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द सस्पेंडेड थ्रेड : समय के पार का एक जादुई तिलिस्म

यह कहानी है एक युवा जापानी कवि, एक अंधे वृद्ध चित्रकार की और एक अद्भुत रज्जुनर्तक की। यूको, एक युवा जापानी कवि, सोसेकी, एक वृद्ध चित्रकार जो अंधा हो गया है; स्नो, एक अद्भुत रज्जुनर्तक।

सर्वोत्कृष्ट नाटक रहा इतालवी नाटककार व निर्देशक पीनो दी बुदुओ का नाटक ‘द सस्पेंडेड थ्रेड’

दिल्ली में चल रहे आठवें थिएटर ओलंपिक्स के पहले दो चरणों का सर्वोत्कृष्ट नाटक रहा इतालवी नाटककार व निर्देशक पीनो दी बुदुओ का नाटक ‘द सस्पेंडेड थ्रेड’। दरअसल यह नाटक नहीं, बल्कि जादू था। एक ऐसा तिलिस्म जिसकी गिरफ्त से निकलना दर्शकों के लिए मुश्किल है। मंचन के दौरान लग रहा था कि सामने कोई पेंटिंग बना रहा है, कोई व्यक्ति समय के पार जाकर कोई जादुई या तिलिस्मी कविता लिख रहा है और निस्संदेह वह पेंटर, वह कवि, वह जादूगर, वह व्यक्ति हैं नाटककार और निर्देशक पीनो। सात मार्च को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का अभिमंच प्रेक्षागृह पीनो के तिलिस्म की गिरफ्त में था।

पीनो ने काव्य, प्रेम और मृत्यु को इस कोमलता के साथ मंच पर रचा कि उनके इस नाटक को देखते समय प्रसिद्ध भारतीय रंग निर्देशक रतन थियाम (जो भारतीय रंगमंच के जादूगर हैं) की यह कविता बरबस जेहन में चलने लगी-समय को चौबीस घंटों ने जकड़ रखा है/मुझसे बात करनी है तो चौबीस घंटों के बाहर के समय में तुम आओ/मैं वहीं तुम्हारा इंतजार करूंगा…। पीनो का यह नाटक समय से बाहर की कथा है। यह काव्य, प्रेम, मृत्यु और आकाश से बेहद कोमलता के साथ गिरते हुए मृदु और कोमल हिमकण की कथा है और कलात्मक भिड़ंत है अभिनेत्री नथाली मेंथा (जो पीनो के नाट्य समूह तिएत्रो पोत्लाश से हैं) और जापान की परंपरागत कमिगाता मेई नृत्यशैली की सर्वश्रेष्ठ जापानी कलाकार कीइन योशिमुरा की। निर्देशक पीनो के अनुसार इस नाटक का उद्भव पश्चिमी व पूर्वी संस्कृतियों के मिलन और विशेष रूप से महान जापानी कमिगाता मेई कलाकार कीइन योशिमुरा और स्विट्जरलैंड में जन्मी और फ्रेंच मातृभाषी अपनी दीर्घकालीन पोत्लाश अभिनेत्री नथाली मेंथा के साथ मंच पर उपस्थित तिएत्रो पोत्लाश के बीच मिलन से होता है। दर्शकों के समक्ष ये दो महान अभिनेत्रियां ऐसी कथा प्रस्तुत करती हैं जो ज्ञान, वेशभूषा और भाषाओं को परस्पर गूंथती हुई समय में स्थगित हैं।

हमारे समय की त्रासदी को एक फ्रांसीसी, तनी रस्सी पर चलनेवाले किसी नट या नटी और एक जापानी समुराई के माध्यम से मूर्त रूप दिया गया है जो प्रेम की शक्ति और सत्ता को सामने लाना चाहते हैं चाहे उसका अंत त्रासद ही क्यों न हो। यह कहानी है एक युवा जापानी कवि, एक अंधे वृद्ध चित्रकार की और एक अद्भुत रज्जुनर्तक की। यूको, एक युवा जापानी कवि, सोसेकी, एक वृद्ध चित्रकार जो अंधा हो गया है; स्नो, एक अद्भुत रज्जुनर्तक। नाटक के ये तीन चरित्र हैं जिनके भाग्य एक तनी रस्सी पर करतब दिखानेवाले के उस अभ्यास के प्रतीक के रूप में दो पहाड़ों के बीच फैले, एक महीन धागे से परस्पर बंधे हैं, जिसे कार्यान्वित कर पाना असंभव है। प्रकाश-व्यवस्था से लेकर कलाकारों की देहभाषा और आख्यान (नरेटिव) तक, सब कुछ एक कविता की तरह लग रहा था। निर्देशक पीनो कहते हैं कि मेरा नाटक दुखांत है। जब दो संस्कृतियां मिलती हैं, दो लोग मिलते हैं और दोनों एक-दूसरे में समान रुचि विकसित करते हैं। लेकिन जब भाषा की बाध्यता के चलते दोनों एक-दूसरे के साथ उपयुक्त संचार नहीं कर पाते हैं तब यह एक त्रासदी बन जाती है और यही मैंने अपने नाटक में दिखाने की कोशिश की है। मेरे नाटक में भी दो संस्कृतियां मिलती हैं, लेकिन अंत त्रासद होता है। इस नाटक को एक शब्द में व्याख्यायित करना हो तो वह है- ‘अद्भुत’।

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