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बिहार: सिरदर्द बनी शराबबंदी, 10 सालों के लिए थानेदारी से महरूम हुए 42 पुलिस अधिकारी

10 और 25 जून को अपराध पर काबू व शराबबंदी को कड़ाई से लागू करने के उद्देश्य के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ पुलिस के आलाधिकारियों की हुई बैठक के बाद पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे काफी हरकत में है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

बिहार में शराबबंदी के बाबजूद शराब बिक्री पर रोक न लगा पाने की वजह से 42 इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों को थानेदार न बनाए जाने का आदेश आईजी मद्य निषेध ने शनिवार को जारी किया है। हालांकि पुलिस एसोशिएसन में इसको लेकर अंदरूनी मर्मरी भी है। और जानकार बताते है कि इन लोगों ने इस बाबत आपत्ति भी दर्ज कराई है।

इस बाबत जारी अधिसूचना संख्या 441 दिनांक 6 जुलाई 19 पर एसपी मद्य निषेध अशोक कुमार के दस्तखत है। जिसकी कापी ज़िलों के एसएसपी के साथ रेंज डीआईजी और आईजी को भी भेजी गई है। जिसमें नौ इंस्पेक्टर और 33 सब-इंस्पेक्टरों के नाम के साथ वर्तमान पदस्थापना और जहां वे पहले पदस्थापित थे और दोषी पाए गए वहां का स्थान अंकित है।

इधर 10 और 25 जून को अपराध पर काबू व शराबबंदी को कड़ाई से लागू करने के उद्देश्य के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ पुलिस के आलाधिकारियों की हुई बैठक के बाद पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे काफी हरकत में है। उन्होंने भागलपुर , नौगछिया, बांका, जहानाबाद, कटिहार , किशनगंज और पूर्णिया पहुंच थानों का औचक मुआयना किया है। और कोताही बरतने वाले थानेदार समेत पूरे थाने के पुलिसकर्मियों को बदल दिया। वे थाने के पुलिसियों को सावधान कर रहे है कि अब खैर नहीं है।

भरोसे लायक सूत्रों के मुताबिक अब सरकार ने बिहार के दो प्रमंडल गया और पूर्णिया में भी आईजी जोन का गठन कर आईजी रैंक की पोस्टिंग करने जा रही है। अभी तक बिहार के चार प्रमंडल पटना, मुजफ्फरपुर (तिरहुत), दरभंगा और भागलपुर में ही आईजी बैठते है। फिलहाल गया पटना आईजी और पूर्णिया दरभंगा आईजी के अधीन है। अब दो नए बनाए जाने वाले आईजी जोन के तहत दस ज़िले होंगे। इसके अलावे बिहार में ग्यारह डीआईजी रेंज है। आईजी और डीआईजी सीधे पुलिस महानिदेशक को अपनी रिपोर्ट भेजते है। अब कई डीआईजी रेंज सरकार खत्म करने पर विचार कर रही है। लेकिन पुलिस के सामने अब यह बड़ी चुनौती बन गई है कि अपराध काबू में करें या शराब बिक्री को रोके। पुलिस अपराध काबू पर ध्यान देती है तो शराब तस्कर सक्रिय हो जाते है और शराब व तस्कर पकड़ने में पुलिस अपनी ताकत लगाती है तो अपराध बेकाबू हो जाते है। मसलन पुलिस के सामने सांप छछूंदर वाले हालात पैदा हो गए है।

नतीजतन तेजतर्रार पुलिस अधिकारी इससे बचने के लिए थानेदारी छोड़ने तैयार है। मिसाल के तौर पर पटना का श्रीकृष्णापुरी थाना है। जहां थानेदार की पोस्टिंग लेने के लिए ऊंची पैरवी और ऊंची बोली लगती है। जानकार बताते है कि वहां के थानेदार अंगेश कुमार राय आवेदन देकर पुलिस केंद्र पटना तबादला कर देने का आग्रह किया है। यह अलग बात है कि अपने आवेदन में उन्होंने अपनी निजी दिक्कत बताई हो। पर असलियत कुछ और है। एसएसपी पटना के पत्रांक 2288 दिनांक 5 जुलाई 19 के तबादला सूची में इनका नाम भी है। पुलिस एसोसिएशन इस बात का भी विरोध कर रहा है कि शराब बिक्री रोकने , पीने और न पीने देने का सौगंध पत्र केवल निचले पुलिस अधिकारी ही क्यों भरकर दे ? पुलिस के आलाधिकारी मसलन आईपीएस रैंक के भी इस आशय का शपथ क्यों नहीं भरकर दे? और उन्हें भी ज़िलों में शराब बिक्री के लिए जिम्मेवार ठहराया जाए? ऐसा एसोसिएशन से जुड़े अधिकारी बताते है। जाहिर है बिहार में शराबबंदी पुलिसवालों के लिए सिरदर्द बनी है।

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