मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक इंदौर के महाराजा यशवंतराव (MY) अस्पताल इन दिनों विवादों में है। दरअसल, बीते दिनों यहां से एक 11 साल के बच्चे को उसके माता-पिता द्वारा तपती दोपहर में स्ट्रेचर पर ले जाने का वीडियो वायरल हुआ था। लापरवाही का वीडियो प्रसारित होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने कई कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।
सोशल मीडिया पर वीडियो में बच्चे के माता-पिता उसे एमवाई अस्पताल से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तक स्ट्रेचर पर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। इस घटना ने मरीजों की देखभाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया
अस्पताल अधिकारियों के मुताबिक मामले में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। बच्चे का इलाज कर रहे डॉक्टर के सात दिन के वेतन की कटौती की गई है, जबकि तीन नर्सों का एक-एक दिन का वेतन काटा गया है। जबकि अस्पताल के सुरक्षा प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा अस्पताल अधीक्षक और एक न्यूरोसर्जन समेत कई अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अस्पताल ने हाउसकीपिंग और सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली एजेंसी पर भी एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
छह जून को रिकॉर्ड किए गए वीडियो में बच्चे के माता-पिता भीषण गर्मी के बीच उसे स्ट्रेचर पर धकेलते हुए दोनों अस्पतालों के बीच ले जाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में नाराजगी फैल गई। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने इस बात से इनकार किया है कि बच्चे को बिना किसी मदद या व्यवस्था के छोड़ दिया गया था।
अस्पताल प्रशासन ने दी सफाई
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने बताया कि बच्चा लंबे समय से न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं से जुड़ी बीमारी का इलाज करा रहा था और उसकी न्यूरो-इंटरवेंशन प्रक्रिया भी हो चुकी थी। डॉ. यादव के अनुसार, बच्चे की हालत को लेकर परिवार काफी चिंतित था और वे अलग-अलग डॉक्टरों और विभागों से राय लेना चाहते थे। उन्होंने कहा कि दोनों अस्पतालों के बीच केवल दस्तावेजों और कागजी प्रक्रिया की जरूरत थी, लेकिन परिवार बच्चे को भी साथ लेकर चला गया।
उन्होंने यह भी बताया कि यात्रा के दौरान इस्तेमाल किया गया स्ट्रेचर अस्पताल कर्मचारियों ने उपलब्ध कराया था, जिसे उन्होंने गलती बताया। उनके अनुसार उस समय मरीज को शारीरिक रूप से दूसरे अस्पताल ले जाने की मेडिकल नीड नहीं थी और रेफरल तथा दस्तावेजी प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति के कारण ऐसा हुआ।
परिवार ने क्या कहा?
वहीं, बच्चे के परिवार का पक्ष अलग है। माता-पिता का कहना है कि विशेष इलाज की तलाश में उन्हें देरी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ा, जिसके कारण उन्हें बेटे को खुद ही दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ा। परिवार के अनुसार, डॉक्टरों ने उन्हें आगे की जांच और स्पाइनल ब्रेस लगवाने के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जाने की सलाह दी थी, लेकिन वहां तक पहुंचाने के लिए समय पर कोई मदद नहीं मिली।
परिजनों ने बताया कि बच्चा करीब 15 दिनों से इलाज करा रहा था। उसे रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या के कारण एमवाई अस्पताल से सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भेजा गया था। लेकिन वहां पहुंचने पर कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि बच्चे को भर्ती करने की जरूरत नहीं है और केवल उसकी फाइल और मेडिकल दस्तावेजों की जांच करनी है। इसके बाद परिवार को बच्चे को उसी स्ट्रेचर पर वापस एमवाई अस्पताल लाना पड़ा।
परिवार का कहना है कि गर्मी से बच्चे को काफी परेशानी होती है। रास्ते में उसकी मां बार-बार दुपट्टे को पानी में भिगोकर उसके शरीर पर रखती रही ताकि उसे राहत मिल सके।
पहले भी विवादों में रहा है एमवाई अस्पताल
यह पहला मौका नहीं है जब एमवाई अस्पताल विवादों में आया हो। इसी साल जनवरी में डेढ़ महीने के एक बच्चे का अंगूठा कथित तौर पर उस समय कट गया था, जब एक नर्स नस में लगी कैनुला निकाल रही थी। इसके बाद बच्चे की उंगली को जोड़ने के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में आपातकालीन माइक्रोसर्जरी करनी पड़ी थी। इस घटना के बाद भी अस्पताल प्रशासन को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था और संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई थी।
कुछ महीने पहले अस्पताल का नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष (NICU) भी उस समय चर्चा में आया था, जब नवजात बच्चों को चूहों द्वारा काटे जाने के आरोप लगे थे। बाद में अस्पताल प्रशासन ने परिसर में चूहों की समस्या होने की बात स्वीकार की थी और कीट नियंत्रण अभियान शुरू किया था। मामला तब और गंभीर हो गया जब कुछ परिवारों ने नवजात बच्चों की मौतों को चूहों के हमलों से जोड़कर देखा।
हालांकि अस्पताल ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि बच्चों की मौत पहले से मौजूद गंभीर चिकित्सकीय समस्याओं के कारण हुई थी, न कि चूहों के काटने की वजह से।
