ताज़ा खबर
 

मात से बचा लिया मध्य और दक्षिण गुजरात ने

इस बार के नतीजों के क्षेत्रवार विश्लेषण से स्पष्ट है कि भाजपा को जीत दिलाने में मध्य गुजरात और दक्षिण गुजरात ने महती भूमिका अदा की।

Author नई दिल्ली | December 19, 2017 2:41 AM
Himachal Pradesh Election Result 2017: भाजपा के कार्यकर्ताओं में जीत से खुशी की लहर दौड़ रही है।

इस बार के नतीजों के क्षेत्रवार विश्लेषण से स्पष्ट है कि भाजपा को जीत दिलाने में मध्य गुजरात और दक्षिण गुजरात ने महती भूमिका अदा की। कांग्रेस का प्रदर्शन सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात की सीटों पर बेहतर रहा। दूसरे चरण में मध्य और दक्षिणी गुजरात में मतदान कराए गए थे। इस चरण में भाजपा ने अपनी रणनीति बदली और गुजराती अस्मिता से लेकर पाकिस्तान तक का मुद्दा उठा दिया। सौराष्ट्र की 54 सीटों में से 31 कांग्रेस के खाते में गईं, जबकि भाजपा को 22 सीटें मिलीं। उत्तर गुजरात में 32 सीटें हैं, जिनमें से 18 पर कांग्रेस को फायदा हुआ है। मध्य और दक्षिण गुजरात ने कांग्रेस को झटका दिया। दक्षिण गुजरात में 35 सीटें हैं, जिनमें 25 पर भाजपा आगे रही और कांग्रेस आठ पर। मध्य गुजरात में 61 सीटें हैं, जिनमें से 42 सीटों पर भाजपा आगे रही और 17 पर कांग्रेस।

वर्ष 2012 में भाजपा को 47.9 फीसद वोट मिले थे। तब उसे 115 सीटें मिली थीं। तब की तुलना में अबकी उसके वोटों में लगभग डेढ़ फीसद का इजाफा हुआ। हालांकि, 16 सीटें घट गईं। दूसरी ओर, 2012 में कांग्रेस को 38.9 फीसद वोट मिले थे। तब 61 सीटें मिली थीं। तुलनात्मक रूप से उसे इस साल करीब दो फीसद वोटों का फायदा हुआ है और 16 सीटें बढ़ी हैं। अगर लोकसभा चुनाव के नतीजों से तुलना की जाए तो इस बार भाजपा को झटका लगा है। तीन साल पहले लोकसभा चुनाव में भाजपा को 60.1 फीसद वोट मिले थे और 162 विधानसभा सीटों पर उसे बढ़त मिली थी। दूसरी ओर, 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस खाता भी नहीं खोल पाई थी। उस वक्त वोट शेयर 33.5 फीसद था और पार्टी को महज 17 विधानसभा सीटों पर बढ़त मिली थी। इस बार कांग्रेस ने पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) के नेता हार्दिक पटेल से हाथ मिलाया। जिसकी वजह से भाजपा को नुकसान हुआ है। पाटीदारों के असर वाली 83 सीटों में से 21 पर भाजपा और 18 पर कांग्रेस को बढ़त मिली है। पांच साल पहले 2012 के चुनाव में इनमें से 59 यानी 71 फीसद सीटें भाजपा ने जीती थीं। जाहिर है, पाटीदार बहुल इलाकों में भाजपा ने 38 सीटें गंवाई है।

सौराष्ट्र में कुल 54 सीटें हैं। इनमें से कांग्रेस को 29 पर तो भाजपा को 25 पर बढ़त मिली। 2012 के चुनाव में भाजपा को 35, कांग्रेस को 16 सीटें मिली थीं। भाजपा के इस गढ़ में उसे यह बड़ा नुकसान माना जा रहा है। दक्षिणी गुजरात में भाजपा की बादशाहत कायम है, लेकिन कांग्रेस ने बढ़त हासिल की है। दक्षिणी गुजरात में गिर सोमनाथ, अमरोली, बोटाड, नर्मदा, भरूच, सूरत, तापी, डांग, नवसारी जिले आते हैं। गिरी सोमनाथ की चारों सीटें कांग्रेस के खाते में गई हैं। भरूच में दो भाजपा और तीन कांग्रेस के खाते में गई हैं। पाटीदार आरक्षण आंदोलन और जीएसटी, नोटबंदी के चलते माना जा रहा था कि दक्षिणी गुजरात में भाजपा को तगड़ा झटका लगेगा, लेकिन चुनाव के नतीजों में इन मुद्दों का बहुत असर नजर नहीं आया। कांग्रेस ने इस क्षेत्र से बड़ी उम्मीदें पाल रखी थीं। इस इलाके में भाजपा को महज चार सीटों का झटका लगा है। मध्य गुजरात में 35 सीटें आती है। भाजपा के खाते में 24 सीटें आई हैं। कांग्रेस ने 11 सीटों पर जीत पाई है। 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 28 सीटें और कांग्रेस को छह सीटें मिली थीं। इस तरह भाजपा के चार सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है।

शहरी क्षेत्रों ने भाजपा का साथ दिया। 73 में 55 सीटें भाजपा की झोली में गई हैं। गुजरात के दो बड़े शहरी क्षेत्र अहमदाबाद और वडोदरा के माने जाते हैं। अहमदाबाद की 21 में से 17 सीटें भाजपा ने जीतीं। वडोदरा की 10 में से नौ सीटें उसे मिली हैं। मेहसाणा की सात में चार सीटें भाजपा को मिली हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस को पंचमहल की पांच में चार एवं छोटा उदयपुर में सभी तीन सीटें मिली हैं। जहां तक ग्रामीण क्षेत्रों का सवाल है, कांग्रेस को फायदा हुआ है। ग्रामीण इलाकों की 109 में से कांग्रेस को 62 सीटें मिली हैं। इन इलाकों में कांग्रेस ने 23 सीटें भाजपा से छीनी हैं। तीन निर्दलीयों ने भी भाजपा उम्मीदवार को हराकर सीटें दखल की हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App