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साहिबगंज-किउल रेलखंड का हुआ विद्युतीकरण, फिर भी नहीं बढ़ी ट्रेनों की रफ्तार; घंटों का समय हो रहा बर्बाद

रेलवे अधिकारियों का दावा है कि सभी ट्रेनें समय से चल रही है। बल्कि कई ट्रेनें पहले की तुलना में कम समय में पटना और दिल्ली पहुंच रही है। रेलवे के दावों के मुताबिक संसाधनों में काफी बदलाव हुआ है।

भागलपुर-दुमका रेलखंड पर 100 किलोमीटर रफ्तार से ट्रेन चलाने का सफल ट्रायल हो चुका है। लेकिन ट्रेनें 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ही चलाई जा रही है। (एक्सप्रेस फोटो)

विद्युतीकरण और दोहरीकरण के बावजूद रेलवे की रफ्तार योजना लागू नहीं हो पा रही है। रफ्तार की बजाए ट्रेनें  धीमी चल रही है। पुरानी समय सारिणी के हिसाब से ही ट्रेनें अपने गंतव्य स्टेशन पहुंच रही है। मुसाफिरों का घंटों समय बर्बाद हो रहा है। कोरोना काल में साहिबगंज-किउल रेलखंड का विद्युतीकरण हो चुका है। मगर ट्रेनों की रफ्तार अभी भी 90-100 किलोमीटर प्रति घंटे की ही है। कहीं -कहीं तो 60 किलोमीटर प्रति घंटे ही है। जबकि मालदा रेलवे डिवीजन के एक अधिकारी के मुताबिक इस रूट पर ज्यादा गति से ट्रेनें चलाई जा सकती है।

वहीं भागलपुर-दुमका रेलखंड पर 100 किलोमीटर रफ्तार से ट्रेन चलाने का सफल ट्रायल हो चुका है। मगर ट्रेनें 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ही चलाई जा रही है। यह बात मालदा डीआरएम यतेंद्र कुमार भी मानते है। यतेंद्र कुमार कहते हैं कि रफ्तार तेज करने की प्रक्रिया जारी है। जबकि रेलखंड की पटरियां दुरुस्त है। ट्रेनों की रफ्तार बढाई जा सकती है। इसका सीधा नुकसान यात्रियों को उठाना पड़ रहा है।

ध्यान रहे कि इन रूट पर कोरोना काल में बंद हुई ट्रेनों को फिर से शुरू कर दिया गया है। सभी ट्रेनों के नंबरों के पहले शून्य लगा स्पेशल बोलकर चलाया जा रहा है। सिल्क व्यापारी शिवरतन झुनझुनवाला कहते है कि स्पेशल के नाम पर किराया में जरूर इजाफा हुआ है। मगर सुविधाएं कोरोना की वजह से कम कर दी गई है। मसलन वरीय नागरिकों को किराए में दी जा रही रियायत अभी भी बंद है। वातानुकूलित श्रेणी में बिस्तर नहीं मिलता है।बारिश के मौसम में एसी कोच से भी रिसाव होता है। 

हालांकि रेलवे अधिकारियों का दावा है कि सभी ट्रेनें समय से चल रही है। बल्कि कई ट्रेनें पहले की तुलना में कम समय में पटना और दिल्ली पहुंच रही है। रेलवे के दावों के मुताबिक संसाधनों में काफी बदलाव हुआ है। ट्रेनें समय से पहले स्टेशन पहुंच दस मिनट के ठहराव की जगह आधे घंटे तक खड़ी रहती है। 

दूसरी तरफ जमालपुर के पास निर्माणाधीन दूसरी सुरंग चालू न होने से भी ट्रेनों की गति में बाधा उत्त्पन्न हो रही है। इसका काम भी मंद गति से चल रहा है। हाल ही में पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मनोज जोशी यहां आकर मुआयना कर गए है। डीआरएम भी निरीक्षण करने आते ही रहते है। फिर भी सुरंग चालू करने में देरी हो रही है। बरहड़वा से किउल 247 किलोमीटर विद्युतीकरण हुए डेढ़ साल हो चुके है। सभी ट्रेनों में बिजली चालित इंजन लगे है। फिर भी ट्रेनों की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा नहीं हो पाई है।

मालदा रेलवे डिवीजन यातायात से जुड़े अधिकारी बताते है कि इस रूट पर पड़ने वाले दो दर्जन पुल-पुलियों की वजह से ट्रेनों की रफ्तार धीमी करनी पड़ती है। खासकर मानसून के मौसम में विशेष सतर्कता बरती जाती है। जानकर बताते है कि पूर्व मध्य रेलवे के 19 रूटों पर रेलवे ने रफ्तार बढ़ाने की घोषणा की थी। लेकिन अभी भी ट्रेनें पहले की तरह ही ज्यादा समय ले रही हैं।

रेलवे सूत्रों के मुताबिक पूर्व मध्य रेलवे की 417 किलोमीटर रेलखंड की दशा सुधारने के लिए 408 करोड़ रुपए रेलवे बोर्ड ने 2021-22 वित्तीय वर्ष में मंजूर किए है। यह रकम रेलवे पटरियों, सिग्नल, जमीन की भराई वगैरह पर खर्च होने हैं। लंबी दूरी की ट्रेनों की रफ्तार 130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे करने की तैयारियां चल रही है। मगरये ट्रेनें हावड़ा- नईदिल्ली वाया धनबाद – गया- सासाराम- पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलखंड की है। ट्रेनों की गति इन रूटों पर बढ़ने से 1462 किलोमीटर की यात्रा केवल 12 घंटे में ही तय हो सकेगी।

लेकिन मालदा रेलवे डिवीजन में पड़ने वाले साहिबगंज-किउल, भागलपुर-दुमका रेलखंड पर ट्रेनों की रफ्तार कब तक बढ़ पाएगी? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। नतीजतन इस रूट के मुसाफिरों का हाल बेहाल है।

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