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उत्तराखंडः पहाड़ों में दाम पहुंचे पहाड़ जितने ऊंचे

उत्तराखंड में सर्दियों में भी सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। जबकि सर्दियों के मौसम में सब्जियों के दाम अमूमन गिर जाते हैं।
उत्तराखंड में सर्दियों में भी सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं।

उत्तराखंड में सर्दियों में भी सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। जबकि सर्दियों के मौसम में सब्जियों के दाम अमूमन गिर जाते हैं। उत्तराखंड की छह मंडियां-सब्जियों और फलों की बिक्री को लेकर सबसे ज्यादा चर्चित है। इनमें देहरादून की निरंजनपुर सब्जी मंडी, गढ़वाल की टिहरी सब्जी मंडी, ऋषिकेश सब्जी मंडी, हरिद्वार की सराय सब्जी मंडी, कुमाऊं मंडल की हल्द्वानी सब्जी मंडी और उधम सिंह नगर जिले की रूद्रपुर सब्जी मंडी से पूरे उत्तराखंड में सब्जियों की आपूर्ति मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में होती है। मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले पर्वतीय क्षेत्रों में सब्जी ज्यादा महंगी हो रही है। क्योंकि मैदानी क्षेत्रों से पहाड़ों में सब्जियां आपूर्ति की जाती है। यातायात का भाड़ा महंगा होने के कारण पहाड़ों में सब्जियां महंगी बिक रही है।
पिछले साल टमाटर इन दिनों 20 रुपए किलो, आलू 8 रुपए किलो, गाजर 10 रुपए किलो, फूल गोभी 15 रुपए किलो, लौकी 15 रुपए किलो, बंद गोभी 10 रुपए किलो, तोरी 20 रुपए किलो, बींस 25 रुपए किलो, प्याज 25 रुपए किलो, लहसुन 40 रुपए किलो, शलजम 6 रुपए किलो बिक रहा था, जबकि इस बार टमाटर 40 रुपए किलो, आलू 16 रुपए किलो, गाजर 20 रुपए किलो, फूल गोभी 35 रुपए किलो, लौकी 30 रुपए किलो, बंद गोभी 30 रुपए किलो, तोरी 50 रुपए किलो, बींस 50 रुपए किलो, प्याज 55 रुपए किलो, लहसुन 80 रुपए किलो व शलजम 15 रुपए किलो बिक रहा है।

उत्तराखंड में सब्जी के थोक और फुटकर के व्यापारी सब्जियों की बढ़ती कीमतों के कारण बेहद परेशान हैं। सब्जी व्यापारी चंद्रपाल सिंह लोधी का कहना है कि इस बार समय पर बारिश न होने की वजह से स्थानीय सब्जियां गाजर, फूल गोभी, बंद गोभी, शलजम, तोरी की पैदावार कम हो रही है। दूसरे बाहर से आने वाली सब्जियों की आमद भी पिछले साल के मुकाबले काफी कम है। देहरादून से मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर के रास्ते में भारी कोहरा होने की वजह से यातायात में भारी व्यवधान पड़ रहा है।
उत्तराखंड के रहने वाले अर्थशास्त्री डॉ. सुनील बत्रा के मुताबिक मांग और पूर्ति के सिद्धांत को देखते हुए राज्य में सब्जियों की मांग ज्यादा है, जबकि पूर्ति बहुत कम है। राज्य में इस समय मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में जबरदस्त पाला पड़ रहा है। इसका असर सब्जियों के उत्पादन पर पड़ा है।

इस समय सब्जियों का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 20 फीसद कम है। जबकि घना कोहरा पड़ने से यातायात अत्यधिक प्रभावित हो रहा है। दिल्ली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर से आने वाली सब्जियों की खेप देरी से पहुंच रही है। और लोगों को सब्जियों की स्थानीय आपूर्ति से ही काम चलाना पड़ रहा है जिसकी पूर्ति बहुत कम है। उत्तराखंड के कृषि मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि सब्जियों की कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार अन्य राज्यों से सब्जियों की आपूर्ति में बढोतरी के लिए गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है।
सूबे के सभी तेरह जिलों के जिलाधिकारियों को सब्जियों की आपूर्ति सुचारू बनाने के आदेश दिए गए हैं।

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