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गुजरात चुनाव: मुसलमान वोटरों के लिए चिंता का सबब बना ईवीएम!

मुस्लिम मतदाता ईवीएम को डेविल या शैतान मानने लगे हैं।

इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए दूसरे चरण का मतदान कुछ दिनों बाद ही होना है। ऐसे में मुस्लिम समुदाय में नई चिंता घर कर गई है। मुस्लिम मतदाता ईवीएम को लेकर फिक्रमंद हैं। वे लोग इसे डेविल या शैतान मानने लगे हैं। दूसरे चरण के चुनाव से पहले समुदाय के बीच ईवीएम चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ईवीएम को लेकर तमाम चिंताओं के बावजूद वे 14 दिसंबर को मतदान करेंगे। पहले चरण का मतदान हो चुका है। हालांकि, हिंदू समुदाय इसको लेकर ज्यादा चिंतित नहीं है।

सोशल मीडिया में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की बातें जोर-शोर से चल रही हैं। ऐसे में मुस्लिम समुदाय को लगता है कि उनके द्वारा डाला गया वोट कहीं दूसरे उम्मीदवार के पक्ष में न चला जाए। सीमावर्ती जिले छोटा उदयपुर के ऐसे ही एक मतदाता सैय्यद माला कहते हैं कि हमारे पास सिर्फ मत डालने का ही अधिकार है, ऐसे में यदि कोई इसे बदलता है तो लोकतंत्र में हमारे लिए क्या बच जाएगा? वह स्पष्ट शब्दों में कहते हैं कि उन्हें ईवीएम पर तनिक भी भरोसा नहीं है। इसके बजाय बैलेट पेपर ज्यादा विश्वसनीय विकल्प है। जिले भर के मुस्लिम समुदाय के बीच यह चिंता का विषय बना हुआ है। फेसबुक और व्हाट्सएप से जुड़े शिक्षित मतदाता इसको लेकर ज्यादा फिक्रमंद हैं। कॉलेज छात्र सुल्तान हुसैन कहते हैं, ‘मैं जानता हूं कि मैं किसे वोट डालूंगा। लेकिन, मैं इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हूं कि मेरा वोट उसी को जाएगा जिसके पक्ष में मैं दूंगा। बैलट पेपर पर वोट डालने से उसे बदला नहीं जा सकता है।’ जिले के कई मतदाता वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) को अमल में लाने से भी संतुष्ट नहीं दिखते हैं। छोटा उदयपुर में तीन विधानसभा क्षेत्र आते हैं।

छोटा उदयपुर के तिमला गांव के फारूक सईद तो ईवीएम की तुलना ‘शैतान’ से करते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ के कई वीडियो आ चुके हैं, लिहाजा मेरे वोट को भी बदला जा सकता है। हालांकि, हिंदू समुदाय में इसको लेकर ज्यादा चिंता नहीं दिखती है। मोबाइल की दुकान चलाने वाले नरेंद्र सिंह बारी का कहना है कि हमें ईवीएम पर भरोसा करना चाहिए।

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