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हिमाचल: पुत्रों के जरिए पिताओं को साधने की कोशिश

कांग्रेस विधायक रामलाल ठाकुर इस बात से नाराज चल रहे थे कि उनके पुत्र विकास ठाकुर को पार्टी में जगह नहीं मिल रही है। राठौर ने उनके पुत्र को भी पार्टी में सचिव के पद पर बिठा दिया और रामलाल खुश हो गए।

Author Published on: April 1, 2019 2:53 AM
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी बुटेल के पुत्र आशीष बुटेल भी विधायक हैं लेकिन पार्टी में उन्हें कोषाध्यक्ष का पद दिया गया।

ओमप्रकाश ठाकुर

लोकसभा चुनावों में हिमाचल प्रदेश की कुल चार सीटों के लिए कांग्रेस के प्रत्याशी जीते या न जीते लेकिन प्रदेश के तमाम बड़े नेताओं ने अपने पुत्रों को पार्टी में जगह जरूर दिला दी है। पर बड़ा सवाल यह है कि ये पुत्र प्रदेश की चारों सीटों को जीत कर अपने पिताओं का सम्मान बरकरार रख भी पाएंगे या नहीं।
पुत्र ही नहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम ने तो अपने पौत्र तक का पार्टी का टिकट दिलवा दिया है, बेशक इसके लिए उन्हें इस उम्र में अपनी निष्ठाएं बदलने के आरोप भी झेलने पड़ रहे हैं। वे भाजपा में थे,अपने पौत्र की खातिर वे कांग्रेस के हो लिए। सुखराम के पुत्र अनिल शर्मा जयराम सरकार में बिजली मंत्री हैं। उन्होंने मंत्रीपद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। भाजपा के लिए वे अब न उगले जाते हैं और न ही निगले जा रहे हैं।

इस बार लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी ने परिवारवाद को जम कर हवा दी। लोकसभा की चार सीटें जीते या न जीते लेकिन इन नेताओं ने अपने पुत्रों के लिए 2022 के विधानसभा चुनावों के लिए लाचिंग पैड का इंतजाम जरूर किया है। चूंकि मामला राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का है तो आलाकमान ने भी कोई न नुकुर नहीं की। फरवरी महीने में आलाकमान ने प्रदेश कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू को पद से हटाकर उनकी जगह पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा के करीबी कुलदीप सिंह राठौर को पार्टी का अध्यक्ष बना दिया। ऐसे में वीरभद्र सिंह समेत पार्टी के बड़े नेताओं को अपने-अपने पुत्रों को पार्टी में जगह दिलाने का मौका मिल गया। पार्टी के बिखरे कुनबे को एक करने के लिए कुलदीप सिंह राठौर ने भी इन पुत्रों को पार्टी में जगह देने में कंजूसी नहीं बरती।

पुत्र महासचिव तो रामलाल खुश: उधर कांग्रेस विधायक रामलाल ठाकुर इस बात से नाराज चल रहे थे कि उनके पुत्र विकास ठाकुर को पार्टी में जगह नहीं मिल रही है। राठौर ने उनके पुत्र को भी पार्टी में सचिव के पद पर बिठा दिया और रामलाल खुश हो गए।

बुटेल के बेटे को भी पद: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी बुटेल के पुत्र आशीष बुटेल भी विधायक हैं लेकिन पार्टी में उन्हें कोषाध्यक्ष का पद दिया गया। पूर्व मंत्री जीएस बाली विधानसभा चुनाव हार गए। वे पार्टी की प्रचार समिति के अध्यक्ष हैं। उनके पुत्र रघुबीर सिंह बाली को भी पार्टी में महासचिव बनाया गया है।

वीरभद्र परिवार में सिर्फ बहू नहीं राजनीति में: कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता वीरभद्र सिंह के परिवार के तीनों सदस्य पार्टी में शामिल हैं। जब पार्टी में विस्तार किया गया था तो इनके परिवार में तीन ही सदस्य थे। वे खुद और उनका पुत्र विकमादित्य सिंह विधानसभा में विधायक है। लेकिन उन्होंने पुत्र विक्रमादित्य सिंह को पार्टी में महासचिव बनवा दिया। वीरभद्र सिंह खुद चुनाव प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष बनाए गए हैं। जबकि उनकी पत्नी व पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह को एक समिति में शामिल किया गया है। विक्रमादित्य की शादी इस विस्तार के बाद हुई। इस परिवार में अब विक्रमादित्य की पत्नी ही बची हैं जो पार्टी में नहीं हैं।

राजेंद्र को इनाम में दिया पुत्र के लिए महासचिव पद: राजेंद्र राणा के पुत्र अभिषेक राणा को भी महासचिव पद दिया गया। उन्हें इस पद पर नवाजने से कुछ अरसा पहले ही युवा कांग्रेस ने महासचिव पद से हटाया था। इस पर राजेंद्र राणा और वीरभद्र सिंह ने प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष मनीष ठाकुर को हटाने की मुहिम छेड़ दी। यह मुहिम तब बंद हुई जब राठौर ने अभिषेक राणा को पार्टी में महासचिव के पद पर जगह दी। पुत्र मोह इतना कि राजेंद्र राणा ने भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के खिलाफ अभिषेक राणा को उतारने के लिए मुहिम चलाई।

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