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वीडियो: नीतीश के गृह जिले की दर्दनाक तस्वीर, एम्बुलेंस नहीं मिला तो ठेले पर लाद शव ले जाने को मजबूर रिश्तेदार

बिहार में कोरोना के बीच 102 एंबुलेंस सेवाओं से जुड़े कर्मियों ने स्टाफ के साथ पुलिसिया बदसलूकी के खिलाफ हड़ताल बुलाई है।

बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के बद्तर हालात के बीच एंबुलेंस कर्मियों ने भी हड़ताल बुला ली है। (वीडियो स्क्रीनग्रैब)

बिहार में कोरोनावायरस के बीच स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव की बात किसी से छिपी नहीं है। नीतीश सरकार अब तक स्थितियों को नियंत्रण में बताती आई है। हालांकि, अस्पतालों में मरीजों को एडमिट न किए जाने से लेकर क्वारैंटाइन सेंटर में आधारभूत सेवाएं मुहैया न होने का मुद्दा अब तक सामने आ चुका है। इस बीच खुद सीएम नीतीश कुमार के गृह नगर नालंदा में एंबुलेंस कर्मियों ने हड़ताल कर रखी है। कोरोना जैसे आपात समय में एंबुलेंस सेवा से जुड़े लोगों के कामबंदी से पहले से ही चरमराई राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था अब और समस्याग्रस्त दिख रही है। यहां शुक्रवार को एक मृत महिला के शव को अस्पताल से घर तक पहुंचाने के लिए परिजनों को लाश ठेले पर रखकर ले जाना पड़ी।

मामला बिहार शरीफ के दीपनगर पुलिस थाने के करीब स्थित जुरापुर गांव का है। महिला के परिजनों का कहना है कि उन्हें एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल की वजह से शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस सेवा नहीं मिली। इसके चलते वे शव को ठेले पर रखकर गांव ले गए। मृतका के रिश्तेदारों ने बताया कि उसकी मौत तीन पड़ोसियों द्वारा मारपीट किए जाने के बाद हुई। महिला अपने घर के पास शराब बेचे जाने का विरोध कर रही थी। इसी पर कहासुनी के बाद गांव के कैलू पासवान, भासो पासवान और राहुल पासवान ने महिला को बुरी तरह पीट-पीटकर मार दिया। उसका शव बाद में बिहार शरीफ के सदर हॉस्पिटल पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया।

कोरोना के बीच क्यों हड़ताल पर हैं एंबुलेंस कर्मी?
बिहार के हसनपुर में हाल ही में कुछ पुलिसकर्मियों ने दो एंबुलेसकर्मियों के साथ मारपीट की थी। इसके बाद 102 एंबुलेंस एसोसिएशन ने विरोध में हड़ताल का ऐलान कर दिया। एंबुलेंसकर्मियों का कहना है कि उन्होंने स्टाफ के साथ बदसलूकी की शिकायतें भी कीं। इसके बावजूद दोषी पुलिसकर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। एसोसिएशन ने चेतावनी दी थी कि अगर पुलिसवालों पर केस दर्ज नहीं हुआ, तो यह हड़ताल जारी रहेगी। हालांकि, इस मुद्दे पर अब तक न तो नीतीश सरकार और न ही स्थानीय प्रशासन की तरफ से कोई कदम उठाया गया है।

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