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बंगाल की राजनीति में सुवेंदु अधिकारी को लेकर क्यों मचा है बवाल, जानें TMC और BJP के लिए क्यों महत्वपूर्ण अधिकारी फैमिली

कई लोगों का मानना है कि सुवेन्दु अधिकारी की लोकप्रियता और संगठनात्मक क्षमता इतनी है कि वह पश्चिम बंगाल विधानसभा की 110 से अधिक सीटों पर परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।

Author Edited By Anil Kumar कोलकाता | Updated: December 3, 2020 10:02 AM
west bengal, west bengal election, bengal Assembly election, suvendu adhikari, adhikari familyटीएमसी नेता सुवेंदु अधिकारी। (एक्सप्रेस फोटोः पार्था पॉल)

अत्री मित्रा: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों सुवेंदु अधिकारी को लेकर बवाल मचा हुए है। राज्य में अगले साल की शुरुआत में चुनाव के बीच ममता के करीबी रहे सुवेंदु के इस्तीफे के बाद से उन्हें मनाने का दौर जारी है।

इस क्रम में बागी तृणमूल कांग्रेस नेता सुवेन्दु अधिकारी ने मंगलवार (1 दिसंबर) शाम को पार्टी के लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर से मुलाकात की थी। इसके बाद टीएमसी ने कहा कि सुवेंदु की शिकायतों का समाधान कर दिया गया है। जबकि सुवेंदु ने खुद संकट पर अपनी तरह से कुछ नहीं कहा है। ऐसा लगता है कि उनके टीएमसी में कम से कम समय तक बने रहने की संभावना है।

सुवेंदु पार्टी के लिए इतने महत्वपूर्ण हैं कि पार्टी उन्हें मनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाह रही है। वास्तव में पूरा अधिकारी परिवार ही राजनीतिक रूप से ताकतवर माना जाता है। कई लोगों का मानना है कि सुवेन्दु अधिकारी की लोकप्रियता और संगठनात्मक क्षमता इतनी है कि वह पश्चिम बंगाल विधानसभा की 110 से अधिक सीटों पर परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।

जैसे ही कोई पश्चिम बंगाल में पुर्बा मेदिनीपुर जिले के कोलाघाट में रूपनारायण नदी पर एक पुल को पार करता है, यह महसूस करने में देर नहीं लगती है कि उसने अधिकारियों के गढ़ में प्रवेश कर लिया है। पिछले दो दशकों से अधिकारी परिवार का जिले की राजनीति में दबदबा है।

अधिकारी परिवार के सदस्य लगातार यहां से लोकसभा और विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करते रहे हैं। इसके साथ ही टीएमसी के लिए एक ठोस जमीन तैयार की है। अधिकारी परिवार के संरक्षक 79 वर्षीय शिशिर अधिकारी तीसरी बार लोकसभा सांसद चुने गए हैं। कांग्रेस से शुरुआत के बाद वह 1998 में टीएमसी की स्थापना के समय से ही पार्टी के साथ हैं।

शिशिर अधीर ने पहली बार 1982 में कांठी दक्षिण सीट से कांग्रेस के विधायक के रूप में पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रवेश किया। वह  2001 में उसी सीट से बने। साल  2006 में एगरा से विधायक बने। 2009 में शिशिर कांठी से सांसद बने। इसके बाद मनमोहन सरकार के नेतृत्व वाली यूपीए 2 में उन्हें ग्रामीण विकास राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई।

शिशिर 2014 और 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में टीएमसी के टिकट पर जीत दर्ज की। अभी वह पार्टी के सबसे वरिष्ठ सांसद भी हैं। 49 वर्षीय सुवेंदु अधिकारी इन्हें शिशिर अधिकारी के बेटे हैं। कांग्रेस के छात्र संघ से राजनीति की शुरुआत करने वाले सुवेंदु ने 25 साल की उम्र में ही अपनी संगठनात्मक क्षमता का परिचय देना शुरू कर दिया था व पार्षद चुने गए।

साल 2006 में सुवेंदु पहली बार अपने पिता की कांठी (दक्षिण) सीट से विधायक चुने गए। 2009 में उन्होंने टीएमसी के टिकट पर तुमलुक लोकसभा सीट से चुनाव जीता। 2014 में उन्होंने फिर इसी सीट से जीत दर्ज की। 2016 में उन्होंने विधानसभा चुनाव जीता और ममता सरकार में मंत्री बने।

2009 में सुवेंदु ने जो विधानसभा सीट छोड़ी थी वहां से उनके छोटे भाई दिब्येन्दु अधिकारी ने उपचुनाव जीत विधानसभा में प्रवेश किया। दिब्येन्दु ने अपनी परिवार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए 2011 और 2016 में भी इस सीट से जीत दर्ज की।

मालूम हो कि अभी कुछ दिन पहले ही ममता बनर्जी के बेहद करीबी रहे शुभेंदु अधिकारी ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। वह लंबे समय से ममता से नाराज चल रहे थे। बीच में यह भी चर्चा थी कि पश्चिम बंगाल में इस बार टीएमसी की चुनावी रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर ने उनसे मुलाकात भी की थी लेकिन बात बनी नहीं।

शुभेंदु अधिकारी ममता सरकार में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर थे। उन्होंने राज्य सरकार की तरफ से मिलने वाली सुरक्षा भी छोड़ दी थी। शुभेंदु का कहना है कि पार्टी पहले ममता बनर्जी के इशारों पर चलती थी लेकिन पिछले कुछ दिनों से प्रशांत किशोर के इशारों पर ही इसकी दिशा तय हो रही थी।

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