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जन्मदिवस विशेष : 5 ऐसे फैसले, जिन्होंने वाजपेयी जी को ‘अटल’ बना दिया…

आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 94वां जन्मदिवस है। इस मौके पर हम उनके ऐसे फैसलों का जिक्र कर रहे हैं, जिन्होंने देश की दिशा ही बदल दी।

अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो)

आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 94वां जन्मदिवस है। इस मौके पर हम उनके ऐसे फैसलों का जिक्र कर रहे हैं, जिन्होंने देश की दिशा ही बदल दी। दरअसल, देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने कुछ ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने उनके नाम को सार्थक कर दिया।

पोकरण में परमाणु परीक्षण : 1998 में बीजेपी की गठबंधन वाली सरकार बने महज 3 महीने हुए थे। उस दौरान अटलजी ने परमाणु परीक्षण करने का फैसला किया। अमेरिका उस वक्त पूरी तरह इसके खिलाफ था। उसकी खुफिया एजेंसी सैटेलाइट से भारत पर नजर रखे हुए थीं। यहां तक कि पाकिस्तान भी इसकी जासूसी कर रहा था। अटलजी ने पूरी तरह दोनों को चकमा देते हुए 11 और 13 मई 1998 को पोकरण में परमाणु परीक्षण किए, जो सफल रहे। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति क्लिंटन को लिखा, ‘‘परमाणु हथियारों का इस्तेमाल उस देश के खिलाफ कभी नहीं होगा, जो भारत के प्रति बुरी भावना नहीं रखता है।’’

चांद पर पहली बार पहुंचा भारत : भारत का पहला चंद्रमिशन 22 अक्टूबर 2008 को लॉन्च किया गया था, लेकिन इसकी नींव 15 अगस्त 2003 को रखी गई थी। उस दिन अटल जी ने देश के पहले चंद्रमिशन ‘चंद्रयान-1’ की घोषणा की। इसका काम चंद्रमा की परिक्रमा करके जानकारियां जुटाना था। इस यान ने चांद पर पानी खोजा, जो इसरो की सबसे बड़ी सफलता मानी गई।

करगिल में दुश्मन को चटाई धूल : 1999 में पाकिस्तानी सेना और आतंकियों की संयुक्त टीमें सीमा लांघकर कश्मीर में घुस गई थीं। अटलजी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को फोन करके समझाया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद करगिल युद्ध शुरू हो गया। भारत में मांग उठी कि सेना को सीमा लांघकर पाकिस्तान पर हमला कर देना चाहिए। इसके बावजूद अटलजी ने संयम रखा। उन्होंने घुसपैठियों को खदेड़ना शुरू किया। आखिर में पाकिस्तानी सेना को हथियार डालने पड़े।

निर्दोषों को बचाने के लिए खूंखार आतंकी छोड़े, सारे इल्जाम अपने सिर लिए: 24 दिसंबर 1999 को कुछ आतंकी भारतीय विमान हाईजैक करके कंधार ले गए। इस विमान में 176 यात्री और 15 क्रू मेंबर्स थे। आतंकियों की मांग थी कि जैश सरगना मौलाना अजहर मसूद समेत तीन आतंकियों को रिहा किया जाए। अटलजी ने उनकी बात मान ली। इसके लिए उन पर तीखे हमले हुए। उन्होंने विनम्रता से सारे इल्जाम अपने सिर ले लिए।

 

बाबरी विध्वंस से खुद को अलग रखा: गुजरात दंगों के दौरान तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में साथ बैठाया। इस दौरान अटलजी ने कहा- मोदी राजधर्म निभाएं। यह बयान इसलिए अहम था, क्योंकि दंगों के दौरान सरकार की भूमिका सवालों में थी। वहीं, जब भाजपा अयोध्या में बाबरी विध्वंस का जश्न मना रही थी तो अटलजी ने इससे अलग रहे। इस दौरान उन्होंने अपनी पार्टी के समर्थन में कोई बयान भी नहीं दिया।

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