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आखिर क्यों पिछले 70 सालों से इस शहर में मनाई जा रही है महात्मा गांधी की तेरहवीं

बापू की मौत के बाद देशभर में उनका अस्थि विसर्जन हुआ था। लेकिन ऐसे में एक जगह ऐसी भी है जहां पिछले 70 साल से महात्मा गांधी की तेरहवीं मनाई जा रही है।

महात्मा गांधी, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे ने की। ऐसे में आज बापू की 71वीं पुण्यतिथि है। बापू की मौत के बाद देशभर में उनका अस्थि विसर्जन हुआ था। लेकिन ऐसे में एक जगह ऐसी भी है जहां पिछले 70 साल से महात्मा गांधी की तेरहवीं मनाई जा रही है। दरअसल मध्य प्रदेश में एक परिवार है जो पिछले 70 सालों से बापू की तेरहवीं मनाता है और साथ ही साथ मृत्यु भोज भी आयोजित करता है।

मध्य प्रदेश के इस जगह मनाई जा रही हैं तेरहवीं: दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक बापू की मौत के बाद देशभर में उनका अस्थि विसर्जन हुआ था। ऐसे में तत्कालीन ग्वालियर-जयपुर स्टेट की सीमा पर मध्य प्रदेश के श्योपुर के रामेश्वर में त्रयोदशी के दिन अस्थि विसर्जन किया गया और इसके बाद से लगातार रामेश्वर में त्रयोदशी का आयोजन हो रहा है। जिसमें मृत्यु भोज भी कराया जाता है। ये जिम्मेदारी जिसके परिवार ने उठाई है उनका नाम है ठाकुर उदयभान सिंह चौहान। बता दें कि त्रयोदशी त्रिवेणी संगम के किनारे होता है। वहीं इस बार त्रयोदशी के लिए उदयभान के परिवार के सदस्य पूर्व विधायक सत्यभानु चौहान तैयारी कर रहे हैं।

12 फरवरी को त्रयोदशी का आयोजन: 1948 को चंबल-बनास-सीप नदी के त्रिवेणी संगम में हुए गांधीजी के अस्थि विसर्जन कार्यक्रम में गोकुल भाई भट्ट, हीरालाल, श्रीदास गोयल, वीरेन्द्र सिंह चौहान, ग्वालियर स्टेट के ठाकुर उदयभान चौहान, आदि जैसे कई प्रमुख लोग शामिल हुए थे। 1948 के बाद से हर साल 12 फरवरी को इसका आयोजन किया जाता है। जो श्योपुर का गांधी विचार मंच और महात्मा गांधी सेवा आश्रम श्योपुर करता है। वहीं इसकी मुख्य जिम्मेदारी ठाकुर उदयभान सिंह ने 1981 तक संभाली और इसके बाद सत्यभानु चौहान ने अपने भाई प्रकाशभानु के साथ इस आयोजन का जारी रखा है।

पदयात्रा से त्रिवेणी तक करते थे सफर: सत्यभानु सिंह चौहान बताते हैं कि 1980 तक जिले भर से लोग पदयात्रा करते हुए त्रिवेणी संगम तक पहुंचते थे। ये पदयात्राएं एक फरवरी को शुरू हो जाती थीं। पदयात्रा में शामिल लोग गांव- गांव में त्रयोदशी का आमंतत्र देते हुए निकलते थे। वहीं मृत्यु भोज में सैकड़ों लोगों का भोजन भी आयोजित होता था। बता दें कि श्योपुर के रामेश्वर के साथ साथ गांधी जी की त्रयोदशी ओरछा, बड़वानी, मथुरा में भी आयोजित होती है।

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