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सृजन घोटाला : 25 में से सिर्फ 14 मामलों की एफआईआर दर्ज कर जांच कर रही है सीबीआई

सीबीआई ने सृजन घपले से जुड़े 14 मामलों की एफआईआर दर्ज कर जांच कर रही है। जांच के दस महीने के दौरान एक अमरेंद्र कुमार की ही गिरफ्तारी हो पाई है। अमरेंद्र कुमार राज्य सरकार का कर्मचारी है।

सृजन घोटाले के मामले में सीबीआई जांच कर रही है।

सैकड़ों करोड़ रुपए के सृजन घोटाले में अबतक दर्ज 25 मामलों में से 14 मामले ही सीबीआई अपने हाथ में ले जांच कर रही है। बुधवार को सीबीआई ने दिल्ली में दर्ज चार एफआईआर इसी की कड़ी है। इससे पहले दस एफआईआर बीते साल केंद्रीय जांच एजेंसी ने लिखी थी। जिनमें से चार मामलों में आरोप पत्र भी दाखिल किया है। इन सब का आधार भागलपुर, बांका व सहरसा के पुलिस थानों में दर्ज प्राथमिकी ही है। बाकी मामले यूं ही पड़े है। पुलिस भी सीबीआई के भरोसे बैठी है। सृजन घपले के भागलपुर में 22, बांका में दो और सहरसा में एक मामला पुलिस थानों में दर्ज कराए गए थे। जिनकी जांच स्थानीय पुलिस व आर्थिक अपराध इकाई मिलकर कर रही थी। बाद में 22 अगस्त 17 को जांच का जिम्मा सीबीआई ने राज्य सरकार की सिफारिश और केंद्र के गृह मंत्रालय की इजाजत से संभाला था।

डीएसपी रैंक के एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक सृजन मामले की जो चार एफआईआर बुधवार को सीबीआई ने दिल्ली में दर्ज की है उनका आधार भी भागलपुर के थाना कोतवाली में 22 अगस्त 17 को दर्ज दो प्राथमिकी है। जो कल्याण महकमा और डीआरडीए व इंदिरा आवास बगैरह के 115 करोड़ और 70 करोड़ रुपए से जुड़ी है। जिसमें डिप्टी कलेक्टर रैंक के कल्याण अधिकारी अरुण कुमार समेत बैंक आफ बड़ौदा के वरीय प्रबंधक, सृजन महिला विकास सहयोग समिति की प्रबंधक बगैरह नामजद है। सीबीआई की दर्ज तीसरी एफआईआर सबौर थाना में 23 अगस्त 17 को लिखे मामला से जुड़ी है। जिसमें महिला सृजन के दस अधिकारी व कर्मचारी नामजद आरोपी है।सीबीआई का चौथा मामला भागलपुर डिवीजन के बांका थाना में लिखे मामले से जुड़ा है। यह प्राथमिकी 20 अगस्त 17 को लिखवाई गई थी। इसमें डिप्टी कलेक्टर रैंक की तत्कालीन भूअर्जन अधिकारी जयश्री ठाकुर समेत कई नामजद है। यह 70 करोड़ रुपए के घोटाले का है। जयश्री ठाकुर को बीते साल राज्य सरकार ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया था।

इस तरह सीबीआई ने सृजन घपले से जुड़े 14 मामलों की एफआईआर दर्ज कर जांच कर रही है। मगर जांच के दस महीने गुजर जाने के दौरान गिरफ्तारी केवल एक अमरेंद्र कुमार की ही कर सकी है। यह राज्य सरकार का कर्मचारी है। और भागलपुर समाहरणालय में नाजिर के पद पर कार्यरत था। इससे पहले 18 गिरफ्तारियां पुलिस ने ही की थी। इनमें राज्य सरकार और बैंक के अधिकारी , कर्मचारी और सृजन से जुड़े लोग है। जो जेल में बंद है। कुछ की जमानत हुई है।

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