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भावनगर जिला पंचायत में कांग्रेस से सत्‍ता छिनी, दो सदस्‍य बीजेपी में गए, तीसरा आया ही नहीं

गुजरात की भावनगर जिला पंचायत सीट कांग्रेस के हाथ से फिसल गई है। कांग्रेस के दो सदस्य पाला बदलते हुए बीजेपी में शामिल हो गए, जबकि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस के एक सदस्य ने हिस्सा ही नहीं लिया। इस तरह से भावनगर सीट पर भी राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा का कब्जा हो गया है।

प्रतीकात्मक फोटो।

भाजपा को गुजरात में बड़ी राजनीतिक सफलता हासिल हुई है। स्थानीय निकाय चुनावों में भावनगर जिला पंचायत भाजपा के हाथ से निकल गई थी। यह सीट कांग्रेस के खाते में गई थी। यह सीट अब भाजपा के खाते में चली गई है। यह उपचुनाव से नहीं, बल्कि कांग्रेसी सदस्यों के पाला बदलने से संभव हुआ है। दरअसल, जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होना था। कांग्रेस के दो सदस्यों ने पाला बदल लिया, जबकि एक सदस्य ने वोटिंग में हिस्सा ही नहीं लिया। इस तरह भावनगर जिला पंचायत सीट पर एक बार फिर से भाजपा का कब्जा हो गया है। वर्ष 2015 के स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस ने भावनगर सीट पर जीत हासिल की थी। वहीं, राजकोट जिला पंचायत में भी बदलाव हुआ है। कांग्रेस की अल्पा खटेरिया को नया अध्यक्ष चुना गया है। निलेश विरानी ने इस पद पर ढाई साल तक रहने के बाद पद छोड़ा था। इसके बाद सत्ता में साझेदारी के करार के तहत राजकोट जिला पंचायत के अध्यक्ष का पद कांग्रेस के पास गया है।

साल के शुरुआत में गुजरात में नगर निकाय के चुनाव हुए थे। सत्तारूढ़ बीजेपी ने कुल 75 में से 47 सीटों पर कब्जा किया था। वहीं, कांग्रेस के खाते में 16 सीटें गई थीं। छह सीटों पर किसी को भी बहुमत प्राप्त नहीं हुआ था, जबकि छह अन्य सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। बता दें कि इसमें नगर निगम, नगर पालिका, जिला पंचायत और तालुका पंचायतों के लिए चुनाव कराए गए थे। वर्ष 2013 में बीजेपी ने 79 नगर निकायों में 59 पर जीत दर्ज की थी। उस वक्‍त कांग्रेस को 11 सीटें मिली थीं, लेकिन बाद में वह उनमें से पांच सीटें विपक्षी पार्टी के हाथ से निकल गई थी। कांग्रेस के जीते हुए प्रत्याशी भाजपा में जा मिले थे। इससे ठीक पहले दिसंबर 2017 में विधानसभा के चुनाव हुए थे, जिसमें भाजपा ने लगातार छठवीं बार राज्य की सत्ता में वापसी की थी। हालांकि, बीजेपी को सौ से भी कम सीटें (99) प्राप्त हुई थीं। पूरा विपक्ष एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, इसके बावजूद पार्टी ने जीत हासिल की थी। विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस दोनों की साख दांव पर लगी थी, लेकिन भाजपा सत्ता में वापसी करने में सफल रही थी।

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