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लद्दाख में भी LAC पर चीनी सैनिकों से तनातनी, वायु सेना ने भेजे दो लड़ाकू सुखोई-30 विमान

पांच मई की देर शाम पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर भारतीय जवानों और चीनी सैनिकों के बीच झड़प तथा पथराव हुआ जिसमें दोनों ओर से कुछ सैनिक घायल हुए थे। सूत्रों ने बताया कि एक अन्य घटना में करीब 150 भारतीय और चीनी सैन्य कर्मियों के बीच शनिवार को चीन-भारत सीमा पर सिक्किम सेक्टर में नाकू ला दर्रे के पास झड़प हुई थीं।

Author नई दिल्ली | Published on: May 13, 2020 7:39 AM
दोनों देशों के सैनिकों के बीच इस तरह की घटना पैंगोंग झील के पास अगस्त 2017 में हुई थी। उसके बाद यह ऐसी पहली घटना है।

भारत और चीन सीमा पर तनाव के बीच पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में भारतीय सेना बीजिंग पर कड़ी निगरानी बनाए हुए है। सूत्रों ने इसकी पुष्टि की। पिछले सप्ताह क्षेत्र में पैंगोंग झील के निकट दोनों पक्षों के लगभग 250 सैनिकों के बीच झड़प हुई थी। सूत्रों ने बताया कि पांच मई को दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच झड़प के बाद क्षेत्र में चीन-भारत सीमा के निकट चीन के कम से कम दो हेलीकॉप्टरों को उड़ान भरते देखा गया। इसके बाद भारतीय वायुसेना के दो सुखोई-30 लड़ाकू विमानों ने भी वहां उड़ान भरी।

झड़प के बारे में पूछे जाने पर सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों के सैनिक अपने-अपने स्थानों पर बने रहे। हालांकि तनाव और बढ़ने की आशंका में अतिरिक्त टुकड़ियों को लाया गया। सूत्रों ने बताया कि गत मंगलवार की शाम को सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद क्षेत्र के हालात तनावपूर्ण बने रहे। स्थानीय कमांडरों के बीच बातचीत के बाद छह मई को दोनों पक्ष गतिरोध समाप्त करने पर सहमत हो गए।

एक सूत्र ने बताया कि झड़प के बाद क्षेत्र में दोनों पक्षों द्वारा कुछ सैनिकों को रखा गया है। उन्होंने कहा, ‘स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।’ सेना के प्रवक्ता ने पूछे जाने पर कहा, ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर झड़प और आक्रामक रूख की घटनाएं हुई हैं। स्थानीय स्तर की बातचीत और संवाद के बाद ये गश्ती दलों का मतभेद दूर हो जाता है। सीमा के मामले का समाधान नहीं होने के कारण अस्थाई और अल्प अवधि के लिए झड़पें होती हैं।’

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उन्होंने कहा, ‘मैं स्पष्ट करता हूं कि पैंगोंग त्सो झील में लगातार तनातनी नहीं रही है और क्षेत्र में सशस्त्र सैनिकों का जमावड़ा नहीं है।’ भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के सूत्रों ने बताया कि सुखोई-30 लड़ाकू विमानों समेत उसके विमानों ने छह मई को क्षेत्र में नियमित उड़ान भरी थी। उन्होंने कहा कि चीनी पक्ष द्वारा क्षेत्र में भारतीय हवाई क्षेत्र का उल्लंघन नहीं किया गया था। भारतीय वायुसेना लेह और थोईस एयरबेस से इस क्षेत्र में नियमित रूप से उड़ानें भरती है।

पांच मई की देर शाम पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर भारतीय जवानों और चीनी सैनिकों के बीच झड़प तथा पथराव हुआ जिसमें दोनों ओर से कुछ सैनिक घायल हुए थे। सूत्रों ने बताया कि एक अन्य घटना में करीब 150 भारतीय और चीनी सैन्य कर्मियों के बीच शनिवार को चीन-भारत सीमा पर सिक्किम सेक्टर में नाकू ला दर्रे के पास झड़प हुई थीं, जिसमें दोनों ओर के कम से कम 10 सैनिकों को चोटें आईं थीं।

दोनों देशों के सैनिकों के बीच इस तरह की घटना पैंगोंग झील के पास अगस्त 2017 में हुई थी। उसके बाद यह ऐसी पहली घटना है। भारत और चीन के सैनिकों के बीच 2017 में डोकलाम ट्राई जंक्शन के पास 73 दिन तक गतिरोध कायम रहा था। उस घटना से दोनों परमाणु सम्पन्न देशों के बीच युद्ध की आशंकाएं भी उत्पन्न हो गई थीं।

भारत-चीन सीमा विवाद 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर है। यह दोनों देशों के बीच अघोषित सीमा है। चीन का दावा है कि अरुणाचल प्रदेश दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है जबकि भारत इसका खंडन करता आया है। दोनों पक्षों का कहना है कि सीमा मुद्दे का हल होने तक सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखना जरूरी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने डोकलाम गतिरोध के कुछ महीनों बाद अप्रैल 2018 में चीनी शहर वुहान में पहली अनौपचारिक वार्ता की थी। वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने निर्णय किया था कि वे अपनी सेनाओं को संवाद मजबूत करने के लिए ‘रणनीतिक मार्गदर्शन’ जारी करेंगे जिससे उनमें विश्वास और समझ का निर्माण हो सके। मोदी और शी के बीच दूसरा अनौपचारिक शिखर सम्मेलन पिछले साल अक्टूबर में चेन्नई के पास मामल्लापुरम में हुआ था जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक व्यापक बनाने पर जोर दिया गया था।

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