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Indian Railways: इस जगह बनेगा सुरंग के भीतर देश का पहला रेलवे स्टेशन, जानें क्या होगी खासियत

कोलकाता और दिल्ली में कई ऐसे मेट्रो स्टेशन हैं जो जमीन के नीचे बने हैं। इसमें चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन तो मेट्रो की सुरंग का ही हिस्सा है, लेकिन देश में जल्द ही अब एक रेलवे स्टेशन भी ऐसा होगा जो सुरंग के भीतर बनाया जाएगा।

Author October 18, 2018 1:00 PM
हिमाचल प्रदेश सुरंग के अंदर बनने वाला रेलवे स्टेशन समुद्र तल से तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर होगा।

कोलकाता और दिल्ली में कई ऐसे मेट्रो स्टेशन हैं जो जमीन के नीचे बने हैं। इसमें चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन तो मेट्रो की सुरंग का ही हिस्सा है, लेकिन देश में जल्द ही अब एक रेलवे स्टेशन भी ऐसा होगा जो सुरंग के भीतर बनाया जाएगा। हिमाचल प्रदेश के केलांग में बनने वाला यह स्टेशन समुद्र तल से तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर होगा। यह चीन-भारत सीमा के लिहाज से रणनीतिक महत्व के बिलासपुर-मनाली-लेह रेलमार्ग का हिस्सा है। उत्तर रेलवे के मुख्य निर्माण अभियंता डी. आर. गुप्ता ने इस संबंध में पीटीआई-भाषा से बातचीत की।
केलांग, हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले का प्रशासनिक केंद्र है। यह मनाली से 26 किलोमीटर और भारत-तिब्बत सीमा से 120 किलोमीटर दूर है। अभी इस रेलमार्ग पर सर्वेक्षण चल रहा है, एक बार इसके पूरा होने पर यह संभवतया यह देश का पहला ऐसा रेलवे स्टेशन होगा जो सुरंग के भीतर होगा। यह इस मार्ग पर बनने वाली एक 27 किलोमीटर लंबी सुरंग का हिस्सा होगा।

गुप्ता ने कहा, ‘‘इस परियोजना के लिए पहले चरण के स्थान सर्वेक्षण के अनुसार केलांग स्टेशन सुरंग के भीतर होगा। यह देश में इस तरह का पहला रेलवे स्टेशन होगा। मार्ग का अंतिम सर्वेक्षण पूरा होने पर हो सकता है कि इस तरह के और भी स्टेशन इस मार्ग पर बनें।’’ इस मार्ग के पूरा होने पर बिलासपुर और लेह के बीच में सुंदरनगर, मंडी, मनाली, केलांग, कोकसार, दारचा, उप्शी और कारू रेलवे स्टेशन होंगे।

यह रेलमार्ग भारत-चीन सीमा पर सामान और कर्मचारियों की आवाजाही के लिहाज से रणनीतिक तौर पर अहम है। प्राथमिक सर्वेक्षण के अनुसार इस मार्ग पर 74 सुरंग बननी हैं। साथ ही 124 बड़ पुल और 396 छोटे पुलों का भी निर्माण किया जाना है। इस रेलमार्ग के पूरा हो जाने पर दिल्ली और लेह के बीच की दूरी पूरा करने में लगने वाला समय करीब आधार हो जाएगा। अभी इस दूरी को पूरा करने में करीब 40 घंटे लगते हैं, रेलमार्ग बनने के बाद यह समय 20 घंटे हो जाएगा।
इस रेलमार्ग के लिए अंतिम सर्वेक्षण 30 महीनों में पूरा होने की उम्मीद है।

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