ताज़ा खबर
 

MP : इंदौर की हर्षिता ने चार लोगों को दी नई जिंदगी, प्लेन से मुंबई भेजे गए उनके हार्ट और लंग्स

इंदौर के जूना रिसाला की हर्षिता कौशल (36) अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन वे चार लोगों को नई जिंदगी दे गई हैं। हर्षिता की दोनों किडनी, लिवर, हार्ट और लंग्स बुधवार को चार जरूरतमंदों को ट्रांसप्लांट किए गए। मध्यप्रदेश में लंग्स डोनेट करने का यह पहला मामला है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

इंदौर के जूना रिसाला की हर्षिता कौशल (36) अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन वे चार लोगों को नई जिंदगी दे गई हैं। हर्षिता की दोनों किडनी, लिवर, हार्ट और लंग्स बुधवार को चार जरूरतमंदों को ट्रांसप्लांट किए गए। वहीं, एक मरीज के लिए हार्ट और लंग्स प्लेन से मुंबई भेजे गए। इसके अलावा लिवर और किडनी इंदौर के ही दो अस्पतालों में तीन मरीजों को दिए गए। मध्यप्रदेश में लंग्स डोनेट करने का यह पहला मामला है। इन अंगों को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए तीन ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए थे।

इंदौर ने 38 महीने में 36वीं बार बनाया ग्रीन कॉरिडोर
इंदौर में अंगदान कराने वाली संस्था केडवर ऑर्गन डोनेशन ने बताया कि पिछले 38 माह में इंदौर में 36वीं बार ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। वहीं, यह पहली बार है, जब किसी ब्रेन डेड के लंग्स प्रत्यारोपण के लिए भेजे गए। उन्होंने बताया कि शहर में पहला ग्रीन कॉरिडोर अक्टूबर 2015 में बनाया गया था। अंगदान क्षेत्र में कार्यरत संस्था मुस्कान ग्रुप के शंकर लोहानी के मुताबिक, इंदौर की जूना रिसाला निवासी हर्षिता को 17 दिसंबर को ब्रेन हेमरेज के बाद बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

18 दिसंबर को ब्रेन डेड घोषित हुई थीं हर्षिता
इलाज के दौरान हर्षिता की हालत बिगड़ती गई। डॉक्टरों ने 18 दिसंबर की शाम 6:30 बजे उसे पहली बार ब्रेन डेड घोषित किया। वहीं, रात 1:15 बजे डॉक्टरों की टीम ने दूसरी बार हर्षिता को ब्रेन डेड बताया और उनके घरवालों को मामले की जानकारी दी।

हर्षिता के घरवालों से मिला मुस्कान ग्रुप
हर्षिता के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद मुस्कान ग्रुप के सदस्यों ने अंगदान के लिए उनके घरवालों से संपर्क किया। घरवालों की हामी के बाद ग्रीन कॉरिडोर बनाने के लिए प्रशासन से संपर्क किया गया। वहीं, बुधवार दोपहर शहर में तीन ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए। डॉक्टरों के मुताबिक, एक किडनी इंदौर के बॉम्बे अस्पताल, दूसरी किडनी चोइथराम हॉस्पिटल और लिवर सीएचएल अस्पताल में भर्ती मरीजों को प्रत्यारोपित किया गया। इसके अलावा हार्ट और लंग्स को मुंबई स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल भेजा गया।

 

इस तरह बने तीन ग्रीन कॉरिडोर
पहला ग्रीन कॉरिडोर : बॉम्बे हॉस्पिटल से इंदौर एयरपोर्ट तक बनाया गया।
दूसरा ग्रीन कॉरिडोर : बॉम्बे हॉस्पिटल से सीएचएल हॉस्पिटल इंदौर तक बनाया गया।
तीसरा ग्रीन कॉरिडोर : बॉम्बे हॉस्पिटल से चोइथराम हॉस्पिटल इंदौर तक बनाया गया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App