाद महिलाओं पर हो रहे अपराध के आंकड़े आज भी भयावह हैं। केंद्रीय महिला विकास मंत्री मेनका गांधी का मानना है कि बलात्कार वर्चस्व और शक्ति का मामला है। यह कमजोर पर मजबूत की हिंसा है। उनसे बातचीत के मुख्य अंश। प्रश्न : दिल्ली को बलात्कार नगरी कहा गया। लेकिन हिंसा पीड़ित महिलाओं के लिए यहां अभी तक एक भी एकल खिड़की केंद्र नहीं खुले हैं। उत्तर : दिल्ली एकमात्र राज्य है जिसने इसके लिए इनकार कर दिया है। मैंने इस मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से दो बार मुलाकात की। हालांकि, दिल्ली महिला आयोग खुद मांग कर रहा है कि यह केंद्र उनके लिए अहम है।
प्रश्न : दिल्ली सरकार की बेरुखी का सबब?
उत्तर : मुझे नहीं मालूम। न तो सरकार और न ही उपराज्यपाल रुचि दिखा रहे। हम नहीं कह रहे हैं कि आप नई इमारत बनाएं। आपके पास कुछ भी हो वहां से शुरू कर सकते हैं। इसके लिए हम पूरा खर्च उठा रहे हैं।
प्रश्न : दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल की लगातार मांग रही है कि महिला सुरक्षा पर केंद्र और राज्य सरकार को एक उच्च अधिकार समिति का गठन होना चाहिए।
उत्तर : यह एक अच्छा विचार है। यहां हम एक-दूसरे के साथ विचारों का आदान-प्रदान कर सकेंगे। यहां अहम है बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8
कि हम चीजों को गंभीरता से लें। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को ‘जेंडर चैंपियन’ को गंभीरता से लेना चाहिए, इलेक्ट्रॉनिकी व सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को पैनिक बटन को गंभीरता से लेना चाहिए, गुरुवार सुबह मैंने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर मातृत्व विधेयक के बारे में बोला। हम अपना काम गंभीरता से लेते हैं।
प्रश्न : आपको नहीं लगता है कि केंद्र और राज्य के टकराव में महिला सुरक्षा का मुद्दा कमजोर हो जाता है?
उत्तर : (विषयांतर करते हुए)..सबसे अहम चीज जो हम कर रहे हैं वह यह है कि हर मोबाइल फोन में अब पैनिक बटन होगा। हमने पिछले दो सालों में किसी भी देश से सबसे ज्यादा काम किया है।
प्रश्न : पैनिक बटन आखिर क्या है, यह कैसे मदद करेगा?
उत्तर : हर मोबाइल फोन पर एक बटन होगा। दुनिया में पहली बार ऐसा हो रहा है। अगर मुश्किल में हैं तो केवल बटन दबा दें। पुलिस आएगी। बटन के साथ ही हमने एक ऐप तैयार कर लिया है। पुलिस का इंतजार करते-करते ऐप के जरिए 10 उन लोगों को संदेश जाएगा जो नजदीक हैं, वो आपकी मदद कर पाएंगे। इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने वादा किया है कि इसे 1 जनवरी को जारी किया जाएगा। दो साल लगे हैं केवल सेल फोन के निर्माताओं को राजी करने में। पुराने मोबाइल की कंपनियां खुद मरम्मत करेंगी।
प्रश्न : 2015 में बलात्कार के लगभग 34600 मामले दर्ज हुए जो पिछले साल के मुकाबले ज्यादा हैं। हम कहां नाकाम हैं?
उत्तर : निर्भया के बाद दो चीजें हुर्इं। एक तो देश में बलात्कार को लेकर शून्य सहनीशलता का भाव जगा। पहले बलात्कार के जो मामले रिपोर्ट नहीं किए जाते थे, आज किए जाते हैं। बलात्कार अभी रुक इसलिए नहीं पाया है क्योंकि यह सिर्फ लैंगिक नहीं शक्ति और वर्चस्व का भी मामला है। यह मजबूत की अपने से कमजोर पर हिंसा है।
प्रश्न : लेकिन इस पर रोक तो लगनी ही चाहिए?
उत्तर : इसके लिए हम युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। सबसे पहले हमने ‘जेंडर चैंपियन’ के माध्यम से बदलाव की कोशिश की है, यदि हम लड़कों को स्कूल में लड़कियों के प्रति विनम्रता, सम्मान, अच्छे बर्ताव के लिए पुरस्कृत करें तो बदलाव आ सकता है। हमने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को बार-बार लिखा है कि इसे अनिवार्य बनाया जाए। बुधवार को हरियाणा में महिला पुलिस स्वयंसेविकाओं की सेवाओं ाि उद्घाटन हुआ। यह हम देश के हर जिले के लिए चाह रहे हैं। जहां भी महिलाओं को समस्या आ रही होगी ये उस पर निगाह रखेंगी।
प्रश्न : मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद आपकी सबसे बड़ी घोषणा थी कि किसी भी तरह के हिंसा की शिकार या जरूरतमंद महिलाओं की मदद के लिए देश के हर जिले में 2014 के अंत तक एक ‘वन स्टॉप सेंटर’ बनाया जाएगा, लेकिन इसमें काफी देरी हो चुकी है।
उत्तर : हमने ऐसा नहीं कहा था। हमें पहले साल केवल 36 केंद्रों के लिए अनुमति मिली। इस साल के मध्य तक हमें 150 और केंद्रों की अनुमति मिली। जिस काम के लिए हमें अनुमति मिली हमने किया है।
प्रश्न : काफी उम्मीद थी कि राष्ट्रीय महिला आयोग संशोधन विधेयक संसद से पारित हो। कहां अड़चनें आ रही हैं?
उत्तर : यह मंत्रिमंडल के पास है।
प्रश्न : साइबर अपराध को लेकर क्या पहल है?
उत्तर : हमने शादी से जुड़ी वेबसाइटों के संदर्भ में चीजें व्यवस्थित की हैं। इसमें काफी गड़बड़ी थी। हमारी दूसरी पहल है कि ट्वीटर, फेसबुक पर कोई आपको प्रताड़ित करता है, धमकी देता है तो हमें बताएं। हमने सैकड़ों शिकायतें ली हैं और तुरंत कार्रवाई की है। इस घोषणा के पहले एक वक्त था लोग् ाखुले आम बोल रहे थे कि हत्या कर देंगे, बलात्कार कर देंगे, अब आप देखें ऐसा नहीं है। अभी गाली देते हैं, लेकिन हत्या, बलात्कार और हिंसा की धमकी रुकी है।
प्रश्न : आपने दो अहम मुद्दे उठाए थे। एक तो लैंगिक उत्पीड़न के हर अपराधी को नियमति और अनिवार्य रूप से पुलिस को रिपोर्ट करने की बात थी, दूसरी अपराधियों की एक केंद्रीय पंजिका तैयार करने की बात थी। इन पर किसी तरह की पहल हो पाई है?
उत्तर : यह गृह मंत्रालय के पास पड़ा है। उम्मीद है जल्द होगा।
प्रश्न : नए साल में मंत्रालय क्या कुछ नया करने जा रहा है?
उत्तर : बाल उत्पीड़न के खिलाफ एक राष्टÑीय संगठन बनाने की कवायद होगी। ये मुख्यत: बच्चों के पोर्न के उपर है जो इंटरनेट पर आता है। हम सोचते हैं कि छोटी बात है, लेकिन 30 लाख से ज्यादा भारतीय बच्चों की तस्वीरें इंटरनेट पर हैं। इसके खिलाफ कड़ाई से काम करना जरूरी है। इस साल हमने चाइल्ड अडॉप्शन एंड रिसोर्स एजंसी (कारा) में भी सुधार किया है, लेकिन यह काफी नहीं है, बच्चों को गोद देने में समस्या आ रही है। हमें सीडब्लूसी (चाइल्ड वेलफेयर कमिटी) और न्यायपालिका के साथ समस्या आ रही है। हमें हर दिन जजों को खुद संपर्क करना पड़ता है। संसद ने कानून पारित किया है कि कोई जज दो महीने से ज्यादा समय नहीं लेगा। भड़ूच में एक जज हैं जो दो साल लगा चुके हैं। और वह भी एक बधिर बच्चे का मामला है। मैं यह कहना चाहती हूं कि या तो एक अखिल भारतीय पंचाट हो या जजों को इनसे दूर रख सीडब्लूसी को फैसला करने दिया जाए।
प्रश्न : निर्भया फंड से दिल्ली सरकार को बसों में सीसीटीवी के लिए फंड का आबंटन प्रस्तावित है?
उत्तर : हमने स्वीकार नहीं किया है। हमने राजस्थान के बसों में सीसीटीवी का प्रयोग किया था। लेकिन यह बहुत तर्कसंगत नहीं है। एक सीसीटीवी से पूरे बस को नियंत्रित नहीं किया जा सकता। दूसरी बात यह है कि सीसीटीवी को देखेगा कौन? कोई इसे आसानी से तोड़ भी सकता है।
प्रश्न : निर्भया फंड को लेकर आरोप लगते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि इस फंड का उपयोग नहीं हो पा रहा है?
उत्तर : पहले यह फंड हमारे पास नहीं था, जब से यह फंड हमारे पास आया है हमने वन स्टॉप सेंटर पर काम करना शुरू कर दिया है। वन स्टॉप सेंटर को ‘सखी’ का नाम दिया गया है और यह काफी अच्छा है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा की शिकायतों को लोग सामने रखने से हिचकते हैं क्योंकि पुलिस के पास जाने में समस्या है, वकील करने की समस्या है, डॉक्टर के पास जाने की समस्या है। खर्चे हैं, लेकिन अब हर समस्या का समाधान एक केंद्र पर है। निर्भया फंड के तहत 2000 करोड़ रुपए का आबंटन हुआ है। जरूरत पड़ने पर सरकार और राशि देगी।

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