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आइआइटी परिसरों में बेहतर हुई समानता की इंजीनियरिंग, देश की सभी 23 आइआइटी में हुए 16.32 फीसद एडमिशन

आइआइटी के अलावा 31 एनआइटी, 23 आइआइआइटी और 23 अन्य सरकारी वित्त पोषित तकनीकी संस्थानों (जीएफटीआइ) में सीट आबंटित करने वाला संयुक्त सीट आबंटन प्राधिकरण (जोसा) के मुताबिक सातवें चरण की काउंसलिंग तक आइआइटी में मौजूद 11279 में से 11942 सीटें भर चुकी हैं जिनमें से 10101 सीटों पर लड़कों को प्रवेश मिला है।

Author July 20, 2018 6:33 AM
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आइआइटी)।

देश की सभी 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटी) में सातवें चरण की काउंसलिंग के बाद दाखिला लेने वाली छात्राओं की संख्या 1841 तक पहुंच गई है, जो कुल सीटों का 16.32 फीसद है। केंद्र सरकार ने इस साल सभी आइआइटी में 14 फीसद छात्राओं के दाखिला का लक्ष्य रखा था। साल 2017 में 995 छात्राओं को प्रवेश मिला था और यह कुल सीटों का 9.10 फीसद था।

आइआइटी के अलावा 31 एनआइटी, 23 आइआइआइटी और 23 अन्य सरकारी वित्त पोषित तकनीकी संस्थानों (जीएफटीआइ) में सीट आबंटित करने वाला संयुक्त सीट आबंटन प्राधिकरण (जोसा) के मुताबिक सातवें चरण की काउंसलिंग तक आइआइटी में मौजूद 11279 में से 11942 सीटें भर चुकी हैं जिनमें से 10101 सीटों पर लड़कों को प्रवेश मिला है। गौरतलब है कि जोसा की ओर से जारी सीट आबंटन कार्यक्रम के मुताबिक यह अंतिम चरण की काउंसलिंग है। मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय ने इस साल छात्राओं के लिए अलग से सीटें देने के लिए कहा था ताकि हर परिसर में कुल छात्राओं की संख्या 14 फीसद तक पहुंच जाए।

कुल मिलाकर इस साल छात्राओं के लिए 779 सीटों की बढ़ोतरी की गई थी। इसमें सबसे अधिक 113 सीटें आइआइटी खड़गपुर को मिली थीं। इसके अलावा आइआइटी धनबाद को 95 सीटें, आइआइटी कानपुर को 79 सीटें, आइआइटी बीएचयू को 76 सीटें, आइआइटी रुड़की को 68 सीटें, आइआइटी दिल्ली को 59 सीटें, आइआइटी बांबे को 58 सीटें और आइआइटी गुवाहाटी को 57 सीटें मिली थीं। ये स्वीकृत सीटों की संख्या से अलग हैं जिससे किसी योग्य लड़के का प्रवेश नहीं रुकेगा। एचआरडी की साल 2026 तक सभी आइआइटी परिसरों में छात्राओं की संख्या को 20 फीसद तक पहुंचना है।

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