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देश में बड़े पैमाने पर अंगदान की जरूरत

दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों एवं वरिष्ठ चिकित्सकों ने लोगों से बड़े पैमाने पर अंगदान करने का आग्रह किया है ताकि लोगों को नया जीवन मिल सके।

Author नई दिल्ली | January 20, 2016 23:27 pm
केरल की जेलों में बंद कैदी अंगदान कर सकेंगे। (प्रतीकात्‍मक फोटो)

देश में प्रतिवर्ष ढाई लाख से अधिक अंगों के प्रतिरोपण की जरूरत के बीच राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों एवं वरिष्ठ चिकित्सकों ने लोगों से बड़े पैमाने पर अंगदान करने का आग्रह किया है ताकि लोगों को नया जीवन मिल सके। लिवर (यकृत) प्रतिरोपण के क्षेत्र में वृहत कार्यक्रम को आगे बढ़ाने वाली सेंटर फार लिवर एंड बिलियरी साइंस (सीएलबीएस) ने लोगों से अंगदान की अपील करते हुए कहा कि सेंटर ने 1900 से ज्यादा प्रतिरोपण किए हैं और पिछले तीन वर्षों में हर वर्ष 300 से अधिक प्रतिरोपण किए हैं। संस्था का कहना है कि अंगों की भारी कमी और जागरूकता के अभाव के कारण काफी संख्या में मरीज की मौत हो जाती है या जीवन भर के लिए अपंग हो जाते हैं अन्यथा वे भी सामान्य जीवन बिता सकते थे।

आधारभूत संरचना की कमी भी बड़ी समस्या है और ज्यादातर शहरों में अंग प्रतिरोपण की सुविधा नहीं होने के कारण भी इच्छुक लोग ऐसा नहीं कर पाते हैं। इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के चीफ लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डा. सुभाष गुप्ता ने कहा कि देश में होने वाले कुल अंग प्रतिरोपण में 85 प्रतिशत योगदान जीवित अंग दानकर्ताओं का होता है। जागरूकता बढ़ाने की तमाम कोशिशों के बावजूद हमने देखा कि दान किए जाने वाले अंगों और अंंगदान के लिए प्रतीक्षारत लोगों के बीच अंतर काफी बड़ा है। देश में मृतकों से प्राप्त अंगों की तादाद बढ़ाने की जरूरत है क्योंकि अंगों की मांग बहुत अधिक है।

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशल के डाक्टरों ने अंगदान की अपील करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कुछ समय पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लोगों से अंगदान करने का आग्रह किया था। इंद्रप्रस्थ अपोलो हास्पिटल, सीएलबीएस एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के पेशेवरों ने यहां अंगदान करने वालों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में लोगों से अंगदान की अपील की ।

जाने माने चिकित्सक डा. संजीव छिब्बर ने कहा कि देश में प्रति वर्ष ढाई लाख से भी अधिक किडनी, हार्ट और लिवर प्रतिरोपण की जरूरत है लेकिन देश में सिर्फ पांच हजार प्रतिरोपण ही हो पाते हैं। हर साल एक लाख आंखों को रोशनी की जरूरत होती है, पर सिर्फ पच्चीस हजार को ही आंखों का प्रतिरोपण हो पाता है। सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर शरीर के अंग का दान किया जा सकता है।

यहां चिकित्सकों ने एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि तमिलनाडु सरकार ने अंग प्रतिरोपण के मुद्दे पर उल्लेखनीय काम किया है और साल 2014 में ही 155 मृत अंगदाताओं से राज्य में 500 से ज्यादा लोगों को नया जीवन मिला।

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