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पत्नी का मर्डर कर बोला- वॉट्सऐप और फेसबुक की थी लत, मेरा और बच्चों का नहीं रखती थी ध्यान

गुरुग्राम में रहने वाले हरिओम ने पूछताछ में बताया कि उसकी पत्‍नी लक्ष्‍मी फेसबुक और वॉट्सऐप की लत के कारण उसे और बच्‍चों को नजरअंदाज करने लगी थी। उसने दावा किया कि लक्ष्‍मी ने घर का कामकाज करना भी छोड़ दिया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्‍या का केस दर्ज किया है।

पत्‍नी की हत्‍या करने वाले आरोपी पति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। (प्रतीकात्‍मक फोटो)

दुनिया भर में करोड़ों लोग फेसबुक और वॉट्सऐप का इस्‍तेमाल करते हैं। भारत में भी ऐसे लोगों की तादाद बहुत ज्‍यादा है। लाखों लोग इसके लती भी हैं। फेसबुक और वॉट्सएप की लत से जुड़ी दिल दहलाने वाली एक घटना सामने आई है। गुरुग्राम में एक व्‍यक्ति ने पत्‍नी की सिर्फ इसलिए हत्‍या कर दी कि वह सोशल नेटवर्किंग साइटों के इस्‍तेमाल में इस कदर व्‍यस्‍त रहती थी कि उसका और बच्‍चों का तनिक भी ध्‍यान नहीं रखती थी। ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ के अनुसार, पुलिस ने आरोपी हरिओम को गिरफ्तार कर लिया है। उसने अपनी पत्‍नी लक्ष्‍मी की गुरुवार (12 अप्रैल) रात में गला दबाकर हत्‍या कर दी थी। लक्ष्‍मी उस वक्‍त गहरी नींद में थीं। पुलिस ने अगले ही दिन हरिओम को दबोच लिया था। पूछताछ में उसने बताया कि लक्ष्‍मी घंटों तक मोबाइल फोन पर व्‍यस्‍त रहती थी और सोशल साइट्स पर लोगों से बात करती रहती थी। हरिओम ने बताया कि पत्‍नी द्वारा नजरअंदाज करने से वह बेहद तंग आ गया था। उसने दावा किया कि लक्ष्‍मी बच्‍चों को भी नजरअंदाज करने लगी थी और एक मां और पत्‍नी के तौर पर अपने दायित्‍वों को भी ठीक से नहीं निभा रही थी।

शव के बगल में बैठा मिला था हरिओम: आरोपी हरिओम गुरुग्राम के सेक्‍टर 32 में रहता है। उसने 12 अप्रैल की रात को हत्‍या की घटना को अंजाम दिया था। अगले दिन सुबह को जब लक्ष्‍मी के पिता बलवंत सिंह वहां पहुंचे तो हरिओम बेड पर लक्ष्‍मी के शव के बगल में बैठा मिला था। बलवंत सिंह ने इसके बाद पुलिस को मामले की जानकारी दी थी। हरिओम आईएमटी-मानेसर में कंप्‍यूटर रिपेयर की दुकान चलाता है। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उसे जेल भेज दिया गया था।

बारह साल पहले हुई थी शादी: हरिओम ने बताया कि लक्ष्‍मी से उसकी शादी वर्ष 2006 में हुई थी। उसके दो बच्‍चे भी हैं। उसने पूछताछ में बताया, ‘शादी के कुछ वर्षों तक सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा था। मैंने उसे एक स्‍मार्टफोन खरीदकर दिया था। फोन के कारण पिछले दो वर्षों में वह धीरे-धीरे बदल गई थी। उसने मुझे और बच्‍चों को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया था। ऐसा लगने लगा था कि मैं और बच्‍चे उसके लिए अस्तित्‍वहीन हो चुके हैं। वह खाना भी नहीं बनाती थी और घर का कामकाज भी नहीं करती थी। वह न तो बच्‍चों को स्‍कूल ले जाती थी और नहीं होमवर्क कराने में उनकी मदद ही करती थी। वह रात-दिन फेसबुक और वॉट्सऐप पर ही लगी रहती थी। शुरुआत में मैंने इन सब बातों को नजरअंदाज किया था। मुझे लगा कि कुछ दिनों में उसका मन भर जाएगा। लेकिन, स्थिति बिगड़ती ही चली गई। हर दिन झगड़े होने लगे थे, जिससे बच्‍चे भी दबाव में रहने लगे थे। इसके कारण बच्‍चों को कुरुक्षेत्र के बोर्डिंग स्‍कूल में भेजना पड़ा था।’ लक्ष्‍मी के पिता की शिकायत पर हरिओम के खिलाफ हत्‍या का मामला दर्ज किया गया है।

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