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चुनावों में अंतरजातीय विवाहों को ‘भुनाने’ की कवायद

यों अंतरजातीय विवाहों की चर्चा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आॅनर किलिंग के संदर्भ में ज्यादा होती है पर विधानसभा चुनाव में ऐसे विवाह फायदे का सौदा साबित हो रहे हैं।

Author नई दिल्ली | Updated: February 4, 2017 2:23 AM
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यों अंतरजातीय विवाहों की चर्चा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आॅनर किलिंग के संदर्भ में ज्यादा होती है पर विधानसभा चुनाव में ऐसे विवाह फायदे का सौदा साबित हो रहे हैं। जब चुनाव मुद्दों या उम्मीदवार के चेहरे के बजाए जातीय जोड़-तोड़ से हो तो सियासी दल ऐसे विवाहों का फायदा उठाने की कोशिश खूब करते हैं। इस मामले में राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया अजित सिंह ने बाकी दलों को पीछे छोड़ दिया है। मुजफ्फरनगर जिले की पुरकाजी विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। अजित सिंह ने यहां जिला पंचायत की सदस्य छोटी बेगम को उम्मीदवार बनाया है। जिनका नाता जन्म से भले अनुसूचित जाति से हो पर विवाह उन्होंने अमीर खान से किया है। इस्लाम को मानने वाले मियां की बेगम होने के बावजूद वे आरक्षित सीट से चुनाव लड़ रही हैं। समर्थन के हिसाब-किताब में उन्हें तीन जातियों के समर्थन की ज्यादा दरकार है। अपनी अनुसूचित जाति के, पति के संप्रदाय के नाते मुसलमान और रालोद की उम्मीदवार होने के नाते जाट मतदाताओं में उन्हें समर्थन मिलता दिख रहा है। यहां पिछली बार बसपा के अनिल कुमार विजयी हुए थे।

मेरठ जिले की आरक्षित सीट हस्तिनापुर में भी अजित सिंह ने यही प्रयोग किया है। यहां पिछली बार सपा के प्रभु दयाल बाल्मीकि विजयी हुए थे। इस क्षेत्र में गुर्जर मतदाता सबसे ज्यादा हैं। सपा ने प्रभु दयाल बाल्मीकि, बसपा ने अपने 2007 के विजेता योगेश वर्मा और भाजपा ने दिनेश खटीक को उतारा है। अजित ने अनुसूचित जाति में जन्मी कुसुम को अपना उम्मीदवार बना कर बाकी दलों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं। कुसुम के पति गुर्जर हैं। इस नाते वे गुर्जरों के बीच खुद को उनकी बहू बता कर वोट मांग रही हैं। हापुड़ सुरक्षित सीट पर अजित सिंह ने अंजू मुस्कान को उम्मीदवार बनाया है जो अनुसूचित जाति में जन्मी हैं पर विवाह उन्होंने इस्लाम को मानने वाले फुरकान से किया है।

आमतौर पर आरक्षित सीटों के चुनाव में पिछड़े और सवर्ण कम दिलचस्पी दिखाते हैं। पर अंजू मुस्कान अपनी दलित जातियों के साथ-साथ मुसलमानों के वोट पर भी दावा कर रही हैं। अजित सिंह ने यह प्रयोग आरक्षित सीटों पर किया है तो भाजपा की मोदी नगर सीट से उम्मीदवार मंजू सिवाच भी अपने अंतरजातीय विवाह को चुनाव में खूब भुना रही हैं। राजपूत परिवार में पैदा हुईं मंजू पेशे से चिकित्सक हैं। इलाके के सांसद सत्यपाल सिंह की पैरवी से उन्हें टिकट मिला है। उनके पति जाट हैं। इस नाते वे दोनों जातियों के मतों पर अपना दावा दूसरे उम्मीदवारों से ज्यादा जता रही हैं।

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