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कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट से बिफरा भारत

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 1980 के दशक के अंत से जम्मू कश्मीर राज्य में विभिन्न तरह के हथियारबंद समूह सक्रिय हैं। भारतीय सुरक्षा बलों के हाथों हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में अप्रत्याशित विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र रिपोर्ट में किया गया है।

भाजपा सांसद ने बताया भाजपा कब हटाएगी कश्मीर से धारा 370 (image source-Express photo)

संयुक्त राष्ट्र ने जम्मू-कश्मीर मौजूदा हालात और मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन को लेकर पहली बार अपनी रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के बारे में भी है। संरा ने कथित मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की अंतरराष्ट्रीय जांच कराने की मांग की है। इस रिपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए भारत ने इसे ‘भ्रामक, पक्षपातपूर्ण और दुर्भावना से प्रेरित’ बताकर खारिज कर दिया और संयुक्त राष्ट्र में अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ‘भारत इस रिपोर्ट को देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन मान रहा है। संपूर्ण जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। पाकिस्तान ने भारत के इस राज्य के एक हिस्से पर अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है।’
संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार उच्चायुक्त के कार्यालय (यूएनएचआरसी) ने अपनी तरह की पहली रिपोर्ट गुरुवार को जारी की, जिसमें कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर- दोनों में कथित मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं पर चिंता जताते हुए इन उल्लंघनों की अंतरराष्ट्रीय जांच कराने की मांग की गई है। इस संस्था ने पाकिस्तान को शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं के खिलाफ आतंक रोधी कानूनों का दुरूपयोग रोकने और असंतोष की आवाज के दमन को भी बंद करने को कहा है। इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया में भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत इस रिपोर्ट को खारिज करता है। हम ऐसी रिपोर्ट की मंशा पर सवाल उठाते हैं। भारत ने कहा है कि संरा ने इस रिपोर्ट को काफी हद तक अपुष्ट सूचना को चुनिंदा तरीके से एकत्र करके तैयार किया गया है।

संरा की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मानवाधिकार उल्लंघन की अतीत की और मौजूदा घटनाओं के तुरंत समाधान की जरूरत है। इसमें कहा गया है, ‘कश्मीर में राजनीतिक स्थिति के किसी भी समाधान में हिंसा का चक्र रोकने के संबंध में प्रतिबद्धता और पूर्व में तथा मौजूदा मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर जवाबदेही होनी चाहिए। नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ लोगों पर नुकसानदेह असर पड़ा है और उन्हें मानवाधिकार से वंचित किया गया या सीमित किया गया।’ भारत का कहना है कि जम्मू कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के बीच कोई तुलना नहीं हो सकती, क्योंकि जम्मू- कश्मीर में लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार है, जबकि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मनमाने तरीके से पाकिस्तानी राजनयिक को वहां का प्रमुख नियुक्त किया जाता है।

कश्मीर में मानवाधिकार की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में का शीर्षक है ‘जून 2016 से अप्रैल 2018 तक भारतीय राज्य जम्मू कश्मीर में घटनाक्रम, और आजाद जम्मू कश्मीर तथा गिलगित-बालटिस्तान में मानवाधिकार से जुड़ी आम चिंताएं।’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 1980 के दशक के अंत से जम्मू कश्मीर राज्य में विभिन्न तरह के हथियारबंद समूह सक्रिय हैं। भारतीय सुरक्षा बलों के हाथों हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में अप्रत्याशित विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 1980 के दशक के अंत से जम्मू कश्मीर राज्य में विभिन्न तरह के हथियारबंद समूह सक्रिय हैं। इन समूहों ने आम नागरिकों का अपहरण और उनकी हत्याएं, यौन हिंसा सहित विभिन्न तरह से मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है। इन समूहों को किसी भी तरह के समर्थन से पाकिस्तान सरकार के इनकार के दावों के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा के पार कश्मीर में उनकी गतिविधियों में सहयोग करती है।’

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