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भारत व चीन ही दे सकते हैं दुनिया को रफ्तार: विक्रमसिंघे

श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को यहां कहा कि भारत और चीन ही ऐसे देश हैं जो दुनिया को आर्थिक रफ्तार दे सकते हैं।
Author नई दिल्ली | October 7, 2016 03:57 am

श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को यहां कहा कि भारत और चीन ही ऐसे देश हैं जो दुनिया को आर्थिक रफ्तार दे सकते हैं। इसलिए विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों के लिए कहीं और जाने के लिए जगह नहीं है। कृषि से जुड़ी आर्थिक नीतियों के बारे में अलग-अलग पैमाने अपनाने को लेकर उन्होंने पश्चिमी देशों की कड़ी आलोचना की और कहा कि एशिया को अगर ये नीतियां बनाने की अनुमति दी जाए तो यह विश्व को आर्थिक संकट से उबार देगा। विक्रमसिंघे यहां विश्व आर्थिक मंच और सीआइआइ की ओर से आयोजित भारत आर्थिक मंच के सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा-‘इस साल विश्व आर्थिक मंच की बैठक दिल्ली में है। दुनिया यह अपेक्षा करती है कि भारत संभावनाओं को हकीकत में बदले। हम एक और ऐतिहासिक क्षण की दहलीज पर हैं। अगर सुधारों की गति तेजी से आगे नहीं बढ़ती है, कंपनियां किसी और जगह को देख सकती हैं। पर कहां? यह भारत और चीन हैं। यह वास्तविकता है। आज कोई ऐसी जगह नहीं हैं जहां आप जाएं।’ उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने वैश्वीकरण पर नियम लिख डाले और हमें केवल उसके आधार पर चलना है। जब लोग वहां गए और अपने कोष व संपत्ति पश्चिमी देशों में जमा की, किसी ने शिकायत नहीं की। जब उनके लोग स्विट्जरलैंड जाने लगे, उन्होंने शिकायत करना शुरू कर दिया।

विक्रमसिंघे ने कहा कि भारत के साथ श्रीलंका इस साल आर्थिक एवं प्रौद्योगिकी सहयोग समझौता (ईटीसीए) करेगा। उन्होंने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मैंने यह फैसला किया है कि इसे इस साल के अंत तक नतीजे पर पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि पांच राज्यों- कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना की आबादी 25 करोड़ है और संयुक्त रूप से जीडीपी करीब 450 अरब डालर है। श्रीलंका की 2.2 करोड़ आबादी और 80 अरब डालर की अर्थव्यवस्था के साथ इस उप-क्षेत्र का जीडीपी 500 अरब डालर होगा। उन्होंने कहा-कल्पना कीजिए, अगर हम साथ मिलकर काम करें तो क्या होगा। ईटीसीए के पास 500 अरब डालर की उप-क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि को बढ़ावा देने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि भारत-श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) को आगे बढ़ाया जाएगा और इसमें वस्तुओं के अलावा सेवा, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग को भी शामिल किया जाएगा।

सम्मेलन में वेदांता रिर्सोसेस के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत की आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये लघु एवं मझोले उद्यमों के विकास पर जोर दिया। जीई हांगकांग एसएआर के उपाध्यक्ष जॉन राइस ने कहा कि भारत को निर्यात पर और जोर देने की जरूरत है और उसे निर्यात रिण एजंसी स्थापित करने पर गौर करना चाहिए। एटी केर्ने के ग्लोबल मैनेजिंग पार्टनर जोहान औरिक के अनुसार भारत को वृद्धि के लिये रोजगार और प्रौद्योगिकी विकास पर बल देना चाहिए। हार्वर्ड की अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ का मानना है कि भारत को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि एक-दो दशक तक वह आठ फीसद आर्थिक वृद्धि हासिल कर सके। पेटीएम के सीईओ वीएस शर्मा का कहना था कि चौथी औद्योगिक क्रांति सभी तक सस्ते इंटरनेट की पहुंच पर निर्भर करेगी। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि देश को वृद्धि की गति को बनाए रखने के लिए शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र के पुनर्गठन की जरूरत है।

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