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नवजोत सिंह सिद्धू के मंत्रालय में थीं 1144 करोड़ के लुधियाना सिटी सेंटर घोटाले वाली फाइलें, अब गायब

कैप्टन अमरिंदर ने 6 जून को सिद्धू को उनके मौजूदा मंत्रालय से हटाकर उन्हें बिजली व नवीकरणीय ऊर्जा विभाग का प्रभार सौंप दिया था। इस फेरबदल के एक महीने बाद तक भी सिद्धू ने मंत्रालय का पदभार नहीं संभाला था।

Author नई दिल्ली | July 20, 2019 2:24 PM
नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

पंजाब सरकार में मंत्री रहे नवजोत सिंह सिद्धू के मंत्रालय से कई महत्वपूर्ण फाइलें गायब हो गई हैं। इसमें 1144 करोड़ रुपये से निर्मित लुधियाना सिटी सेंटर से जुड़े घोटाले की फाइलें भी शामिल हैं। सिद्धू के पास पहले स्थानीय निकाय, पर्यटन व संस्कृति मंत्रालय का प्रभार था।

जो फाइलें गायब हुई हैं उनमें लुधियाना में कृषि भूमि पर अनधिकृत निर्माण से संबंधित फाइलें भी शामिल हैं। इस संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जो फाइलें गायब हुई हैं उन्हें खोजने के प्रयास जारी हैं। इस मामले में नवजोत सिंह सिद्धू से भी संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है।

वहीं, नवजोत सिद्ध के बाद स्थानीय निकाय विभाग के प्रभार संभालने वाले मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा ने इस मामले की विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं। इससे पहले विजिलेंस ब्यूरो ने लुधियाना के सिटी सेंटर घोटाले में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंद सिंह, उनके बेटे रणइंदर सिंह समेत अन्य लोगों को क्लीन चिट दे दी थी।

कैप्टन अमरिंदर ने 6 जून को सिद्धू को उनके मौजूदा मंत्रालय से हटाकर उन्हें बिजली व नवीकरणीय ऊर्जा विभाग का प्रभार सौंप दिया था। इस फेरबदल के एक महीने बाद तक भी सिद्धू ने मंत्रालय का पदभार नहीं संभाला था। इसके बाद सिद्धू ने 14 जुलाई को पंजाब मंत्रिमंडल से अपना इस्तीफा सौंप दिया।

सिद्धू ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भेजा था। इसके बाद यह सवाल उठे थे कि सिद्धू जब पंजाब सरकार में मंत्री हैं तो उन्होंने अपना इस्तीफा सीएम अमरिंदर सिंह को नहीं भेजकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को क्यों भेजा। इसके बाद सिद्धू ने 15 जुलाई को मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को भी अपना इस्तीफा भेजा।

कैप्टन ने 20 जुलाई को सिद्धू का इस्तीफा मंजूर कर राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर को भेज दिया। बताया जा रहा था कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कैप्टन और सिद्धू के बीच सुलह का प्रयास किया था लेकिन दोनों नेताओं में कोई भी झुकने को तैयार नहीं हुआ। सिद्धू फिर से कैबिनेट में स्थानीय निकाय विभाग चाहते थे।

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