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कोरोना: डॉक्टर नहीं हैं तो यहां सरकार ने नीम-हकीमों को दी इलाज की जिम्मेदारी, बेख़ौफ मरीज देख रहे झोलाछाप डाक्टर्स

बताया गया है कि जिले के उपायुक्त ने ही फर्जी डॉक्टरों से इलाज में सहयोग करने की मांग करते हुए उन्हें ऑक्सीमीटर और मेडिकल किट उपलब्ध कराने की बात कही है।

झारखंड के जमताड़ा में कोरोना मरीजों की पहचान और इलाज के लिए प्रशासन नीम-हकीमों की ले रहा मदद। (एक्सप्रेस फोटो)

भारत में कोरोनावायरस की दूसरी लहर का कहर जारी है। चिंता की बात यह है कि इस बार कोरोना के अधिकतर केस शहरों के अलावा गांवों में भी मिल रहे हैं। इसके चलते अधिकतर राज्यों में स्वास्थ्य व्यवस्था बिल्कुल चरमरा गई है। गांवों में तो बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के न होने की वजह से सरकार के हाथ-पांव फूल गए हैं। सुविधा के नाम पर छोटे-मोटे सीएचसी का सहारा ही बचा है। हालांकि, गांवों में डॉक्टर की कमी भी परेशानी का सबब है। झारखंड के एक शहर में प्रशासन ने इस समस्या के बीच कोरोना मरीजों को बचाने के लिए झोलाछाप डॉक्टरों और नीम-हकीमों को ही काम पर लगा दिया है।

यह शहर है झारखंड का जमताड़ा जहां स्वास्थ्य व्यवस्थाएं तार-तार हैं। ऐसे में जामताड़ा के उपायुक्त फैज अक मुमताज ने अपने साथ बैठाकर 40 गैर डिग्रीधारी नीम-हकीमों को गांवों के मरीजों के इलाज में सहयोग करने की बात कही है। इसके चलते 400 से अधिक नीम-हकीम जिले की 118 पंचायतों के गांवों में मरीजों का इलाज खुलेआम करने भी लगे हैं। हालांकि, जानकारी की कमी के चलते ऐसे फर्जी डॉक्टर मरीजों की जान के लिए भयंकर खतरा साबित हो सकते हैं।

बताया गया है कि डीसी मुमताज ने फर्जी डॉक्टरों से इलाज में सहयोग करने की मांग करते हुए उन्हें ऑक्सीमीटर और मेडिकल किट उपलब्ध कराने की बात कही है। इन्हें गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार देने और मास्क बदल-बदलकर पहनने और सोशल डिस्टेंसिग का पालन करने के लिए प्रेरित करने को भी कहा गया है।

लोगों को दे रहे टीका लगाने की सलाह, पर खुद ही नहीं लिया: आलम यह है कि नीम-हकीम अब गांव-गांव घूम कर इलाज कर रहे हैं और सभी मरीजों को एक जैसी ही दवाएं देकर बस वैक्सीन लगाने की बात कह रहे हैं। इनमें से किसी के पास भी न तो डिग्री है और न ही प्रैक्टिस का लाइसेंस। इसके बावजूद कभी छुप कर लोगों का इलाज करने वाले ये झोलाछाप डॉक्टर अब खुलेआम इलाज के लिए निकल पड़े हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि लोगों से टीका लेने की बात कहने वाले इनमें से कई झोलाछापों ने खुद ही वैक्सीन नहीं लगवाई है।

दूसरी तरफ जिले के सिविल सर्जन का कहना है कि गांवों में इलाज करने वाले ऐसे नीम-हकीम देहात के लोगों से जुड़े होते हैं। इसीलिए उनका सहयोग लिया जा रहा है। ये सभी वैक्सिनेशन के लिए ग्रामीणों को जागरुक कर रहे हैं। इन्हें मरीजों को देखने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर भी मुहैया कराया जा रहा है।

राजस्थानः कहीं हवन-पूजन कर रहे लोग, तो कहीं महामृत्युंजय जाप का हो रहा प्रसारण: दूसरी तरफ राजस्थान में भी कोरोना का गांव पर बुरी तरह असर पड़ रहा है। सीएम अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर में तो पांच गांवो में 28 दिन के अंदर 52 लोगों की जान जा चुकी है। अब लोगों का शासन-प्रशासन तक से भरोसा उठ चुका है। उधर पाली के सांसद पीपी चौधरी के गांव में तो दिन भर हवन-पूजन हो रहा है। साथ ही एक अन्य गांव में महामृत्युंजय जाप का घर-घर में सीधा प्रसारण हो रहा है।

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