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मोदीजी लेह गए और चीन डर गया; भाजपा सांसद की राय- बातचीत से कुछ नहीं होगा, अब तिब्बत को आजाद कराओ

भाजपा सांसद किशन कपूर ने कहा कि साल 1962 में चीन ने भारत की जमीन पर कब्जा कर लिया और उसने फिर भारत को धमकी दी। इस बार पीएम मोदी ने दुनिया को दिखा दिया कि जो भारत को चुनौती देगा उसे शांति से रहने नहीं दिया जाएगा।

Dalai Lama Narendra Damodardas Modiसेना के अधिकारियों के साथ लद्दाख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (ANI)

भारत-चीन सीमा विवाद के बीच कांगड़ा से भाजपा सांसद किशन कपूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार दलाई लामा को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान (भारत रत्न) से सम्मानित करे और चीन से तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए आह्वान करे। तिब्बतियों के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा के पास मैकलियोडगंज में बस गए हैं। दलाई लामा ने साल 1959 में तिब्बत पर चीनी आक्रमण के बाद भारत में शरण ली थी।

कपूर ने रेडिफ डॉट कॉम से कहा कि अगर तिब्बत आजाद हुआ तो भारत की सुरक्षा अच्छी होगी। पूछने पर कि आध्यात्मिक गुरु को भारत रत्न से क्यों सम्मानित किया जाएा। उन्होंने कहा कि मैंने दलाई लामा के 85वें जन्मदिन पर ये बयान दिया क्योंकि उनके लिए ये सबसे अच्छा उपहार हो सकता है। भाजपा सांसद ने कहा कि चीन ने उनके साथ बहुत अन्याय किया है। उनके देश पर कब्जा कर लिया। अब अगर चीन अपनी छवि सुधारना चाहता है तो तिब्बत को आजाद करे। इसके अलावा भारत के सुरक्षा दृष्टिकोण से भी ये अच्छा होगा।

दलाई लामा के लिए भारत रत्न की मांग कभी नहीं की गई तो अब आप इसकी मांग क्यों कर रहे हैं? कांगड़ा सांसद ने कहा कि उन्हें भारत रत्न पहले नहीं दिया गया तो अब दे सकते हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है। साल 1962 में चीन ने भारत की जमीन पर कब्जा कर लिया और उसने फिर भारत को धमकी दी। इस बार पीएम मोदी ने दुनिया को दिखा दिया कि जो भारत को चुनौती देगा उसे शांति से रहने नहीं दिया जाएगा।

पूछने पर कि आपके बयान से शांति वार्ता बाधित हो सकती है क्योंकि आप भाजपा सांसद हैं। किशन कपूर ने कहा कि इन वार्ताओं से कुछ नहीं निकलेगा। चीन वादा कुछ करता और फिर रंग दिखा देता है। पीएम मोदी ने चीन को चेतावनी दी और इसलिए वो वार्ता को राजी हुआ। मोदी लेह गए और चीन घबरा गया।

बता दें कि पैंगोंग सो और देपसांग समेत पूर्वी लद्दाख में गतिरोध वाले सभी स्थानों से समयबद्ध तरीके से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय और चीनी सेना के कमांडरों के बीच मंगलवार (24 जून, 2020) को 10 घंटे से भी अधिक समय तक गहन बातचीत हुई। अधिकारियों ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की चौथे चरण की वार्ता में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास पीछे के सैन्य प्रतिष्ठानों से बड़ी संख्या में सैनिकों और हथियारों को हटाने के कदमों पर ध्यान केन्द्रित किया गया।

सूत्रों ने बताया कि भारतीय पक्ष ने पांच मई से पहले पूर्वी लद्दाख के सभी इलाकों में जो पूर्व की यथास्थिति थी, उसे फिर से बहाल करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में चीन के ‘नए दावों’ को लेकर भी चिंताओं से अवगत कराया गया और पैंगोंग सो समेत कई इलाकों से चीनी सैनिकों की तुरंत वापसी की मांग की गई। बैठक की जानकारी के बारे में हालांकि कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। (एजेंसी इनपुट)

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