स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) की एक प्रोफेसर जोया हसन का दिल्ली के एक स्कूल में संबोधन शुक्रवार को लास्ट मिनट पर रद्द कर दिया गया। स्कूल प्रबंधन की ओर से इस पर सुरक्षा हवालों का कारण बताया गया है। वहीं, सूत्रों ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था।

आजादी के 80वें साल के मौके पर प्रो. जोया हसन को मुख्य अतिथि के तौर पर सरदार पटेल विद्यालय की ओर से बुलाया गया था। यहां उन्हें स्कॉलरशिप अवार्ड समारोह और ध्वाजारोहण के बाद छात्रों को संबोधित करना था। स्कूल की ओर से जारी निमंत्रण पत्र में कहा गया था कि कार्यक्रम 14 अगस्त की सुबह 10 बजे लोदी एस्टेट कैंपस में शुरू होगा।

10 से 15 वीएचपी सदस्यों ने किया विरोध

घटना की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद के करीब 10-15 सदस्य स्कूल के बाहर जमा हुए थे और जिसके बाद में वहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। स्कूल ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को पुष्टि की कि सुरक्षा कारणों से जोया हसन का भाषण और उनका स्कूल में प्रवेश रद्द करना पड़ा।

मामले की जानकारी रखने वाले स्कूल के एक स्टाफ सदस्य ने कहा, “दुर्भाग्य से, सुबह-सुबह कुछ उपद्रवी लोग स्कूल के बाहर जमा हो गए, जिसके बाद राजनीतिक कारणों से स्थिति बिगड़ गई।”

स्कूल प्रशासन ने इस बात पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की कि यह फैसला पुलिस के निर्देश पर लिया गया था या स्कूल ने खुद लिया था।

प्रोफेसर की जगह स्कूल की पूर्व छात्रा को बुलाया गया

स्कूल अधिकारियों ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि कार्यक्रम में कोई बाधा नहीं आई और यह स्कूल के ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। जोया हसन की जगह गुजरात एजुकेशन सोसाइटी (GES) की अध्यक्ष और स्कूल की पूर्व छात्रा श्वेता कल्याणवाला ने ली। GES वह मुख्य संस्था है जो स्कूल का प्रबंधन करती है।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि उन्हें स्कूल से सुरक्षा के खतरे के बारे में जानकारी मिली थी, और जोया हसन की भागीदारी रद्द करने का फैसला स्कूल ने ही लिया होगा। जबरदस्ती कार्यक्रम रद्द करवाने की बात से इनकार करते हुए पुलिस ने कहा कि उनके जवान सिर्फ सुरक्षा कारणों से तैनात किए गए थे।

‘सिक्योरिटी हेड ने कार्यक्रम रद्द होने की जानकारी दी’

पॉलिटिकल साइंस की प्रोफेसर जोया हसन को छात्रों के सामने बहुलवाद (pluralism) पर बात करनी थी। संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि उन्हें सरदार पटेल विद्यालय ने 14 अगस्त को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया था और प्रिंसिपल अनुराधा जोशी पिछले कुछ हफ्तों से उनके संपर्क में थीं। प्रोफेसर ने कहा, “आज सुबह 8.30 बजे मुझे संबंधित शिक्षिका का संदेश मिला कि वह सुबह 9.30 बजे तक मेरे घर पहुँच जाएंगी।”

हालाँकि, प्रोफेसर ने बताया कि उनकी जगह स्कूल के सिक्योरिटी हेड आए और उन्हें बताया कि कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी हेड ने उन्हें बताया कि VHP सदस्यों के विरोध-प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस स्कूल पहुँची थी। वे जोया हसन और छात्रों की सुरक्षा को लेकर “बहुत चिंतित” थे। जोया हसन ने कहा कि पुलिस ने उनसे सीधे संपर्क नहीं किया था।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने स्कूल को बता दिया था कि उनका विषय ‘बहुलवाद क्यों जरूरी है’ (Why pluralism matters) होगा, और इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई थी। प्रोफेसर ने कहा, “वे यह नहीं बता रहे थे कि मुझे किस विषय पर बोलना चाहिए, और सच कहूँ तो, उन्होंने यह भी नहीं कहा कि मुझे इस विषय पर नहीं बोलना चाहिए।”

शिक्षाविदों ने किया विरोध

इसके बाद शिक्षाविदों ने इस कदम का विरोध किया। अर्थशास्त्री जयंती घोष ने सोशल मीडिया एक्स पर आरोप लगाया कि पुलिस ने जोया हसन को कार्यक्रम में बोलने से रोका और स्कूल प्रशासन को सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम रद्द करने के लिए मजबूर किया गया।

शिक्षाविद अपूर्वानंद ने भी आरोप लगाया कि पुलिस को जोया हसन को छात्रों से मिलने से रोकने के बजाय प्रदर्शनकारियों को रोकना चाहिए था।

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