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21 महीने से नहीं मिला वेतन तो मजदूरों ने भीख मांगकर किया विरोध, स्मृति ईरानी से कहा- हम तालिबानी या पाकिस्तानी नहीं

अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस को कानपुर में लाल इमली मजदूरों ने काला दिवस के रूप में मनाया। 21 महीने से वेतन नहीं मिलने से नाराज मजदूरों ने कटोरा लेकर भीख मांग कर विरोध प्रदर्शन किया।

भीख मांगकर विरोध करते लाल इमली के मजदूर, फोटो सोर्स- स्थानीय

अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस को कानपुर में लाल इमली मजदूरों ने काला दिवस के रूप में मनाया। 21 महीने से वेतन नहीं मिलने से नाराज मजदूरों ने कटोरा लेकर भीख मांग कर विरोध प्रदर्शन किया। इसके साथ ही लाल इमली मजदूरों ने स्मृति ईरानी से सवाल भी दागा कि यदि आप को 21 महीने वेतन नहीं मिले तो कैसे परिवार का पालन पोषण करेंगी? मजदूरों ने कहा कि हम तालिबानी और पाकिस्तानी नहीं है, हम भी इसी देश के नागरिक है । हमारे साथ ऐसा व्यावहार क्यों हो रहा है। पिछले 5 वर्षों में 41 मजदूरों ने दम तोड़ दिया लेकिन सरकार ने हमारे लिए कुछ नहीं किया।

बदहाल हैं मजदूर: पूरे विश्व में मजदूर दिवस मनाया जा रहा है, वहीं मैनचेस्टर ऑफ़ यूपी के नाम से फेमस कानपुर के मजदूर बदहाली के मंजर से गुजर रहे है। मजदूरों के बच्चों के स्कूल की फीस नहीं जमा हो पा रही है। दो वक्त की रोटी भी मजदूरों को नसीब नहीं हो पा रही है। मजदूर नेता आशीष पांडेय के मुताबिक ब्रिटिश इंडिया कॉर्पोरेशन कपड़ा मिल के आधीन लाल इमली कानपुर की ऊलन मिल है। आशीष ने कहा- ‘लाल इमली के मजदूरों को कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने 21 माह से वेतन नहीं दिया है। आप अंदाजा लगाइए कि 21 महीने से वेतन नहीं मिलने पर मजदूरों की क्या स्थित होगी। परिवार के सदस्य बेटी ,बेटा ,माँ ,बाप कितनी भयानक स्थिति में है।’

कटोरा लेकर भीख मांग रहे मजदूर: आशीष ने आगे कहा- स्मृति ईरानी आप के राज में मजदूर कटोरा लेकर भीख मांग रहे हैं। यही कपड़ा मंत्री पहले गैस का दाम बढ़ने पर सड़क पर बैठ जाती थीं। बेटी पढ़ाओ की बात करते हैं लेकिन स्कूल में बेटियों की फीस नही जमा हो पा रही है। काश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्मृति ईरानी को 21 माह वेतन नहीं मिले।’

पाकिस्तानी और तालीबानी नहीं है हम: आशीष ने आगे कहा- ‘कपड़ा मंत्री जी ये हिंदुस्तानी है तालिबानी और पाकिस्तानी नहीं है । यदि देश का मजदूर खड़ा हो गया तो आप को कुर्सी भी बचाना मुश्किल हो जाएगा । हमारी सरकार से मांग है सरकार 21 माह का वेतन तत्काल देदे। मजदूर आज भी 2006 से तीसरे वेतन मान से वेतन ले रहे है। 2006 से पांचवे वेतन मान से एरियर दें। हम लोग एक बार स्मृति ईरानी के पास गए थे तो उन्होंने कहा कि बहन के घर आए हो भाई आप लोग निराश नही जाओगे । दो साल हो गया अब तो इतने निराश हो गए है कि कटोरा हाथ में आ गया है ।’

प्रशासन का क्या है कहना: इस पूरे मामले पर प्रशासनिक अधिकारी एस के उपाध्याय का कहना है कि मैं अभी बाहर हूँ। मजदूरों को वेतन क्यों नही मिला इसकी जानकारी मुझे नही है ,जीएम इसके विषय मे सही बता पाएंगे। वहीं जब लाल इमली के जीएम मनोज कुमार वर्मा से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ था।

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