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राम मंदिर के लिए चंदा मांगने के मामले में हो गई थी सांप्रदायिक हिंसा, हाई कोर्ट ने शिवराज सरकार से मांगा जवाब

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए उज्जैन, इंदौर और मंदसौर सांप्रदायिक हिंसा को रोकने में कथित लापरवाही के मामले में छह सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है।

राम मंदिर के लिए चंदा मांगने के दौरान हिंसा हो गई थी। (एक्सप्रेस फोटो)।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए दान अभियान के दौरान उज्जैन, इंदौर और मंदसौर सांप्रदायिक हिंसा को रोकने में कथित लापरवाही के मामले में छह सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है।

मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल की पीठ ने राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें उन्होंने मॉब लिंचिंग और साम्प्रदायिक हिंसा के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए राज्य को निर्देश जारी करने के लिए अदालत का रुख किया था। आपको बता दें कि राज्य के एडिशनल एडवोकेट पुष्यमित्र भार्गव को याचिका का जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया गया था। उन्होंने कहा कि दान देना अपनी इच्छा पर है। इसके लिए अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को बाध्य नहीं करना चाहिए। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इस पवित्र उद्देश्य के लिए दान देने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा या धमकी नहीं दी जाएगी।

दायर याचिका में विस्तार पूर्वक बताया गया है कि मध्यप्रदेश में कुछ संगठनों ने दिसंबर 2020 में राम मंदिर के निर्माण में दान लेने का एक अभियान चलाया था। लेकिन इन संगठनों ने दान लेने की आड़ में राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ दिया।

याचिका में कहा गया है कि राम मंदिर के लिए धन इकट्ठा करने वाले आयोजकों के द्वारा पूर्व नियोजित तरीके से इंदौर, उज्जैन और मंदसौर में सांप्रदायिक हिंसा फैलाने का प्रयास किया है।

इस मामले में अधिकारियों के द्वारा लापरवाही बरती गई है। याचिका में आगे या भी कहा गया है कि अधिकारियों के द्वारा घटना को बिना सही से देखे ही कुछ लोगों पर कार्रवाई की गई है।

आपको बता दें कि इस याचिका में मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव डीजीपी, उज्जैन, इंदौर और मंसौर के एसपी, उज्जैन महानिरीक्षक और उज्जैन और मंदसौर के कलेक्टरों को प्रतिवादी बनाया गया था।

याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि वह धार्मिक रैलियों के मामलों में सार्वजनिक शांति भंग और सांप्रदायिक सद्भाव के उल्लंघन को रोकने के लिए उचित कदम उठाने के लिए निर्देश जारी करे।

याचिका में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि प्रतिवादी लापरवाही से काम कर रहे हैं। उनके सक्रिय कदम ना उठाने के कारण ही इंदौर,मंदसौर और उज्जैन में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुई हैं।

याचिका में कहा गया है कि पहली बार यह घटना 25 दिसंबर को उज्जैन में हुई थी। जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए चन्दा इकट्ठा किया जा रहा था। याचिका में यह भी कहा गया है कि भारतीय जनता पार्टी की युवा मोर्चा ने भी इस आयोजन में हिस्सा लिया था।

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