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कोरोना काल में भागलपुर-शिवनारायणपुर रेलखंड पर बिजली से चली पहली ट्रेन, रेलवे ने कहा- 20 करोड़ रुपए से ज्यादा की होगी सालाना बचत

रेलवे मंत्रालय के जारी विज्ञप्ति के मुताबिक इससे रेलवे को डीजल पर खर्च होने वाले सालाना बीस करोड़ 4 (20.4) रुपए की बचत होगी। रेलवे ने मंगलवार को इस आशय का ट्वीट भी किया है। इस तरह ब्रह्मपुत्र मेल नार्थ फ्रंटियर रेलवे की बिजली चालित पहली ट्रेन बनी है।

विद्युतीकरण के बाद कहलगांव स्टेशन से गुजरती मालगाड़ी ।

कोरोना काल के दौरान रेलवे ने भागलपुर-शिवनारायणपुर करीब 40 किलोमीटर रेलखंड का विद्युतीकरण कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इससे 05956-05955 दिल्ली डिब्रूगढ़ ब्रह्मपुत्र मेल ट्रेन (विशेष ट्रेन) अब दिल्ली से सीधे न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन तक भाया भागलपुर बिजली चालित इंजन से जाएगी। जो दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन तक ही बिजली चालित इंजन से चलती थी। इसके बाद आगे की यात्रा डीजल वाले इंजन के जरिए पूरी होती थी। इससे 20 करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत होगी।

रेलवे मंत्रालय के जारी विज्ञप्ति के मुताबिक इससे रेलवे को डीजल पर खर्च होने वाले सालाना बीस करोड़ 4 (20.4) रुपए की बचत होगी। रेलवे ने मंगलवार को इस आशय का ट्वीट भी किया है। इस तरह ब्रह्मपुत्र मेल नार्थ फ्रंटियर रेलवे की बिजली चालित पहली ट्रेन बनी है।

इसके अलावे सामान्य हालत होने के बाद मालदा रेल डिवीजन की पांच ट्रेनें भाया भागलपुर-क्युल बिजली चालित इंजन से चलाई जाएगी। जो अबतक डीजल इंजन से चलाई जा रही थी। मालदा रेलवे मंडल के डीआरएम यतेंद्र कुमार बताते है कि ये ट्रेनें – 13429-13430 मालदा-आनंदविहार, 14003-14004 मालदा-नईदिल्ली, 13071-13072 हावड़ा-जमालपुर, 13409-13410 मालदा-जमालपुर और 13403-13404 भागलपुर-रांची है। इन ट्रेनों के बिजली से चलने से सालाना करोड़ों रुपए की बचत होगी।

डीआरएम ने बताया कि विद्युतीकरण का काम पूरा होने के बाद इसी महीने 3 तारीख को पूर्व रेलवे के रेल सुंरक्षा आयुक्त मो.लतीफ खान ने मुआयना कर ट्रायल करने की अनुमति दी थी। इसके बाद मालगाड़ी चलाकर सफल ट्रायल किया गया। अब यात्री ट्रेनों को चलाने की अनुमति मिल गई है। फिलहाल विशेष ट्रेन के तौर पर चल रही दिल्ली-डिब्रूगढ़ मेल इस रेल खंड की पहली ट्रेन है।

डीआरएम कुमार ने बताया कि विद्युतीकरण होने से मालगाड़ी की आवाजाही और ढोने की क्षमता भी बढ़ी है। इस ओर व्यापारियों को आकर्षित करने और 2024 तक माल लदान व ढुलाई का लक्ष्य दोगुना करने के वास्ते एक कमेटी का गठन किया गया है। जिसके समन्वयक (कॉर्डिनेटर) वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक बनाए गए है। इनके अलावे मंडल वाणिज्य वरीय प्रबंधक, वित्त वरीय प्रबंधक, यांत्रिक वरिष्ठ प्रबंधक समिति के सदस्य है।

उन्होंने बताया कि गठित कमेटी पारंपरिक वस्तुओं कोयला, पत्थर, गिट्टी, सीमेंट, एनटीपीसी जैसे कारखानों से निकली राख (फ्लाई ऐश) के साथ-साथ गैर परंपरागत थोक वस्तुओं के लदान के लिए व्यापारियों से संपर्क कर प्रेरित करेगी। गैरपरंपरागत का मतलब पार्सल व स्थानीय उत्पादों के लदान से है। विद्युतीकरण के बाद रेलवे की कमाई में इजाफा होने की उम्मीद उन्होंने जताया है।

डीआरएम कुमार बताते है कि कोरोना काल में रेलवे को भारी नुकसान हुआ है। मालदा रेलवे डिवीजन भी इससे अछूता नहीं है। 20-30 फीसदी कमाई की क्षति मंडल को हुई है। जिसकी भरपाई विद्युतीकरण होने के बाद अब करने की कोशिश की जाएगी। पार्सल लदान के लिए हावड़ा-जमालपुर मालगाड़ी का परिचालन फिर से शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।

 

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