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रोहतक : गांव में मुसलमानों के टोपी पहनने, दाढ़ी रखने पर प्रतिबंध, खुले में नमाज पर भी रोक

रोहतक के सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट राकेश कुमार ने मीडिया से कहा कि बुधवार (19 सितंबर) की शाम मामला उनकी जानकारी में आया, इसे लेकर जांच की जाएगी। उन्होंने कहा, ''यह असंवैधानिक है। इस संबंध में मैं गांव के सरपंच से बात करूंगा।''

Author September 20, 2018 1:59 PM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Express Archives Photo)

हरियाणा के रोहतक जिले के टिटोली गांव के लोगों ने एक बैठक कर मुसलमानों को लेकर एक मौखिक संकल्प लिया और फरमान सुना दिया। मुसलमानों से कहा गया कि वे हिंदू नाम रखें और खुले में नमाज अता न करें। गांववालों ने कई हिदायतों के साथ उनसे कहा कि वे मुसलमानों की पहचान जाहिर करने वाली चीजें न दिखाएं, जैसे कि सिर पर टोपी न पहनें और लंबी दाढ़ी न रखें। द हिंदू की खबर के मुताबिक जिस वक्त यह बैठक चल रही थी उस वक्त मौके पर टिटोली पुलिस चौकी के आधा दर्जन पुलिसवाले भी मौजूद थे। रिपोर्ट के मुताबिक बीते 22 अगस्त को एक बछड़े की हत्या के आरोप में भीड़ ने गांव के एक मुस्लिम परिवार के घर पर हमला कर दिया था। लोगों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और पंजाब गाय वध निषेध अधिनियम 1955 के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया था। रोहतक के सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट राकेश कुमार ने मीडिया से कहा कि बुधवार (19 सितंबर) की शाम मामला उनकी जानकारी में आया, इसे लेकर जांच की जाएगी। उन्होंने कहा, ”यह असंवैधानिक है। इस संबंध में मैं गांव के सरपंच से बात करूंगा।”

रोहतक तहसील नंबरदार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश नंबरदार बैठक में मौजूद थे, उन्होंने बताया कि बैठक मंगलवार (18 सितंबर) की शाम की गई थी और गांव के सभी जाति-धर्म और समुदायों के लोग वहां मौजूद थे। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों के अलावा यह भी तय किया गया था कि गांव के बीच की एक एकड़ की बक्फ बोर्ड की जमीन पंचायत के द्वारा ले ली जाएगी और मुसलमानों को गांव के बाहर एक प्लाट दिया जाएगा जिसका इस्तेमाल वे कब्रिस्तान के लिए कर सकेंगे। सुरेश ने मीडिया से कहा कि गांव में कई दशकों से हिंदू और मुसलमान सद्भावना से रहते आ रहे थे लेकिन उत्तर प्रदेश के कुछ नए बसने वालों ने गांव की शांति भंग कर दी। बैठक में यह भी फैसला किया गया कि गोहत्या के आरोपी, और अगस्त में घर पर हमला झेलने वाले यामीन को गांव में प्रवेश करने की इजाजत नहीं होगी।

एक स्थानीय मुस्लिम नेता राजबीर ने मीडिया से कहा कि समुदाय ने सद्भावना बनाए रखने के लिए फैसलों को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा, ”खैर, हम बंटवारे के बाद से हिंदू नाम रखते आए हैं और सिर पर टोपी या दाढ़ी नहीं रखते हैं। चूंकि गांव में कोई मस्जिद नहीं है, इसलिए हम शुक्रवार या किसी अन्य अवसर की नमाज अता करने के लिए करीब 8-10 किलोमीटर की यात्रा कर रोहतक शहर जाते हैं। राजबीर ने कहा कि उन्होंने अपने समुदाय की तरफ से गांव में गोशाला के लिए बैठक में 11000 रुपये भी दान किए। मुस्लिम एकता मंच अध्यक्ष शाहजद खान ने फैसले को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए निंदा की और कहा कि स्थानीय लोगों को इसे स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं था।

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