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सालों पुरानी मांग, पर स्‍मार्ट सिटी घोषित होने के बावजूद नहीं हो रही विमान सेवा शुरु करने की पहल

भागलपुर से हवाई सेवा की मांग जोर पकड़ रही है। मगर भारत सरकार का उड्डयन मंत्रालय एकदम सुस्त है।

भागलपुर से हवाई सेवा की मांग जोर पकड़ रही है।

भागलपुर से हवाई सेवा की मांग जोर पकड़ रही है। मगर भारत सरकार का उड्डयन मंत्रालय एकदम सुस्त है। पटना और गया को छोड़कर बिहार का कोई शहर हवाई सेवा से जुड़ नहीं पाया है। मुजफ्फरपुर और गया में तो यह मांग सालों पुरानी है। बताते है कि इनसे पहले दरभंगा से हवाई सेवा जल्द शुरू हो जाने की बात उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी कह चुके है। जबकि भागलपुर केंद्र सरकार की पहली सूची में घोषित स्मार्ट सिटी है। फिर भी कोई ठोस पहल होती नजर नहीं आती। बुधवार 7 फरवरी को नागरिक सेवा समिति के बैनर तले हवाई सेवा चालू करने को लेकर एक रोज का धरना स्टेशन चौक पर दिया गया। जाहिर है विरोध की आवाज तेज होने लगी है।

हालांकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार भागलपुर हवाई अड्डे पर 35 लाख रुपए खर्च कर बने छोटे से प्रतीक्षा लाउंज का फिता काट उदघाट्न किया। मगर हवाई सेवा कब से शुरू होगी या बिहार सरकार ने इस बाबत कौन सी पहल की है । एक शब्द नहीं कहा। इतना ही नहीं उनकी विकास समीक्षा बैठक डीआरडीए भवन में दो घँटे चली। बाहर में पत्रकारों का झुंड उनकी बाट जोहता रहा। पर वे पत्रकारों बिना बात किए चल दिए। शायद उन्हें डर था कि कहीं सृजन घोटाले से जुड़ी सवालों की झड़ी उन पर न बरस जाए।

खैर यहां की स्वयंसेवी संस्थाएं लगातार प्रधानमंत्री , उड्डयन मंत्रालय , सांसदों और राज्य सरकार को पत्र लिख लिखकर दबाव बना रही है। हालांकि हवाई सेवा शुरू करने की मांग काफी पुरानी है। यह अलग बात है कि ईस्टर्न बिहार चेंबर आफ कामर्स के सचिव संजीव कुमार शर्मा , प्रभात केजरीवाल , नागरिक सेवा समिति के रिजवान खान , जगदीश चंद्र मिश्र पप्पू सरीखे लोगों ने भागलपुर से हवाई सेवा शुरू करने की मांग को लेकर दर्जनों चिठ्ठियां लिखी और लिख रहे है। मगर रोना इस बात को लेकर है कि हवाई अड्डा फिलहाल इस लायक नहीं है। वहां गाय भैंस चरते है। प्रशासनिक अधिकारी बोलते है कि छोटे जहाज किसी तरह उतर सकते है।

यों उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक रनवे 36 सौ फीट लंबा और सौ फीट चौड़ा होना चाहिर। साथ ही सड़क , इमारत , टैक्सीवे , रेस्ट हाउस , पैसेंजर यूनिट बगैरह होना जरूरी है। जो यहां नहीं है। 1982 में इस हवाई अड्डे की लागत आए करोड़ रुपए आंकी गई थी। उस वक्त खर्च की रकम ज्यादा समझी गई या फिर उड्डयन मंत्रालय और राज्य सरकार ने दिलचस्पी नहीं ली। इसके बाद 1988 में भागवत झा आजाद मुख्यमंत्री बने। उन्होंने प्रस्ताव भेजने का काम कमिश्नर को सौपा। दोबारा आकलन कर हवाई अड्डा दुरुस्त करने की फाइल पटना दौड़ाई। मगर मामला दब गया कुछ नहीं हुआ।

इसके बाद संसद में भी भागलपुर से चुनकर गए जनप्रतिनिधियों ने यह मुद्दा उठाया। सैयद शाहनवाज हुसैन का तो चुनावी वायदा ही था। सुशील कुमार मोदी भी भागलपुर का प्रतिनिधित्व कर चुके है। तत्कालीन डीएम संतोष कुमार मल्ल ने हवाई अड्डे की चहार दीवारी लगवा घेरा। अभी के ज़िलाधीश आदेश तितमारे ने लाउंज बनबा दिया। फिर भी व्यापारिक नजर से हवाई जहाज कैसे उतरेगा। यह सवाल खड़ा है।

हवाई अड्डे के पश्चिमी और दक्षिणी छोर पर बेतरतीब तरीके से रिहाइशी मकान बने है। यहां की आवादी ने चहारदीवारी को जगह जगह से तोड़कर रास्ता बना लिया है। कईयों के लिए सुबह शाम शौच करने का स्थान भी है। नतीजतन बदबू और गंदगी बरकरार है। यहां गाय भैंस चराई जाती है। और तो और सुबह कार और बाइक चलाने की ट्रेनिंग लेते लोगों को भी अक्सर देखा जा सकता है।

सरकारी हवाई जहाज या हेलीकाप्टर मुख्यमंत्री या किसी बड़े अधिकारी को लेकर कभी कभार हवाई अड्डे पर उतरता है तो हिफाजत दुरुस्त नजर आती है। तब जानवरों के झुंड भी भगा दिए जाते है। बताते है कि मुख्यमंत्री के आगमन से पहले बिहार मिलिट्री पुलिस के एक सेक्शन जवान स्थाई तौर पर तैनात किए गए है। जो हवाई अड्डे की रखवाली करेंगे।

अलबत्ता हवाई सेवा की मांग जोर पकड़ने की कई वजहें है। भागलपुर अंग्रेजों के जमाने से डिविजनल मुख्यालय है। कृषि विश्वविद्यालय सबौर में है। कहलगांव में एनटीपीसी , ऐतिहासिक विक्रमशिला विश्वविद्यालय है। वहां केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रस्तवित है। भागलपुर तिलकामांझी विश्वविद्यालय है। जेएनएल मेडिकल कालेज अस्पताल है। इंजीनियरिंग और विधि कालेज है। पटना के बाद भागलपुर ही बिहार के हरेक क्षेत्र में अपना स्थान रखता है। जहां सांस्कृतिक , आध्यात्मिक व पुरातत्व धरोहर है। फिर भी उपेक्षित है।

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