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स्वदेशी पनडुब्बी रोधी पोत ‘आइएनएस कदमत्त’ नौसेना में शामिल

आइएनएस कदमत्त पर 13 अधिकारी और 180 नाविक तैनात होंगे। कमांडर महेश चंद्र मुद्गिल इसके पहले कमांडिंग अधिकारी होंगे। पूर्वी नौसैनिक कमान के तहत पूर्वी बेड़े का यह एक अभिन्न हिस्सा होगा।

Author विशाखापत्तनम | Updated: January 7, 2016 10:40 PM
आइएनएस कदमत्त पर 13 अधिकारी और 180 नाविक तैनात होंगे। कमांडर महेश चंद्र मुद्गिल इसके पहले कमांडिंग अधिकारी होंगे। पूर्वी नौसैनिक कमान के तहत पूर्वी बेड़े का यह एक अभिन्न हिस्सा होगा।

भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल आरके धवन ने गुरुवार को दूसरे स्वदेशी पनडुब्बी-निरोधक जंगी पोत (एएसडब्लू) आइएनएस कदमत्त का जलावतरण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ पहल की तर्ज पर भारतीय नौसेना भविष्य में सभी प्रकार के पोत देश में ही बनाएगी जिनमें जंगी जहाज भी शामिल हैं। इस पोत का निर्माण मेसर्स गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) ने यहां नौसैनिक गोदी में किया है। नौसेना प्रमुख ने कहा कि कदमत्त का जलावतरण आत्मनिर्भरता की दिशा में भारतीय नौसेना का एक और मील का पत्थर है।  उन्होंने कहा कि अब भारतीय नौसेना खरीदने वाली नौसेना नहीं बल्कि खुद बनाने वाली नौसेना है। धवन ने कहा कि भारतीय नौसेना ने अगले 15 सालों में विज्ञान व प्रौद्योगिकी को मजबूत बनाने और रक्षा अनुंसधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) व सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्डों और निजी कंपनियों के साथ मिलकर देश में ही जंगी जहाज बनाने की योजना बनाई है।

पत्रकारों से बातचीत में धवन ने कहा कि कदमत्त चार से आठ फरवरी तक होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रीव्यू में हिस्सा लेगा। धवन ने कहा कि कदमत्त के जलावतरण से भारतीय नौसेना, खासकर पूर्वी बेड़े, की पनडुब्बी-निरोधक जंगी क्षमता में एक नया आयाम जुड़ेगा। पोत की ओर से शुरू किए जा सकने वाले विविध मिशन सही मायने में भारतीय नौसेना की बहुआयामी क्षमता में बढ़ोतरी को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि इस पोत की विशेषता यह है कि इसके उत्पादन को ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी बनाया गया है। इस पोत का करीब 90 फीसद हिस्सा स्वदेशी है। इसका डिजाइन नौसेना की आंतरिक संस्था डायरेक्टोरेट ऑफ नेवल डिजाइन ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड ने किया है।

‘शिवालिक’ श्रेणी, ‘कोलकाता’ श्रेणी और ‘आइएनएस कामोर्ता’ के बाद ‘कदमत्त’ नवीनतम स्वदेशी पोत है जिसमें किसी अभियान से जुड़ी एक साझा तस्वीर (कॉमन ऑपरेशनल पिक्चर) मुहैया कराने के लिए कई हथियारों और सेंसरों को जोड़ा गया है। इस पोत में कई अत्याधुनिक उपकरण हैं जिनमें रेल-लेस हेलो पारगमन प्रणाली और एकीकृत एएसडब्लू, हेलीकॉप्टर के लिए मोड़ने लायक हैंगर दरवाजा शामिल है। इससे न केवल पोत की हमलावर क्षमता बढ़ती है बल्कि संवेदनशील चीजों का पता लगाने की उसकी सामर्थ्य भी बढ़ती है। धवन ने कहा कि पोत की हथियार और सेंसर प्रणाली खासतौर पर स्वदेशी है और यह इस अहम क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

इस पोत में एक अत्याधुनिक 3डी मध्यम रेंज का हवाई….सतह निगरानी राडार लगा है जिसे डीआरडीओ ने विकसित किया है और इसका उत्पादन भारत इलेक्ट्रॉनिक्स ने किया है। आइएनएस कदमत्त पर 13 अधिकारी और 180 नाविक तैनात होंगे। कमांडर महेश चंद्र मुद्गिल इसके पहले कमांडिंग अधिकारी होंगे। पूर्वी नौसैनिक कमान के तहत पूर्वी बेड़े का यह एक अभिन्न हिस्सा होगा।

एक एएसडब्लू पोत के रूप में यह अपने पूर्ववर्ती आइएनएस कदमत्त (पी 78) की विरासत को आगे बढ़ाएगा। आइएनएस कदमत्त (पी 78) ने 23 दिसंबर 1968 से 30 नवंबर 1992 तक करीब 24 साल नौसेना को अपनी सेवाएं दीं। इससे पहले, धवन ने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया, सलामी ली और पोत के फलक (प्लाक) का अनावरण भी किया।

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